Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


जानिए क्या है, छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक में,नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों का अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना

छत्तीसगढ़  . असल बात news.   राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से यह मुद्दा काफी चर्चा में रहा है कि प्रदेश की नई सरकार धर्म...

Also Read


छत्तीसगढ़  .

असल बात news.  

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद से यह मुद्दा काफी चर्चा में रहा है कि प्रदेश की नई सरकार धर्मांतरण को रोकने के लिए क्या कोई बड़ा ठोस कानून लेकर आएगी.इस बारे में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाती रहे हैं तो वहीं राज्य के विभिन्न मंत्री इस बारे में विभिन्न अवसरों पर बयान भी देते रहे हैं. अब राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है और इसे कैबिनेट में पारित भी कर लिया गया है.आगे यह विधेयक,विधानसभा में लाया जाएगा. अभी राजनीतिक विश्लेषकों के साथ आम लोगों के दिमाग में यह सवाल कौध रहा है कि आखिर इस विधेयक में विशेष क्या बातें हैं. और यह किस तरह से धर्मांतरण को रोकने में सफल साबित होगा.तो हमारे पास विभिन्न सोर्स से कुछ जानकारियां सामने आई है. इसमें विशेष यह बताया जा रहा है कि विधेयक में,नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों का अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा का  प्रावधान किया गया है.जब यह कानून आ रहा है तो लोगों के दिमाग में एक प्रश्न यह भी उठ रहा है कि इस कानून में क्या यह भी प्रावधान किया जाएगा कि जो लोग स्वेच्छा से अपना धर्म परिवर्तित कर लेते हैं,धर्म परिवर्तन के बाद उन्हें पूर्व में जो आरक्षण तथा अन्य विधिक लाभ प्राप्त होते थे क्या उसे समाप्त कर दिया जाएगा. यह कानून पूर्ववर्ती तिथियां से लागू किया गया तो छत्तीसगढ़ में बवंडर उठना स्वाभाविक है.

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 का मुख्य उद्देश्यअवैध धर्मांतरण रोकना और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कानून बनाना है और इस विशेष उद्देश्य के साथ विधेयक, 2026 का प्रारूप तैयार किया गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले दशको में छत्तीसगढ़ राज्य में धर्मांतरण बड़े पैमाने पर हुआ है. आदिवासी बहुल इलाकों में यह धर्मांतरण काफी अधिक हुआ है. इस काम में कई संगठनों के बीच सक्रिय रहने का पता चला है. कई गांव के गांव धर्मांतरित कर दिए गए. इसकी शिकायतें हैं तो धर्मांतरण के नाम पर काफी बवाल भी मचा है कई जगह मारपीट होने की घटनाएं भी हुई है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसके मसौदे को मंजूरी दी गई है जिसमें प्रस्तावित कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा। सरकार का कहना है कि धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी बनाया जाएगा।

प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी। प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।

विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।

कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।

• यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।

• सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है।

• विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।