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कृषि में जलवायुपरिवर्तन, नवाचार, विविधिकरण एवं प्राकृतिक खेती पर हुआ मंथन

  रायपुर संभाग के चार कृषि विज्ञान केन्द्रों की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक  रायपुर  . असल बात news.   इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, ...

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रायपुर संभाग के चार कृषि विज्ञान केन्द्रों की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक 

रायपुर  .

असल बात news.  

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर में चार जिलों रायपुर, गरियाबंद, धमतरी एवं महासमुंद के  कृषि विज्ञान केन्द्रों की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 10वी बर्षिक बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल अपने उदबोधन में वैज्ञानिकों विभागीय अधिकारियों एवं प्रगतिशील किसानों से क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी सुझाव देने का आव्हान किया। उन्होनें कहा कि किसान वैज्ञानिक सलाह, उन्नत तकनीक तथा वैल्यु एडिशन तकनीक को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं । उन्होनें कृषि विज्ञान केन्द्रों को विश्वविद्यालय का चेहरा बताते हुए दलहन एवं तिलहन फसल का रकबा बढ़ाने पर भी निर्देश दिया।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के निदेशक विस्तार सेवायें डॉ. एस.एस. टुटेजा ने प्राकृतिक खेती एवं फसल विविधिकरण पर अपने विचार रखें साथ ही किसान उत्पादक संगठनों और स्व सहायता समूह के सदस्यों को नवाचार एवं बाजार के अनुरूप प्रोडक्ट तैयार कर आम लोगों के बीच मार्केट लिंकेज को बढ़ावा देने की बात की जिससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो सके। इस कार्यक्रम में चारों कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रमुखों ने अपने-अपने कार्यों का प्रस्तुतिकरण दिया एवं सुझाव मांगे। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर की त्रैमासिक पत्रिका इंदिरा किसान मितान एवं कृषि विज्ञान केन्द्र गरियाबंद के विस्तार प्रकाशनों का भी विमोचन सम्मानीय अतिथियों के द्वारा किया गया। 

महासमुंद और धमतरी के कृषि महाविद्यालयों के डीन डॉ. संदीप भंडारकर और डॉ. नवनीत राणा, कृषि विभाग के संयुक्त संचालक श्री गयाराम, पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक डॉ. एस.एल. उइके, चारों जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख और उनकी टीम 20 से अधिक प्रगतिशील किसान और साथ ही कृषि विभाग, दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और लीड बैंक के अधिकारी वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ अपने सुझाव साझा किए, जिसके बाद जरूरी बदलावों के साथ साल 2026-27 के लिए सभी चार कृषि विज्ञान केन्द्रों की कार्य योजनाओं को मंजूरी दी गई।