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स्क्रीनिंग चेंबर और प्लांटेड ड्राइंग बेड निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप: दीवारों में दरारें, सूचना पटल नदारद; EE बोले- SDO से लेंगे जानकारी

  तखतपुर। तखतपुर क्षेत्र में लाखों रुपए की लागत से बनाए गए “स्क्रीनिंग चेंबर एंड प्लांटेड ड्राइंग बेड” निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार और ...

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 तखतपुर। तखतपुर क्षेत्र में लाखों रुपए की लागत से बनाए गए “स्क्रीनिंग चेंबर एंड प्लांटेड ड्राइंग बेड” निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितता का मामला सामने आया है। मौके पर जमीनी पड़ताल में निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब मिली, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्य का मूल्यांकन सत्यापन कर ठेकेदार को लगभग 30 लाख रुपए से अधिक का भुगतान भी कर दिया गया।

स्थानीय लोगों ने क्या कहा ?

जानकारी के मुताबिक, निर्माण स्थल पर बनाए गए टैंकों में कई जगह गुणवत्ताहीन कार्य दिखाई दे रहा है। दीवारों और प्लास्टर में दरारें, अधूरापन और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू से ही सवालों के घेरे में था, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने जांच करने के बजाय आंख मूंदकर भुगतान कर दिया।

योजना सिर्फ कागजों और भुगतान फाइलों तक सीमित

सबसे हैरानी की बात यह है कि लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद इस योजना का उपयोग लगभग शून्य है। जिस उद्देश्य को लेकर यह निर्माण कराया गया था, वह आज तक पूरा नहीं हो सका। योजना केवल कागजों और भुगतान फाइलों तक सीमित होकर रह गई है।

निर्माण कार्य में पारदर्शिता के नियमों की उड़ी धज्जियां

निर्माण कार्य में पारदर्शिता के नियमों की भी खुलकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। आठ निर्माण कार्यों में लगाए जाने वाले नागरिक सूचना पटल में भी गड़बड़ी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक केवल तीन स्थानों पर सूचना पटल लगाए गए, जबकि बाकी जगहों पर सिर्फ दीवार लेखन कर औपचारिकता निभा दी गई।

जनप्रतिनिधियों ने जाहिर की थी कड़ी नाराजगी

बता दें कि पूर्व में जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्यों में सूचना पटल नहीं लगाए जाने को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।



तखतपुर क्षेत्र में लगातार निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों की मौन सहमति से ही घटिया निर्माण और भुगतान का खेल चल रहा है। अब देखना यह होगा कि लाखों रुपए की इस योजना में सामने आए भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपों पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

वही इस मामले के संबंधित एस डी ओ रघुवीर साहू से ग्रामीण यांत्रिकी कार्यालय जाकर जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन इस विषय में जानकारी देने से बचते रहे और मीडिया में बोलने से इंकार करते रहे। इस मामले को लेकर बिलासपुर कार्यपालन अभियंता (ई ई ) पी एल पडवार ने संबंधित SDO से जानकारी लेने की बात कही है।