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स्वरूपानंद महाविद्यालय में “आधुनिक युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय स्तर की हिंदी पत्र लेखन प्रतियोगिता, विजेताओं का भव्य सम्मान

भिलाई . असल बात news.   स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में फेरोस्क्रेप निगम लिमिटेड, निगमन कार्यालय, भिलाई एवं हिंदी विभाग के सं...

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भिलाई .

असल बात news.  

स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में फेरोस्क्रेप निगम लिमिटेड, निगमन कार्यालय, भिलाई एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “आधुनिक युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय हिंदी पत्र लेखन प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण समारोह श्री पंकज त्यागी, मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन एवं विधि), एफ.एस.एन.एल.के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। विशेष अतिथि के रूप में श्रीमती वंदना चौधरी, राजभाषा अधिकारी, एच.एस.सी.एल., भिलाई, श्रीमती शाहीन टिकरिहा, शाखा प्रबंधक, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक तथा श्री छगन लाल नागवंशी, राजभाषा अधिकारी, एफ.एस.एन.एल. एवं प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला की  उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का सफल संयोजन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता वर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा आज के डिजिटल युग में जहाँ संचार के साधन अत्यंत तीव्र और सरल हो गए हैं, वहीं भावनाओं की गहराई कहीं न कहीं क्षीण होती प्रतीत होती है। पत्र लेखन, जो कभी हृदय की संवेदनाओं का जीवंत माध्यम था, आज तकनीकी भीड़ में कहीं खोता जा रहा है इसका मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा एवं पत्र लेखन के प्रति रुचि एवं संवेदनशीलता को पुनर्जीवित करना है।

श्रीपंकज त्यागी ने अपने उद्बोधन में कहा आज के समय में पुस्तकों को पढ़ने और लिखने की परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति अच्छा लिख नहीं पाता, वह न तो प्रभावी ढंग से बोल सकता है और न ही गहराई से सोच सकता है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संदर्भ में कहा कि इसकी बौद्धिक क्षमता उतनी ही है, जितना डेटा उसमें डाला गया है। साधारण भाषा में, सहज और स्पष्ट तरीके से लेखन करना ही वास्तविक प्रतिभा का परिचायक है। आज के समय में प्रतिभा कहीं न कहीं ओझल होती जा रही है, ऐसे में इस प्रकार की प्रतियोगिताएं उसे मंच प्रदान करती हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के विभिन्न प्रांतों से प्रतिभागियों का आगमन इस आयोजन की गरिमा को बढ़ाता है।

श्री शंकराचार्य शिक्षण परिसर, हुडको भिलाई के निदेशक डॉ. दीपक शर्मा ने कहा कि पत्र लेखन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, अभिव्यक्ति कौशल तथा संवेदनात्मक परिपक्वता को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा तकनीकी युग में जहां रिश्तों की स्थिरता कम होती जा रही है, वहीं हिंदी पत्र लेखन प्रतियोगिता का दस वर्षों तक निरंतर आयोजन होना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि देशभर से प्राप्त पत्र इस प्रतियोगिता की व्यापकता को दर्शाते हैं तथा इसके सफल संचालन के लिए हिंदी विभाग एवं आयोजकों को धन्यवाद दिया।उन्होंने कहा कि पत्र लेखन से बौद्धिक एवं रचनात्मक क्षमता का विकास होता है, क्योंकि लिखने के लिए पहले गहराई से सोचना आवश्यक होता है। जितना अधिक हम सोचते हैं, उतना ही हमारे मस्तिष्क का बेहतर उपयोग होता है। 

श्रीमती वंदना चौधरी ने कहा पत्र लेखन एक महत्वपूर्ण कला है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने पत्र लेखन को एक नया सेतु प्रदान किया है,परंतु इसकी सीमाएँ भी हैं। प्रतिभागियों ने अपने पत्रों में शब्दों की मर्यादा और शालीनता का सुंदर निर्वहन किया।उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें अपनी बौद्धिक क्षमता का पूर्ण उपयोग करते हुए पत्र लिखना चाहिए, क्योंकि के अत्यधिक प्रयोग से लेखन की मौलिकता प्रभावित होती है।

श्रीमती शाहीन टिकरिहा ने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इमोजी की दुनिया से बाहर निकलकर अपने विचारों को शब्दों में अभिव्यक्त किया। कुछ प्रतिभागियों ने एआईका प्रयोग किया, परंतु अधिकांश ने अपने पत्रों में मौलिकता की स्पष्ट छाप छोड़ी, जिससे उनकी कलात्मक और रचनात्मक अभिव्यक्ति सामने आई। आज हिंदी में अंग्रेजी का प्रभावबढ़तेजारहाहै , हिंदी में पत्र लेखन करना राजभाषा के प्रति सम्मान का प्रतीक है।उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि अलग और मौलिक लिखने का प्रयास करें। 

श्री छगन लाल नागवंशी, ने छत्तीसगढ़ी हास्य कविता का सस्वर पाठ कर विद्यार्थियों का मन मोह लिया महाविद्यालय सभागार ठहाकों से गूंज उठा। प्रतियोगिता में देशभर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें विजेताओं की सूची इस प्रकार रही— प्रथम एकता दीवान 'इंटीग्रेटेड एम एस एसी सप्तम सेमेस्टर'"मूल विज्ञान केंद्र,पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय" रायपुर (छ. ग.), द्वितीय हेम प्रकाश यादव बीएससी तृतीय वर्ष शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग(छ.ग.), तृतीय राजकुमार साहू बी एड् तृतीय सेमेस्टर महाविद्यालय - सांई सदन एजुकेशन स्कूल शिक्षा महाविद्यालय ,बेंद्री, रायपुर (छ:ग:), विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार कुश गायकवाड बी एड् प्रथम सेमेस्टर भिलाई मैत्री कॉलेज ,रिसाली सेक्टर ,भिलाई 1.सांत्वना राघवेंद्र सिंह बीएससी तृतीय सेमेस्टर शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग(छ.ग.), 2. सांत्वना दामिनी एम कॉम तृतीय सेमेस्टर शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग, 3. सांत्वना कल्पना बम्बोडे एम.ए.समाजशास्त्र प्रथम सेमेस्टर शासकीय नेमीचंद जैन कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय दल्ली राजहरा, बालोद। 4. सांत्वना फूलप्रित कौर एम.एस.सी. प्रथम सेमेस्टर स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर, हुडको, भिलाई, 5. सांत्वना हरितिका सिन्हा एमएससी III सेमेस्टर केमेस्ट्री भिलाई महिला महाविद्यालय, सेक्टर 9, भिलाई कार्यक्रम का कुशल संचालन संयुक्ता पाढ़ी, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी द्वारा किया गया। धन्यवाद डॉ. सुनीता वर्मा नेदिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ मीना मिश्रा विभागाध्यक्ष गणित और एन बबीता विभागाध्यक्ष भौतिक शास्त्र, श्रीमती कामिनी वर्मा सहायक प्राध्यापक गणित, श्रीमती अनामिका राय सहायक प्राध्यापक गणित ने विशेष योगदान दिया कार्यक्रम में डॉ शर्मिला सामल विभागाध्यक्ष वाणिज्य सप्रा खुशबू पाठक विभागाध्यक्ष प्रबंधन सप्रा वाणिज्य विजय मिश्रा तिलक साहू सप्रा, प्रबंधन इंद्राणी दास विशेष रूप से उपस्थित हुए।

यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति का मंच बना, बल्कि हिंदी भाषा एवं पत्र लेखन की परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ।