नई दिल्ली,छत्तीसगढ़ . असल बात news. 0 विशेष संवाददाता 0 अशोक त्रिपाठी हमारे भारत देश में,नारी शक्ति क...
नई दिल्ली,छत्तीसगढ़ .
असल बात news.
0 विशेष संवाददाता
0 अशोक त्रिपाठी
हमारे भारत देश में,नारी शक्ति को सम्मान और अधिकार देने के लिए महिला आरक्षण विधेयक को लाने का सिलसिला बहुत पहले से चल रहा है,इस पर बातें भी वर्षों- वर्षों पहले से हो रही हैं.लेकिन लगता है कि हम इसके लिए सिर्फ यही तक सीमित हैं.सदन में पांच बार पेश होने के बावजूद यह आरक्षण अभी तक लागू नहीं हो सका है. वर्ष 2023 में यह विधेयक संसद (राज्यसभा और लोकसभा दोनों)में पास हो गया,लेकिन कानूनी अडचनों के चलते इसका लागू होना,अभी तक लंबित है इसके लागू होने का इंतजार है.महिला आरक्षण क़ानून में संशोधन के लिए लाया गया,संविधान में 131वां संशोधन बिल लोकसभा में वोटिंग के बाद गिर गया.बिल दो तिहाई वोट हासिल करने में नाकाम रहा. बिल के पक्ष में 298 वोट मिले जबकि इसके विरोध में 230 वोट मिले. इसके साथ दो और बिल लाए गए थे.संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बाकी दोनों संशोधन बिलों को आगे नहीं बढ़ाने का फ़ैसला किया गया है.संसद में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने वाले क़ानून में संशोधन और डीलिमिटेशन से जुड़े बिलों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच बहस के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया और फिर वोटिंग हुई. लेकिन यह बिल दो तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं कर सका और गिर गया. इस संशोधन विधेयक के पारित नहीं हो पाने के बाद पूरे देश भर में राजनीतिक गलियारों में आरोप- प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है. महिलाओं को आरक्षण देने के लिए लाए गए इस विरोध के पारित नहीं होने पर सत्ता पक्ष के द्वारा विपक्ष के नेताओं पर जमकर आरोप लगाए जा रहे हैं. दूसरी तरफ विपक्ष ने कहा है कि इस तरह से संविधान पर हमला करने की कोशिश की गई है.इन सब के बीच एक प्रश्न यह भी उठ रहा है कि यह तो संशोधन विधेयक था,महिला आरक्षण विधेयक 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) लोकसभा और राज्यसभा में पहले ही पास हो चुका है तो क्या इसे अब लागू किया जा सकता है.संसदीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह विधेयक वर्ष 2029 के पहले तक लाया जा सकता है. लेकिन इसमें परिसीमन और जनगणना की कानूनी दिक्कतें हैं जिसकी वजह से लागू करने में अड़चन हो रही है, जिसे लागू करने के पहले इसे पूर्ण करने का प्रावधान है. यह भी कहा जा रहा है कि यह विधेयक मूल रूप में लागू होता है तो अभी जितनी सीटें हैं,उन पर ही आरक्षण देना पड़ेगा और उससे, तो कई लोगों की 'सीट' स्वाभाविक रूप से कट जाएगी. मतलब लोकसभा की 543 सीटों में लगभग 201 सीटें,सीधे-सीधे आरक्षित हो जाएगी, जिनमें से ज्यादातर पर अभी तक पुरुष वर्ग के लोग ही चुनाव लड़ते रहे हैं और वहां एक तरह से इसी वर्ग का दबदबा और कब्ज़ा रहा है.इससे,यह विधेयक मूल रूप से लागू होने पर आरक्षण का तो बड़ा विरोध हो सकता है.
