कोण्डागांव, असल बात News 15 जुलाई 2026 प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश / अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव श्री खिलावन राम रिगरी...
कोण्डागांव,
असल बात News
15 जुलाई 2026
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश / अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोण्डागांव श्री खिलावन राम रिगरी की अध्यक्ष्ता एवं उनकी उपस्थिति में अण्डर ट्रायल रिव्यू कमेटी एवं मॉनिटरिंग सेल की बैठक मध्यस्थता कक्ष में आयोजित की गई।
बैठक में अपर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश विक्रम प्रताप चंद्रा, कलेक्टर कोण्डागांव नुपूर राशि पन्ना, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेशमा बैरागी पटेल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गायत्री साय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कपिल चंद्रा केन्द्रीय जेल जगदलपुर से कल्याण अधिकारी शिवप्रसाद करसायल, एवं लोक अभियोजन अधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग से सम्मलित रहे।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विचाराधीन बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा कर पात्र बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित करना तथा संबंधित विभागों के बिच समन्वय स्थापित कर न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध एवं प्रभावी बनाना तथा न्यायालय भवनों एवं न्यायिक अधोसंरचना से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा, निमार्ण कार्यों से आने वाली बाधाओं का निराकरण तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कियान्वयन सुनिश्चित करना था।
बैठक के दौरान विचाराधीन बंदियों के लंबित प्रकरणों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई तथा ऐसे बंदियों के मामलों पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया गया, जो जमानत अथवा अन्य वैधानिक प्रावधानों का लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं। प्रधान न्यायाधीश महोदय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि विचाराधीन बंदियों के मामलों की नियमित समीक्षा करते हुए पात्र प्रकरणों में शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाही सुनिश्चित की जाए।
साथ ही बैठक में नवीन जिला एवं सत्र न्यायालय भवन निर्माण हेतु आंबटित भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ करने की प्रकिया शीघ्रता से किये जाने व न्यायिक अधिकारियों के आवास, न्यायालय परिसर में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं, निर्माण एवं मरम्मत कार्याे तथा अधोसंरचना विकास से संबंधित विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही लंबित निमार्ण कार्यों में आने वाली व्यावहारिक एवं प्रशासनिक बाधाओं के निराकरण तथा कार्याे को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के संबध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया कि न्यायालय अधोसंरचना से जुड़े सभी कार्याे को नियमित समीक्षा करते हुए गुणवत्ता एवं समय-सीमा विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे न्यायिक कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो तथा न्यायालयों में आने वाले न्यायार्थियों एवं अधिवक्ताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सके।


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