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 अमेरिका और ईरान के बीच आज यानि शुक्रवार को पाकिस्तान में शांति वार्ता तय है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की ओर से आई एक खबर में कहा गया था कि ईरानी व...

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 अमेरिका और ईरान के बीच आज यानि शुक्रवार को पाकिस्तान में शांति वार्ता तय है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की ओर से आई एक खबर में कहा गया था कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे हैं. लेकिन, अब ईरान ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है.


ईरान ने इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह झूठा बताया है और साफ कहा कि कोई भी टीम पाकिस्तान नहीं गई है. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक एक जानकार सूत्र ने कहा कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर कालीबाफ दोनों ही तेहरान में मौजूद हैं और अपने काम में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि मीडिया में चल रही यह खबर कि ईरानी टीम इस्लामाबाद पहुंच गई है, पूरी तरह गलत है.





इससे पहले 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान 2 सप्ताह के सीजफायर पर सहमत हुए थे, यह भी तय हुआ था कि दोनों देशों के नेता पाकिस्तान में मीटिंग के लिए मिलेंगे. बातचीत शनिवार को इस्लामाबाद में होनी है. इसके लिए अमेरिकी डेलिगेशन आज इस्लामाबाद पहुंचेगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.


क्या ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं है?


ईरान ने न सिर्फ प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने के दावे को खारिज किया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका लेबनान में सीजफायर को लागू नहीं करता और इजराइल हमले बंद नहीं करता, तब तक कोई वार्ता नहीं होगी. ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी यही बात दोहराई. उसने कहा कि तेहरान का अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है, जब तक लेबनान में पूरी तरह युद्धविराम लागू नहीं हो जाता.


इस बीच ईरान के नेताओं ने अमेरिका और इजराइल पर दबाव भी बढ़ाया है. संसद अध्यक्ष गालीबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल के पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है. अगर उन्होंने जल्द ही हमले नहीं रोके तो हालात और बिगड़ सकते हैं. ईरानी अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस तरह की खबरें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं ताकि भ्रम पैदा किया जा सके और ईरान के रुख को कमजोर किया जा सके. हालांकि ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना जरूर की है. लेकिन उसने साफ किया है कि किसी भी बातचीत के लिए उसकी शर्तें पूरी होनी जरूरी हैं. ईरान का कहना है कि वह सिर्फ स्थायी समाधान चाहता है, न कि अस्थायी समझौते.


लेबनान में सीजफायर की मांग क्यों कर रहा है ईरान


  • हिजबुल्लाह लेबनान में ईरान समर्थित और हथियारों से लैस सबसे शक्तिशाली मिलिशिया है। ईरान इसके जरिए इजराइल पर दबाव बनाता है।
  • लेबनान में इजराइली हमले जारी रहने से अगर हिजबुल्लाह कमजोर होता है, तो ईरान का क्षेत्रीय नेटवर्क टूट सकता है।
  • ईरान ने सीजफायर के लिए 10 शर्तें रखी थीं, जिनमें क्षेत्रीय युद्ध खत्म करना शामिल है। यानी ईरान, लेबनान, यमन पर हमले रोकना।

अमेरिका-ईरान के बीच इन मुद्दों पर बातचीत होनी है


  • ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम- अमेरिका का कहना है कि ईरान में कोई संवर्धन नहीं होगा। ईरान को अपना सारा हाई-लीवल इनरिच्ड यूरेनियम बाहर करना होगा और न्यूक्लियर फैसिलिटीज बंद या सीमित करनी होंगी।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज- दुनिया का बहुत सारा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान अभी भी इसका नियंत्रण रखना चाहता है और टोल (फीस) लेने की बात कर रहा है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि रास्ता पूरी तरह खुला और सुरक्षित हो, बिना किसी रुकावट या फीस के।
  • बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम- अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाना चाहता है।
  • सैंक्शंस हटाना- ईरान चाहता है कि सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तुरंत हटा दिए जाएं, फ्रोजन एसेट्स वापस मिलें और मुआवजा भी मिले।