भारतीय संसदीय इतिहास में महिलाओं को, आरक्षण देने के बारे में, वर्षों पहले से मुखरता से बातें हो रही है. बातें तो इस तरह से होती है कि लगभग सभी राजनीतिक दल और राजनेताओं का बड़ा वर्ग महिला को आरक्षण देने के पक्ष में ही दिखता हैं,लेकिन जब इसे लागू करने की बात आती है तो यह विधेयक, हर बार, धरा का धरा रह जाता है.महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) 1996 से लेकर अब तक 5 बार संसद में आ चुका है. आप देखेंगे तो,वर्ष 1996 के बाद से लगातार इस स्वीकृत कराने का प्रयास किया गया है लेकिन 1996, 1998, 1999और 2008 विधेयक अस्वीकृत ही हो जाता रहा और वर्ष 2023 में इसे फिर से संसद में पेश किया गया। सितंबर 2023 में 128वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के रूप में यह पहली बार पारित हो सका, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी 28 सितंबर 2023 को मिल चुकी है . लेकिन, कहीं पर विधिक दिक्कत होगी, जिसकी वजह से यह अभी भी लागू नहीं हुआ है. संसदीय मामलों के जानकार बताते हैं कि अभी कोई बहुत बड़ी अधिक समस्या नहीं है लेकिन, यह महिला आरक्षण विधेयक 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम), मुख्य रूप से परिसीमन (Delimitation) और जनगणना (Census) से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रियाओं के कारण अभी तक लागू नहीं हुआ है। इसके कानून में प्रावधान रखा गया है कि महिला आरक्षण, आगामी जनगणना और उसके बाद सीटों के पुनर्गठन (परिसीमन), के बाद ही लागू हो सकेगा, जिससे इसके 2029 या उससे आगे तक लागू होने की संभावना है। अब यह सोचने की जरूरत है कि लोकसभा की सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती है तो वर्तमान में जितनी सीटे हैं उसके अनुपात में ही यह संशोधन विधेयक लागू हो जाएगा. लेकिन ऐसे में जहां पुरुष वर्ग की प्रधानता रही है वह सीटे भी आरक्षित हो जाने की संभावना है. संभवत: इसीलिए कोशिश की जा रही है कि सीटों की संख्या बढ़ाई जाए और उसके साथ आरक्षण लागू किया जाए.
लोकसभा में, संशोधन विधेयक पर किसने क्या कहा..
सदन में विपक्ष के जिन लोगों के द्वारा संशोधन विधेयक का विरोध किया गया है, उनमें से कई ने कहा है कि इसका मूल विधेयक है, जो दोनों सदनों में पास होने के बाद अब कानून बन गया है,को लागू किया जाता है तो उसका विरोध नहीं होगा.लोकसभा में इस महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक पर सदन में करीब 133 सांसदों ने अपनी बात रखी, जिनमें 56 महिला सदस्य शामिल थीं।राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा देश की राजनीति में हो रहे बदलाव से डरी हुई है, अपनी ताकत के क्षरण से भयभीत है और इसलिए भारतीय राजनीतिक नक्शे को फिर से गढ़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने यह असम और जम्मू-कश्मीर में किया और अब पूरे भारत में करने की कल्पना कर रही है, लेकिन ऐसा करने के लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत है।राहुल गांधी ने संसद में कहा कि भाजपा दक्षिण भारतीय राज्यों, पूर्वोत्तर के राज्यों और छोटे राज्यों को यह संदेश दे रही है कि अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए हम आपका प्रतिनिधित्व छीन लेंगे। उन्होंने इसे राष्ट्र-विरोधी कार्य करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक एंटी-नेशनल एक्ट है और हम आपको ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को उत्तर-दक्षिण या पूर्व-पश्चिम जैसे नैरेटिव के आधार पर बांटना नहीं चाहिए और सभी को इससे ऊपर उठना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समान अधिकार हैं और देश की एकता व अखंडता को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि अगर 543 सीटों के आधार पर महिला आरक्षण लागू किया जाए तो तमिलनाडु में 13 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और 26 सीटें सामान्य रहेंगी। उन्होंने आगे कहा कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू किया जाए तो संसद की सीटों में 6 की कमी आ सकती है, लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है। इसके बजाय सरकार हर राज्य में सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि प्रतिनिधित्व को और व्यापक बनाया जा सके।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मैजिशियन वाले बयान पर डीएमके सांसद टीआर बालू ने कहा कि मैजिशियन शब्द अनपार्लियामेंट्री नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बिल सदन के फ्लोर पर ही हार जाएगा। बालू ने स्पष्ट किया कि यह शब्द पूरी तरह संसदीय मर्यादा के दायरे में है और विपक्ष इस विधेयक को हराने के लिए पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगा।
लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि जब भी विपक्ष के नेता राहुल गांधी बोलते हैं, सरकार उन्हें बीच में रोकती है और अब उनकी स्पीच को हटाने की कोशिश कर रही है।शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा, 'वे महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन कराना चाहते हैं। संशोधनों के जरिए वे जनगणना को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं, जो परिसीमन के लिए जरूरी थी। वे बनावटी तरीके से देश का नक्शा बदलना चाहते हैं। लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, 'उनकी बात सुनना इतना सिरदर्द भरा था। वे अपने बचपन के ट्रॉमा से गुजर रहे हैं और बचपन में देखे गए जादू के शो के बारे में बता रहे हैं। यह एक उपद्रव था। चेयर ने भी उन्हें रोकने को कहा। उन्होंने संसद का मजाक उड़ाया है।'
राज्यसभा में बोलते हुए आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि मेरी पार्टी के नेता सदन में मौजूद नहीं हैं, साथ ही हाल ही में नियुक्त नए उपनेता भी अनुपस्थित हैं, जबकि हाल ही में हटाए गए उपनेता के रूप में मैं सदन में उपस्थित हूं। उन्होंने उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को उनके तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई दी.
समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला आरक्षण का मुखौटा पहनकर परिसीमन के जरिये खुद को सशक्त बनाना चाहती है। उन्होंने लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चर्चा में भाग लेते हुए यह दावा भी किया कि सरकार विधेयक को लेकर जल्दबाजी दिखा रही है क्योंकि वह जाति जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन नहीं चाहती।
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि जो लोग आज नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर रहे हैं वे तब कोई काम नहीं कर पाए जब उनकी सरकार थी। उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक जातिगत जनगणना के भी आंकड़े आ जाएंगे। उन्होंने कहा, हमारे मित्र यह भी सवाल उठा रहे थे कि चुनावी लाभ के लिए हमने इस विशेष सत्र को बुलाया है। कुछ राज्यों के चुनाव तो 9 अप्रैल के खत्म हो गए हैं। कुछ ही राज्यों के बाकी रह गए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए सरकार द्वारा संसद में लाए गए विधेयकों पर उसे आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाया कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) की कवायद 'राजनीतिक नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन)' साबित होगी। थरूर ने लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को ''देश के इतिहास की सबसे विवादास्पद और जटिल प्रशासनिक कवायदों में से एक'' में बंधक बनाकर रखना है।
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने महिला आरक्षण बिल पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा है कि कहा, 'ये बिल तो 2023 में पास हो गया था। और कांग्रेस इसे पूरा समर्थन दिया वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पास हुआ था तो इसे अब लाने की जरूरत तो थी नहीं. अभी ये परिसीमन के लिए लाया गया है. अभी तेल की कीमत बढ़ने वाली है इससे ध्यान हटाने के लिए इसे लाया गया है।'
लोकसभा में बिल के गिर जाने के बाद सत्ता पक्ष की पार्टी से जुड़े सदस्यों ने विपक्ष के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया तथा कहा कि,महिला आरक्षण विधेयक का सदन में विरोध कर विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह महिलाओं के सशक्तीकरण के खिलाफ खड़ा है। सड़क हो या संसद, उनकी राजनीति हमेशा महिलाओं के अधिकारों को दबाने की रही है। कांग्रेश पार्टी का इसमें लंबा इतिहास रहा है, लेकिन यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार है-नारी शक्ति को उसका अधिकार दिलाकर रहेगी और महिला आरक्षण विधेयक को आने वाले समय में हर हाल में पारित कराएगी।
