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अस्पताल की छत बनी खतरा… नकली खाद पर किसानों का हंगामा… ग्रामीणों ने अपने दम पर बहाल की बिजली… मशरूम खाने से परिवार की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

  सुकमा . छिंदगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रसूति वार्ड पहली ही बारिश में गंभीर अव्यवस्थाओं का सामना कर रहा है. एनएच-30 पर स्थित अस्...

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 सुकमा. छिंदगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रसूति वार्ड पहली ही बारिश में गंभीर अव्यवस्थाओं का सामना कर रहा है. एनएच-30 पर स्थित अस्पताल की छत से लगातार पानी टपकने से प्रसूताओं और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं. दीवारों में नमी बढ़ने से करंट फैलने की आशंका भी बनी हुई है. पिछले तीन दिनों से बिजली बंद रहने के कारण बड़ा हादसा टल गया. बताया गया कि मई में आए आंधी-तूफान में छत क्षतिग्रस्त हुई थी, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई. बारिश के दौरान वार्ड का फर्श और मरीजों के बेड तक भीगने की शिकायत सामने आई है. परिजनों ने बिस्तर नियमित नहीं बदले जाने का भी आरोप लगाया है. युवा कांग्रेस ने अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि क्षतिग्रस्त छत की मरम्मत जारी है. बीएमओ ने जल्द समस्या दूर करने का भरोसा दिया है. बारिश के बीच मरीजों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. मानसून ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तैयारियों की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है.




राजनीति

नकली खाद के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन, जांच और कार्रवाई की मांग

जगदलपुर. नकली एवं मिलावटी खाद-बीज के विरोध में बड़ी संख्या में किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे. किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पूरे जिले में खाद-बीज की जांच कराने की मांग की. विरोध दर्ज कराने के लिए किसानों ने कथित नकली डीएपी का प्रदर्शन भी किया. समिति का आरोप है कि मिलावटी खाद से किसानों की मेहनत और फसल दोनों खतरे में हैं. खाद विक्रेताओं, गोदामों और भंडारण स्थलों की जांच की मांग उठाई गई. दोषी पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त कर कठोर कार्रवाई की मांग भी की गई. एक किसान केंद्र के खिलाफ मिली शिकायतों की निष्पक्ष जांच की भी मांग रखी गई. यदि खाद नकली साबित होती है तो किसानों को राशि लौटाने या गुणवत्तायुक्त खाद देने की मांग की गई. किसानों का कहना है कि हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी गुणवत्तापूर्ण उर्वरक नहीं मिल रहा. समिति ने इसे किसानों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी बताया. प्रशासन से जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज करने के संकेत भी दिए गए. अब किसानों की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है.

कोंडागांव. ग्राम पंचायत पलारी में देशी मशरूम खाने के बाद एक ही परिवार के आठ लोग फूड पॉइजनिंग की चपेट में आ गए. सभी को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. पीड़ितों में दो बच्चे, तीन महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं. बताया गया कि सभी ने रविवार दोपहर फूटू यानी देशी मशरूम की सब्जी खाई थी. कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई है. जानकारी के अनुसार पड़ोसी परिवार के कुछ सदस्य भी इसी तरह बीमार हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की निगरानी कर रहा है..अस्पताल में पांच मरीजों का इलाज जारी है, जबकि अन्य की हालत में सुधार बताया गया. चिकित्सकों ने जंगलों में मिलने वाले मशरूम के सेवन में सावधानी बरतने की अपील की है. विशेषज्ञों का कहना है कि जहरीले मशरूम की पहचान करना आसान नहीं होता. सावधानी ही ऐसे हादसों से बचाव का सबसे सुरक्षित उपाय है.

Bastar News Update : 8 साल बाद भी अधर में बचेली-गढ़चिरौली रेल परियोजना

दंतेवाड़ा. गढ़चिरौली से बचेली तक प्रस्तावित रेलवे लाइन अब भी सर्वे से आगे नहीं बढ़ सकी है. रेल मंत्रालय ने वर्ष 2018 में सर्वे को मंजूरी दी थी. करीब 490 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को बीजापुर के रास्ते जोड़ने की योजना है. रेल लाइन से खनिज परिवहन को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है. भविष्य में इसे सुरजागढ़ की खदानों और हैदराबाद दिशा तक विस्तार देने की भी चर्चा है. परियोजना से आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद है. लेकिन वर्षों बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. स्थानीय नागरिक इसे क्षेत्रीय विकास से जुड़ा अहम मुद्दा मान रहे हैं. रेल संपर्क से रोजगार और व्यापार को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है. लंबे इंतजार के बाद अब लोग परियोजना पर ठोस पहल चाहते हैं. यह रेल लाइन छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. फिलहाल परियोजना की धीमी रफ्तार लोगों की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है.

