Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


रासायनिक खादों के भारी-भरकम बोझ से मिली मुक्ति, कम लागत और अधिक मुनाफे से चमक रही किस्मत

*नैनो तकनीक से शैलेंद्र ने पकड़ी आधुनिक खेती की राह, बने मिसाल रायपुर  . असल बात news.   02 जून 2026. पारंपरिक खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर ...

Also Read


*नैनो तकनीक से शैलेंद्र ने पकड़ी आधुनिक खेती की राह, बने मिसाल

रायपुर  .

असल बात news.  

02 जून 2026.

पारंपरिक खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर जब कोई किसान आधुनिक तकनीकों का हाथ थामता है, तो वह न सिर्फ अपनी तकदीर बदलता है बल्कि पूरे अंचल के लिए प्रेरणा बन जाता है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम लटुवा के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे आज क्षेत्र में ऐसी ही एक अभिनव मिसाल बनकर उभरे हैं। पिछले दो वर्षों से नैनो उर्वरक (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) का लगातार उपयोग कर वे उन्नत और स्मार्ट खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

*परिवहन के खर्च और मेहनत से मिली बड़ी राहत

         कृषक शैलेंद्र कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खेती में लगातार बढ़ती लागत और पारंपरिक बोरी वाले खादों को दुकान से खेत तक लाने (परिवहन) तथा उनके छिड़काव में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों ने उन्हें कुछ नया सोचने पर मजबूर किया था। कृषि विभाग की सलाह पर जब उन्होंने नैनो तकनीक को अपनाया, तो इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले और संतोषजनक रहे। शैलेंद्र बताते हैं कि नैनो उर्वरक बाजार में पारंपरिक खाद की तुलना में बेहद कम दाम पर और आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जिससे खेती के शुरुआती खर्च में ही बड़ी बचत हो जाती है।

*नैनो उर्वरक के प्रमुख व्यावहारिक लाभ

         शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जहाँ पहले भारी-भरकम बोरियों को ढोने और संभालने में किसानों का पसीना छूट जाता था, वहीं अब महज आधे लीटर की छोटी बोतलें आसानी से जेब या थैले में रखकर खेत तक ले जाई जा सकती हैं। पानी में घोलकर फसलों पर सीधे छिड़काव करने से पौधों को पोषक तत्व सीधे और सही मात्रा में मिलते हैं, जिससे खाद की बर्बादी नहीं होती। इस तकनीक के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता में सुधार आया है और प्रति एकड़ पैदावार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

*इस वर्ष भी नैनो तकनीक पर ही भरोसा

        अपनी इस शानदार सफलता से उत्साहित होकर शैलेंद्र ने इस वर्ष भी अपनी फसलों में पूरी तरह से केवल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का ही उपयोग करने का निर्णय लिया है। लटुवा के इस जागरूक किसान की यह अनूठी पहल आज पूरे बलौदाबाजार जिले के किसानों को आधुनिक, कम लागत वाली और आत्मनिर्भर खेती की एक नई राह दिखा रही है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी शैलेंद्र की इस सफलता को रोल मॉडल के रूप में पेश कर अन्य ग्रामीण किसानों को नैनो तकनीक अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।