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संघर्ष में पल-पल हालात बदल रहे हैं,यह संकट अलग प्रकार का है,यह टीम इंडिया की भी बहुत बड़ी परीक्षा की घड़ी,कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य,सरकार संकट के इस समय में पूरी संवेदनशीलता से कम कर रही है,युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियां,लंबे समय तक बनी रहती हैं,तो गंभीर दुष्परिणाम तय -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

  पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का संशोधित  पाठ नई दिल्ली,छत्तीसगढ़ . असल बात news.  देश के प्रधानम...

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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का संशोधित  पाठ

नई दिल्ली,छत्तीसगढ़ .

असल बात news. 

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच चल रहै संघर्ष से बनी परिस्थितियों लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका दुष्परिणाम तय है. उन्होंने कहा कि संघर्ष में पल-पल हालात बदल रहे हैं,यह संकट अलग प्रकार का है,यह टीम इंडिया की भी बहुत बड़ी परीक्षा की घड़ी,कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य,सरकार संकट के इस समय में पूरी संवेदनशीलता से कम कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में निरंतर निर्णय लिए गए हैं।पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था। वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर राज्यसभा में अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। वे आज संसद के उच्च सदन के सामने और देशवासियों के सामने इन विकट परिस्थितियों पर सरकार का पक्ष साझा कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है। इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान के रूटीन सप्लाई प्रभावित हो रही है। गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है। होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए। 

 उन्होंने कहा कि युद्ध की शुरुआत के बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। हम गल्फ के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य डायलॉग और डिप्लोमेसी के माध्‍यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने डि एस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी उनसे बात की है। कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। 

 प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि संकट की स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 3 लाख 75 हज़ार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक 1000 से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। हमारी सरकार संकट के इस समय में पूरी संवेदनशीलता से कम कर रही है। सभी देशों ने वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। हालांकि यह बहुत दुखद है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है और कुछ घायल भी हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में परिवारजनों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है। 

उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट के बारे में कहा कि यह विश्व व्यापार के सबसे बड़े रूट्स में से एक है। विशेष तौर पर कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बहुत बड़ी मात्रा में होता है। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। प्रयास यह है कि जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई भारत पहुंचे। बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्‍चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं।  लेकिन इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियों अगर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो गंभीर दुष्परिणाम तय है। इसलिए भारत अपनी रेसिलियंस बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास बीते वर्षों में किए हैं, उनको और गति दे रहा है। 

 उन्होंने कहा कि कोई भी संकट हो, वह हमारे हौसलों और हमारे प्रयास दोनों की परीक्षा लेता है। देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में निरंतर निर्णय लिए गए हैं। एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है। पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था। वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है। बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारों को भी प्राथमिकता दी है। बीते 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक तक स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी डेवलप किया गया है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। साथ ही, बीते दशक में भारत की रिफायनिंग कैपेसिटी भी अच्छी-खासी बढ़ाई गई है। मैं आपके माध्यम से सदन को और देश को या यह देना चाहता हूं कि भारत के पास क्रूड ऑयल के पर्याप्त स्टोरेज के और निरंतर सप्लाई की व्यवस्थाएं हैं। सरकार की कोशिश है कि ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर ज्यादा निर्भरता ना रहे। सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के अलावा पीएनजी पर भी बल दे रही है। बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बीते दिनों में इस काम को और तेज किया गया है। साथ ही, एलजी के घरेलू उत्पादन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। 

 उन्होंने कहा कि हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों, यही एकमात्र विकल्प है। जैसे भारत का 90% से अधिक तेल विदेशी जहाजों पर होता है, यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को और भी गंभीर बना देती है। इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए करीब 70000 करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग, मेंटेनेंस एंड ओवरहालिंग, ऐसी हर सुविधा का निर्माण पर तेज गति से कम कर रहा है। भारत अपने डिफेंस सेक्टर को भी अधिक रेसिलियंट बना रहा है। बीते दशक में किए गए प्रयासों से भारत आज अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है। एक समय था, जब भारत अपने जीवन रक्षक दावों के कच्चे माल यानी API के लिए भी दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भर था। बीते वर्षों में देश ने भारत में ही API इकोसिस्टम बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैंं। इसी प्रकार रेयर अर्थ मिनिरल्स में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। 


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि  वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला दिया है। अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे रिकवर होने में भी दुनिया को बहुत समय लगेगा। भारत में इसका कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहे हैं। हमारे इकोनॉमी के फंडामेंटल्‍स मजबूत हैं और सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म ऐसे हर प्रभाव के लिए एक रणनीति के साथ काम कर रही है। भारत सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, यह ग्रुप नियमित मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट में आने वाली हर दिक्कत का आकलन करता है और यह ग्रुप आवश्यक समाधान पर भी निरंतर काम करता रहा है। जैसे कोरोना के समय में अलग-अलग सेक्टर्स की चुनौतियों से निपटने के लिए एक्सपोर्ट्स और ऑफिसर्स के empowered groups बने थे, वैसे ही कल ही ऐसे 7 नए  empowered groups का भी गठन किया गया है। यह ग्रुप सप्लाई चैन, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइजर, गैस, महंगाई, ऐसे विषयों पर त्वरित और दूरगामी रणनीति के तहत कार्यवाही करने का काम करेंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि इस साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे। 

