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नदी में डूबने से हाथी शावक की मौत, 5 महीने में 9वीं घटना से वन विभाग पर उठे सवाल

  रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पानी में डूबने से एक और हाथी शावक की मौत का मामला सामने आया है। यह घटना रायगढ़ वन मंडल के खरसिया र...

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 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पानी में डूबने से एक और हाथी शावक की मौत का मामला सामने आया है। यह घटना रायगढ़ वन मंडल के खरसिया रेंज के अंतर्गत मांड नदी के गुर्दा गांव के पास की है। वन विभाग के कार्य प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जनवरी से लेकर अब तक केवल रायगढ़ जिले में ही 9 हाथी शावकों की जान जा चुकी है।

पढ़िए पूरी खबर

जानकारी के अनुसार, खरसिया क्षेत्र के मांड नदी (गुर्दा के पास) में एक हाथी शावक का शव तैरता हुआ देखा गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर हाथी शावक के शव को नदी से बाहर निकाला।

बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से इस इलाके में 50 से अधिक हाथियों का एक बड़ा दल लगातार विचरण कर रहा है। इसी दल के एक शावक की गुर्दा क्षेत्र के पास नदी में डूबने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी में मौत का कारण पानी में डूबना बताया जा रहा है, हालांकि अंतिम स्थिति पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी।

सबसे चिंताजनक बात ये है कि केवल मई महीने में ही डूबने से चार हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। वहीं जनवरी 2026 से अब तक जिले में कुल 9 हाथी शावकों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही इन मौतों ने वन विभाग की निगरानी, ट्रैकिंग और हाथी प्रबंधन प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।




वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के बढ़ते विचरण क्षेत्र, जल स्रोतों के आसपास पर्याप्त निगरानी की कमी और मानव-हाथी संघर्ष वाले इलाकों में सुरक्षा उपायों की कमजोर व्यवस्था ऐसे हादसों की बड़ी वजह बन सकती है। स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों ने भी लगातार हो रही मौतों पर चिंता जताते हुए व्यापक जांच और प्रभावी संरक्षण रणनीति की मांग की है।

फिलहाल वन विभाग की टीम मौके पर जांच कर रही है और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि छत्तीसगढ़ में हाथियों, विशेषकर शावकों की सुरक्षा को लेकर मौजूदा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है।