अवैध खनन पर सख्ती, नए नियमों से बढ़ेगा जुर्माना और निगरानी

जगदलपुर. राज्य सरकार ने गौण खनिज नियमों में बड़ा संशोधन लागू किया है. नए नियमों का उद्देश्य अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण करना है. अब अवैध खनन पकड़े जाने पर न्यूनतम 25 हजार रुपये प्रशमन राशि देनी होगी. अवैध परिवहन पर प्रति टन दो हजार रुपये जुर्माना भी तय किया गया है. जब्त वाहनों को छुड़ाने के लिए भारी सुरक्षा राशि जमा करनी होगी. करीब 30 साल बाद खदानों की डेड रेंट दरों में भी बढ़ोतरी की गई है. निष्क्रिय खदानों पर अब आर्थिक दबाव बढ़ेगा. सरकारी निर्माण कार्यों में रॉयल्टी व्यवस्था भी एक समान की गई है.खनिज राजस्व का हिस्सा अब जिला पंचायतों और स्थानीय निकायों को भी मिलेगा. सरकार का दावा है कि इससे राजस्व बढ़ेगा और पारदर्शिता आएगी. खनन गतिविधियों पर निगरानी पहले से अधिक कड़ी होगी. नए नियमों को अवैध खनन के खिलाफ बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है.

लाइनमैन नहीं, ग्रामीणों ने संभाली बिजली व्यवस्था

नारायणपुर. अबूझमाड़ के प्रशासनिक मुख्यालय ओरछा में तकनीकी खराबी से 19 घंटे तक बिजली गुल रही. पूरे क्षेत्र में नियमित लाइनमैन नहीं होने से स्थिति और गंभीर हो गई. घंटों इंतजार के बाद भी तकनीकी टीम नहीं पहुंची. इसके बाद सरपंच, ग्रामीण और विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर ने खुद मोर्चा संभाला. लगातार बारिश के बीच जंगल में पहुंचकर खराब लाइन की मरम्मत की गई. इसके बाद पूरे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी. बिजली बंद रहने से पेयजल, मोबाइल नेटवर्क और सरकारी कामकाज प्रभावित रहा. ओरछा फीडर से जुड़े कई गांव लंबे समय तक अंधेरे में रहे. स्थानीय लोगों ने नियमित तकनीकी अमले की मांग उठाई है. ग्रामीणों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र में यह बड़ी प्रशासनिक कमी है. घटना ने जनभागीदारी की ताकत तो दिखाई, लेकिन व्यवस्था की कमजोरी भी उजागर कर दी. अब क्षेत्र में स्थायी बिजली व्यवस्था मजबूत करने की मांग तेज हो गई है.

कृषि योजना में वसूली का मामला, छह महीने बाद भी कार्रवाई अधूरी

सुकमा. शैलो ट्यूबवेल योजना में किसानों से अवैध वसूली का मामला अब भी पूरी तरह नहीं सुलझा है. 26 किसानों से प्रति किसान 7,500 रुपये लेने का आरोप सामने आया था. योजना के तहत पहले ट्यूबवेल खनन होना था, लेकिन सीधे पंप वितरित कर दिए गए. कई किसानों ने लाभ किसी और को मिलने का भी आरोप लगाया. जांच के बाद विभाग ने केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया. आदेश के बावजूद किसानों की राशि लौटाने और एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई. हालांकि उप संचालक कृषि ने दावा किया कि किसानों की राशि वापस करा दी गई है. विभाग का कहना है कि योजना पहली बार लागू होने से तकनीकी दिक्कतें आईं. इसी आधार पर संबंधित अधिकारी पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई. लेकिन पूरे मामले में जवाबदेही को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं. किसान संगठन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.