 ऐसे कठिन समय में सरकार यह भी प्रयास कर रही है कि आने वाले बुवाई के सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त सप्लाई के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। सरकार का निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ ना पड़े। मैं देश के किसानों को फिर आश्वस्त करूंगा कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है। 


 उन्होंने इस दौरान देश के सभी राज्यों की सरकारों से भी कुछ आग्रह आह्वान की कि संकट के समय गरीबों पर, श्रमिकों पर, प्रवासी साथियों पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। इसलिए पीएम गरीब कल्याण अन्‍न योजना का लाभ समय पर मिलता रहे, यह सुनिश्चित करना होगा। जहां प्रवासी श्रमिक साथी काम करते हैं, उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाए जाएं। ऐसी स्थितियों पर नजर रखने के लिए राज्य सरकारें विशेष व्यवस्थाएं करें, तो इससे काफी सुविधा होगी। राज्य सरकारों को एक और चुनौती पर भी बहुत अधिक ध्यान देना होगा, ऐसे समय में कालाबाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले बहुत एक्टिव हो जाते हैं।  संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना, हम सभी का दायित्व है। हमें इसके लिए हर जरूरी कदम, हर जरूरी रिफॉर्म्स तेजी से करते रहने होंगे। यह राज्य सरकारों के पास बहुत बड़ा अवसर भी है। यह टीम इंडिया की भी बहुत बड़ी परीक्षा है। कोरोना के महासंकट में केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया बनकर कोविड मैनेजमेंट का एक बेहतरीन मॉडल सामने रखा था। अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टी की सरकारें होने के बावजूद टेस्टिंग, वैक्सीनेशन से लेकर जरूरी चीजों की आपूर्ति टीम इंडिया के प्रयासों से ही निश्चित हो पाई थी। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना है। सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयासों से देश इस गंभीर वैश्विक संकट का प्रभावी रूप से सामना कर पाएगा। 

 उन्होंने कहा कि  बीते वर्षों में सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हर सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम से कम हो। हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों, यही एकमात्र विकल्प है। जैसे भारत का 90% से अधिक तेल विदेशी जहाजों पर होता है, यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को और भी गंभीर बना देती है। इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए करीब 70000 करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग, मेंटेनेंस एंड ओवरहालिंग, ऐसी हर सुविधा का निर्माण पर तेज गति से कम कर रहा है। भारत अपने डिफेंस सेक्टर को भी अधिक रेसिलियंट बना रहा है। बीते दशक में किए गए प्रयासों से भारत आज अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है। एक समय था, जब भारत अपने जीवन रक्षक दावों के कच्चे माल यानी API के लिए भी दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भर था। बीते वर्षों में देश ने भारत में ही API इकोसिस्टम बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैंं। इसी प्रकार रेयर अर्थ मिनिरल्स में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। 

वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला दिया है। अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे रिकवर होने में भी दुनिया को बहुत समय लगेगा। भारत में इसका कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहे हैं। हमारे इकोनॉमी के फंडामेंटल्‍स मजबूत हैं और सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म ऐसे हर प्रभाव के लिए एक रणनीति के साथ काम कर रही है। भारत सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, यह ग्रुप नियमित मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट में आने वाली हर दिक्कत का आकलन करता है और यह ग्रुप आवश्यक समाधान पर भी निरंतर काम करता रहा है। जैसे कोरोना के समय में अलग-अलग सेक्टर्स की चुनौतियों से निपटने के लिए एक्सपोर्ट्स और ऑफिसर्स के empowered groups बने थे, वैसे ही कल ही ऐसे 7 नए  empowered groups का भी गठन किया गया है। यह ग्रुप सप्लाई चैन, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइजर, गैस, महंगाई, ऐसे विषयों पर त्वरित और दूरगामी रणनीति के तहत कार्यवाही करने का काम करेंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि इस साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे। 

सरकार यह भी प्रयास कर रही है कि आने वाले बुवाई के सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त सप्लाई के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। सरकार का निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ ना पड़े। मैं देश के किसानों को फिर आश्वस्त करूंगा कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है।


हमें इसके लिए हर जरूरी कदम, हर जरूरी रिफॉर्म्स तेजी से करते रहने होंगे। यह राज्य सरकारों के पास बहुत बड़ा अवसर भी है। यह टीम इंडिया की भी बहुत बड़ी परीक्षा है। कोरोना के महासंकट में केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया बनकर कोविड मैनेजमेंट का एक बेहतरीन मॉडल सामने रखा था। अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टी की सरकारें होने के बावजूद टेस्टिंग, वैक्सीनेशन से लेकर जरूरी चीजों की आपूर्ति टीम इंडिया के प्रयासों से ही निश्चित हो पाई थी। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना है। सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयासों से देश इस गंभीर वैश्विक संकट का प्रभावी रूप से सामना कर पाएगा। 

यह संकट अलग प्रकार का है और इसके समाधान भी अलग प्रकार से ही तय किया जा रहे हैं। हमें धीरज के साथ, संयम के साथ, शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है। 

जैसा कि हम देख रहे हैं कि इस युद्ध को लेकर पल-पल में हालात बदल रहे हैं। इसलिए मैं देशवासियों से भी कहूंगा कि हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना ही होगा। इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहने की प्रबल आशंका है। लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं, सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है, हर निर्णय ले रही है।