*जांच के लिए भेजे गए तरबूज के सैंपल *स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कर रही अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच रायपुर, . असल बात news. अब कई स...
*जांच के लिए भेजे गए तरबूज के सैंपल
*स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कर रही अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच
रायपुर, .
असल बात news.
अब कई सारे फल खाने लायक नहीं रह गए हैं.इन फलों को जिस तरह से पकाया जाता है रखा जाता है उसे यह जहरीले हो जाते हैं. इन फलों में आम केला तरबूज खरबूजा जैसे मुख्य फल हैं जिनको पकाने के तरीके से उनके जहरीले हो जाने की आशंका रहती है. इस तरह की आशंका बहुत पहले से व्यक्त की जाती रही है और बहुत सारे लोगों ने इन फ्लो को खाना बंद भी कर दिया है. जांजगीर चांपा जिले से खबर आ रही है कि वहां तरबूज खाने के बाद एक बच्चे की मृत्यु हो गई है तथा तीन बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं. इस घटना से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है.
जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम धुरकोट में तरबूज खाने के बाद एक बच्चे की मृत्यु तथा 3 अन्य बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम एवं संबंधित एसडीएम को जिला चिकित्सालय जांजगीर भेजा , कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम जांजगीर ने मेडिकल टीम को गांव में संबंधित परिवार के सभी लोगों के स्वास्थ्य जांच के लिए रवाना किया तथा तहसीलदार को गांव में इस बाबत पूरे मामले पर लगातार निगरानी रखने हेतु निर्देशित किया गया।
सिविल सर्जन श्री एस. कुजूर ने बताया बच्चों के तरबूज और चिकन खाने बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। एक बच्चे की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो गई, जबकि 3 अन्य बीमार बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है जिनकी हालत अब सामान्य है ।कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित तरबूज के सैंपल जांच हेतु भेज दिए गए हैं। साथ ही मृत बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया है और विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
जिला प्रशासन द्वारा पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है तथा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर निगरानी भी कर रही है।
जानिए कि तरबूज कैसे हो सकते हैं जहरीले...
आपने इस सीजन में देखा होगा कि बाजार में तरबूजों की भरमार दिख रही थी. लेकिन आपने यह नहीं सोचा होगा कि तरबूजों की इतनी भरमार कैसे हो गई है... और इतनी अधिक पैदावार कैसे बढ़ गई है... असल में सामान्य तौर पर तरबूजों की वैसी ही पैदावार होती है लेकिन अब तो तरबूजों की फसल लेने के क्षेत्र सिमटते से जा रहे हैं जिससे पैदावार और काम हो गई है. बाजार में जो तरबूजों के भरमार दिख रही है उसे कृत्रिम उत्पादन कहा जा सकता है. सब्जियों की तरह अब कई सारे फलों को भी इंजेक्शन से बढ़ाया- फुलाया जा रहा है. इससे आम व्यापारियों को तो बड़ा मुनाफा हो रहा है लेकिन लोगों की जान पर आफत आ गई है.
जानकार बताते हैं कि तरबूजों के पौधों में इंजेक्शन लगा दिया जाता है.जिससे वे तेजी से अप्राकृतिक रूप से बढ़ने लगते हैं. एक-दो दिनों के भीतर ही फल बेचने लायक हो जाता है. और यही फल आपको बाजार में मिल रहे हैं. उसे इंजेक्शन की मात्रा तरबूज के भीतर गुना तक पहुंचती है और वे तरबूज को जहरीला भी बना सकते हैं.
इसी तरह केले के साथ भी हो रहा है.कच्चे केले को मंदिरों में लाया जाता है और उसे, उस एसिड में डूबे आता है जिससे वहां एक-दो दिनों के भीतर ही पक जाए. फिश एसिड में डूबने के बाद किला एक-दो दिन तो पकड़ पीला पढ़कर अच्छा दिखता है लेकिन उसके बाद उसमें सडन लगने लगती है और वह काला पड़ने लगता है. जबकि कॉर्बेट से पकाया गया कला 15- 20 दिनों के बाद भी काला नहीं पड़ता है. ऐसा केला, खाने पर उसके साथ एसिड शरीर में पहुंचने से जहरीला भी साबित हो सकता है.
आम के साथ भी करीब-करीब यही हो रहा है.


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