"महिला आरक्षण विधेयक सबसे पहली बार 1996 में देवेगौड़ा सरकार लेकर आई, इसके बाद इसे सीमा मुखर्जी की अध्यक्षता वाली एक समिति को दे दिया गया और समिति ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी लेकिन फिर वो विधेयक कभी इस सदन तक नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार 1998 में ये विधेयक लेकर आई, लेकिन विपक्ष ने इसे सदन में पेश ही नहीं करने दिया। श्री शाह ने कहा कि इसके बाद एक बार फिर अटल जी की सरकार बिल लेकर आई लेकिन एक बार फिर इस पर चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इसके बाद फिर डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार संशोधन विधेयक राज्य सभा में लेकर आई, जहां पारित होने के बाद ये विधेयक लोक सभा में आ ही नहीं सका।"
अब जानिए क्या है "नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023"
वह 19 सितम्बर 2023 गणेश चतुर्थी के अवसर का दिन था.उस दिन वर्षों से लंबित महिलाओं को आरक्षण का अधिकार देने वाला बिल सदन में पेश हुआ। इस संविधान संशोधन के पारित होने के साथ ही लोक सभा और राज्यों की विधानसभाओं में एक-तिहाई स्थान देश की महिलाओं के लिए आरक्षित होने का रास्ता खुल गया.... लेकिन अभी कुछ अडचन बाकी है। एक समय देश के 70 करोड़ लोग ऐसे थे जिनके घरों में बैंक खाता नहीं था। जन-धन योजना शुरू होने और बैंक खाता खोलने का अभियान चलने से, परिणामस्वरूप 52 करोड़ बैंक खाते खोले गए जिनमें से 70 प्रतिशत बैंक खाते माताओं के नाम से खोले गए। भारत देश में महिलाएं, हमेशा,पुरुषों से भी अधिक सशक्त मानी जाती रही हैं और इस विधेयक से “Women-led Development” की कल्पना की गई है।वर्तमान प्रावधान के अनुसार संसद में चुनकर आने वाले सदस्यों की तीनों श्रेणियों – सामान्य (जिसमें ओबीसी शामिल है), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दे दिया गया है।इस संविधान संशोधन की धारा 330 (ए) और धारा 332 (ए) के माध्यम से महिला आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही तीनों श्रेणियों में वर्टिकल आरक्षण देकर एक-तिहाई सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। डिलिमिटेशन कमीशन हमारे देश की चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित करने वाली एक महत्वपूर्ण इकाई का कानूनी प्रावधान है और वो नियुक्ति से होता है लेकिन क्वासी ज्यूडिशियल प्रोसीडिंग्स होती हैं। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करते हैं और इसमें चुनाव आयुक्त के एक प्रतिनिधि भी होते हैं।नए कानून में प्रावधान किया गया है कि जिन एक-तिहाई सीटों को रिज़र्व करना है, उन सीटों का चयन डिलिमिटेशन कमीशन करेगा। ये कमीशन हर राज्य में जाकर, ओपन हियरिंग देकर एक पारदर्शी पद्धति से इसके लिए नीति निर्धारण करेंगे।
उस समय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री ने लोकसभा में संविधान (एक सौ अट्ठाईसवां संशोधन) विधेयक, 2023 के पारित होने की उत्साहपूर्वक सराहना करते हुए विधेयक, के पारित होने का स्वागत किया था ।प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा था कि वे सभी पार्टियों के सांसदों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने इस विधेयक के पक्ष में मतदान किया।नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक कानून है जो महिलाओं के सशक्तिकरण को और बढ़ाएगा और हमारी राजनीतिक प्रक्रिया में महिलाओं की अधिक भागीदारी का मार्ग प्रशस्त करेगा।“
अगले आम चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी
2023 में जब 106वां संविधान संशोधन विधेयक पारित हुआ तो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता भी साफ हो गया। लेकिन 2027 में जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू होना था जिससे इस अधिनियम के लागू होने में 2034 तक की देरी हो सकती थी।
तीन प्रमुख विधेयक की क्या है खास बातें..
संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 ताकि नवीनतम उपलब्ध जनगणना के आधार पर नए परिसीमन को सक्षम किया जा सके, लोकसभा का विस्तार किया जा सके और विधानमंडलों में 33% महिला आरक्षण को संचालित किया जा सके।
संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026
लोकसभा का विस्तार: यह अनुच्छेद 81 में संशोधन करता है ताकि लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 कर दी जाए (815 राज्यों से और 35 केंद्रशासित प्रदेशों से)।
परिसीमन स्थगन को हटाना: यह विधेयक अनुच्छेद 82 के शीर्षक को "प्रत्येक जनगणना के बाद पुन: समायोजन" से बदलकर "निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण" करने का प्रावधान और प्रत्येक जनगणना के बाद राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या को पुन: समायोजित करने की आवश्यकता को हटा देता है।
वर्तमान में, अनुच्छेद 81 (2) और (3) लोकसभा सीटों को वर्ष 1971 की जनगणना तथा विधानसभा सीटों को 2001 की जनगणना के अनुसार स्थिर रखते हैं, "जब तक वर्ष 2026 के पश्चात् की गई प्रथम जनगणना के प्रासंगिक आँकड़े प्रकाशित न हो जाएँ"।परिसीमन को वर्ष 2026 के बाद की जनगणना से अलग करके सरकार वर्ष 2011 की जनगणना के डेटा का उपयोग करके परिसीमन करने की सोच।
परिसीमन विधेयक, 2026
जहाँ संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 इस व्यापक परिवर्तन की अनुमति देता है, वहीं यह विधेयक उसे लागू करने की वास्तविक व्यवस्था प्रदान करता है।
निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण: आयोग को सीटों के आवंटन का पुनः समायोजन करने तथा ‘नवीनतम प्रकाशित जनगणना आँकड़ों’ (जो वर्तमान में 2011 की जनगणना की ओर संकेत करते हैं) के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करने का दायित्व सौंपा गया है।
आरक्षण का कार्यान्वयन: आयोग को राज्यों के बीच सीटों का आवंटन करने, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करने तथा अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और महिलाओं के लिये आरक्षण निर्धारित करने का दायित्व सौंपा जाएगा।
संघ राज्य क्षेत्र (कानून संशोधन) विधेयक, 2026
यह वह सक्षम विधेयक है, जो इन संरचनात्मक परिवर्तनों को उन संघ राज्य क्षेत्रों तक विस्तारित करने के लिये आवश्यक है, जिनकी अपनी विधायिकाएँ हैं।
यह दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में महिलाओं के लिये 33% आरक्षण तथा संबंधित परिसीमन सुधार को लागू करता है।
परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य क्षेत्र (कानून संशोधन) विधेयक, 2026 सामान्य विधेयक हैं, जिन्हें संसद में साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
महिला आरक्षण का क्रियान्वयन
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करना: आगामी परिसीमन प्रक्रिया आधिकारिक रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2023) के कार्यान्वयन को प्रारंभ करेगी।यह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सभी सीटों में से एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिये आरक्षित करने का प्रावधान करता है।
अब आगे क्या रास्ता हो सकता है..
इस संशोधन के लोकसभा में गिरने का मतलब यह नहीं है कि आरक्षण कानून रद्द हो गया है, बल्कि यह है कि महिलाओं को 33% आरक्षण मिलने की प्रक्रिया और अधिक विलंबित हो गई है.नया संशोधन बिल परिसीमन (Delimitation) और लोकसभा सीटों को बढ़ाकर आरक्षण लागू करने से संबंधित था, इसके गिरने से 33% आरक्षण को जल्द से जल्द (संभवतः 2029 से पहले) लागू करने की प्रक्रिया अटक गई है। पुराना कानून प्रभावी रहेगा: 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (106वां संवैधानिक संशोधन) पहले ही अधिसूचित हो चुका है, लेकिन यह कानून जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होने के प्रावधान के साथ है। नए संशोधन के बिना, यह आरक्षण प्रक्रिया 2026 के बाद की जनगणना तक लंबित रह सकती है।
सरकार ने साफ किया था कि नया संशोधन विधेयक परिसीमन से सीधे जुड़ा हुआ था, इसलिए इसके गिरने से नई सीटों के साथ आरक्षण देने की योजना पर सवालिया निशान लग गया है। सरकार द्वारा लाया गया यह नया संशोधन बिल पास नहीं होने पर अब, 33% आरक्षण को अमली जामा पहनाने के लिए नए सिरे से सहमति बनानी होगी या कोई दूसरा तरीका खोजना होगा।



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