Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज: मां की अर्थी उठाई, बड़ी बेटी ने दी अंतिम संस्कार की अग्नि

  बिलासपुर। समाज की परंपराओं और रूढ़ियों से अलग एक भावुक कर देने वाला दृश्य आज उस समय देखने को मिला, जब एक बेटी ने अपने मां को अंतिम विदाई ...

Also Read

 बिलासपुर। समाज की परंपराओं और रूढ़ियों से अलग एक भावुक कर देने वाला दृश्य आज उस समय देखने को मिला, जब एक बेटी ने अपने मां को अंतिम विदाई देने का साहसिक निर्णय लिया। आमतौर पर अंतिम संस्कार की रस्में बेटे निभाई हैं, लेकिन इस बेटी ने यह परंपरा तोड़ते हुए अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट पर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया। पूरा मामला बिलासपुर जिले के परसाही का है।



ग्राम परसाही निवासी भूरी बाई चौहान का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनकी दो बेटियां है। एक तरफ मां के जाने का दुख तो दूसरी तरफ घर में बेटा नहीं होने से अंतिम संस्कार की चिंता इन सब से परे भूरी बाई चौहान की बड़ी बेटी ने एक साहसिक कदम उठाया और मां के अंतिम संस्कार की खुद जिम्मेदारी ली। उन्होंने छोटी बहन के साथ मिलकर पूरे रीति रिवाज से मां के अंतिम संस्कार की तैयारियां की और दोनों बेटियों ने मां को अंतिम कांधा देते हुए श्मशान तक ले गए, जिसके बाद बड़ी बेटी ने मां को मुखाग्नि दी।



अंतिम संस्कार के दौरान हर व्यक्ति की आंखें नम थीं

मां के निधन के बाद परिवार गहरे शोक में डूबा हुआ था। ऐसे कठिन समय में बेटी ने खुद को संभाला और मां के प्रति अंतिम कर्तव्य निभाने के लिए आगे आई। नम आंखों और भारी मन से उसने मां को मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और माहौल बेहद भावुक हो उठा।


मां ने बेटियों को हमेशा बेटे की तरह पाला था

चौहान परिवार को नजदीक से जानने वाले बताते हैं कि मां ने अपनी दोनों बेटियों को हमेशा बेटे की तरह पाला। उसे हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और जीवन में मजबूत बनने की सीख दी। शायद यही संस्कार थे, जिन्होंने इस कठिन घड़ी में बेटी को इतना मजबूत बनाया कि वह मां को विदा करने के लिए खुद आगे खड़ी हो गई। इस घटना ने समाज को एक गहरा संदेश दिया है कि रिश्तों का मूल्य किसी परंपरा से बड़ा होता है। आज उस बेटी ने यह साबित कर दिया कि बेटियां केवल परिवार की शान ही नहीं, बल्कि हर जिम्मेदारी निभाने का साहस और सामर्थ्य भी रखती है।