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कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में ज़िले में पहली बार पाँचों विकासखण्डों के प्राचार्य, शिक्षक एवं विद्यार्थी पहुँचे पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय कोण्डागांव हेड मेंटर विनायक कोहली के समन्वय में बस्तर की कला के संरक्षण एवं अनुभवात्मक शिक्षा की पहल का शुभारंभ

कोण्डागांव, असल बात News  29 सितंबर 2026  ज़िले के शैक्षिक इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ा। कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के मार्गदर्शन म...

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कोण्डागांव,

असल बात News

 29 सितंबर 2026


 ज़िले के शैक्षिक इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ा। कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में चल रही ज़िला भूगोल प्रयोगशाला परियोजना के अंतर्गत पहली बार ज़िले के पाँचों विकासखण्डों से चयनित विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक एवं विद्यार्थी एक साथ पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय, कोण्डागांव पहुँचे। उद्देश्य था कृ उस मॉडल को प्रत्यक्ष देखना, जहाँ भूगोल किताब के पन्नों से निकलकर बस्तर की मिट्टी, कला और संस्कृति से जुड़ता है।

विद्यालय के प्राचार्य श्री नंदकिशोर वासनिक एवं परियोजना के हेड मेंटर श्री विनायक कोहली ने अतिथियों का स्वागत किया। परिचय और विद्यार्थियों से संवाद के बाद सभी ने सोशल साइंस लैब एवं मिनी बस्तर आर्ट म्यूज़ियम कॉर्नर का भ्रमण किया, जिसे क्षेत्रीय मीडिया ने छत्तीसगढ़ में अपनी तरह की पहली पहल बताया है।

बस्तर की कला को बचाने की पहल

बस्तर आर्ट म्यूज़ियम कॉर्नर में विद्यार्थियों से यहाँ प्रदर्शित कलाकृतियों के बारे में प्रश्न पूछे गए। कई वस्तुएँ बच्चों के अपने आस-पास की थीं, फिर भी उनके नाम और कहानियाँ उनके लिए नई थीं। यहीं से इस परियोजना का मूल विचार सामने आया कृ बस्तर और भारत की कला हमारी पहचान है, और उसे सहेजने का सबसे सशक्त माध्यम है उसे शिक्षा से जोड़ना। कला-समेकित शिक्षण परियोजना इसी सोच पर आधारित है, ताकि बच्चे अपनी धरती की कला को केवल देखें नहीं, बल्कि समझें, अपनाएँ और आगे बढ़ाएँ।

जहाँ भूगोल और बस्तर एक-दूसरे से मिलते हैं

इसके बाद विद्यार्थी समूहों में सोशल साइंस लैब पहुँचे। भूगोल के मॉडल, मानचित्र और ऐतिहासिक मॉडलों के बीच उन्होंने देखा कि बस्तर की मिट्टी, वहाँ की फसलें, वहाँ का शिल्प और वहाँ का जीवन कृ सब भूगोल के ही अध्याय हैं। लैब का बज़र गेम विद्यार्थियों के बीच सबसे लोकप्रिय रहा; हर सही उत्तर के साथ उत्साह बढ़ता गया और सीखना एक खेल बन गया। यही अनुभवात्मक शिक्षा का सार है कृ बच्चा जो स्वयं करता है, वही सबसे गहराई से सीखता है।

प्रस्तुतीकरण और चर्चा

सम्मेलन कक्ष में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों ने संगीत शिक्षक श्री मनोज ध्रुवे के निर्देशन में स्वागत गीत प्रस्तुत किया, और कार्यक्रम का संचालन श्री सच्चिदानंद तिवारी ने किया।

हेड मेंटर श्री विनायक कोहली ने कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई, जिला शिक्षा अधिकारी, केन्द्रीय विद्यालय संगठन रायपुर संभाग की उपायुक्त श्रीमती सोमा घोष, सहायक आयुक्त एवं विद्यालय के प्राचार्य के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह पहल संभव हो सकी।

प्रस्तुतीकरण में वीडियो के माध्यम से दिखाया गया कि भूगोल किस प्रकार जीवन और अन्य विषयों से जुड़ा है, तथा विद्यालय में कला-समेकित एवं अनुभवात्मक शिक्षण किस तरह व्यवहार में लाया जा रहा है। इसके बाद प्रयोगशाला की संरचना एवं जाँच-सूची पर चर्चा हुई, ताकि प्रत्येक विद्यालय अपनी परिस्थिति के अनुसार अपनी प्रयोगशाला तैयार कर सके।

बच्चों की आवाज़, शिक्षकों के प्रश्न

विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए, जिन्हें परियोजना के लिए संकलित किया गया। शिक्षकों ने कक्ष एवं आधारभूत संरचना जैसी व्यावहारिक कठिनाइयाँ रखीं, जिन पर मिलकर समाधान खोजे गए। प्राचार्य ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण है शुरुआत करना कृ कमियाँ धीरे-धीरे पूरी होती जाएँगी।

आगे की राह

समापन पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षक एवं हेड मेंटर श्री विनायक कोहली ने परियोजना की दिशा रखते हुए कहारू

“बच्चे विद्यालय आकर केवल व्याख्यान सुनकर न लौटें, बल्कि सीखने को अनुभव करें, ताकि जो सीखें वह जीवन भर साथ रहे। जब बस्तर की कला कक्षा का हिस्सा बनेगी, तभी वह सुरक्षित रहेगी कृ और यहीं से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ज़मीनी स्तर पर साकार होगी।” कृ विनायक कोहली, हेड मेंटर