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मरौदा रेलवे स्‍टेशन पर भी यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है सुविधाये, प्रवेश/निकास द्वार, प्रकाश व्यवस्था, जन उद्घोषणा प्रणाली तथा बुकिंग काउंटर का कार्य प्रगति पर, सांसद विजय बघेल के प्रश्न पर केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी

                                                     File photo  नई दिल्‍ली . असल बात news.   दुर्ग जिले के अंतर्गत आने वाले मरौदा रेलवे स्ट...

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                                                     File photo 

नई दिल्‍ली .

असल बात news.  

दुर्ग जिले के अंतर्गत आने वाले मरौदा रेलवे स्टेशन का तेजी से विकास किया जा रहा है.इस रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकास हेतु चिन्हित किया गया है। यहां प्रवेश/निकास द्वार, प्रकाश व्यवस्था, जन उद्घोषणा प्रणाली तथा बुकिंग काउंटर के परिष्करण का कार्य किया जा रहा है।केन्‍द्रीय रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित उत्तर में मरौदा रेलवे स्‍टेशन के विकास के संबंध में विस्‍तृत जानकारी दी। 

उल्लेखनीय है कि दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री विजय बघेल का इस संबंध में लोकसभा में अतारांकित प्रश्‍न आया. इसका उत्तर देते हुए केन्‍द्रीय मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ स्थित मरौदा स्टेशन पर उच्च स्तरीय प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म शेल्टर, प्रतीक्षालय, पेयजल व्यवस्था, मूत्रालय शौचालय, बैठने की व्यवस्था आदि सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

  मरौदा स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकास हेतु चिन्हित किया गया है। मरौदा स्टेशन पर विकास कार्य तेज गति से शुरू किया गया हैं। कॉकोर्स और प्रतीक्षालय, प्लेटफॉर्म शेल्टर, प्लेटफॉर्म सतह संबंधी कार्य, पार्किंग एवं पहुंच मार्ग का संरचनात्मक कार्य पूरा कर लिया गया है। कॉकोर्स एवं प्रतीक्षालय, शौचालय, परिचलन क्षेत्र, प्रवेश/निकास द्वार, प्रकाश व्यवस्था, जन उद्घोषणा प्रणाली तथा बुकिंग काउंटर के परिष्करण कार्य शुरू दिए गए हैं।

  इसके अलावा, मरौदा रेलवे स्टेशन से रेलवे फाटक तक स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।भारतीय रेल में स्टेशनों का विकास/पुनर्विकास/उन्नयन/आधुनिकीकरण एक सतत और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है तथा इस संबंध में कार्य परस्पर प्राथमिकता और निधियों की उपलब्धता के अध्यधीन, आवश्यकतानुसार किए जाते हैं। किसी स्टेशन का विकास/पुनर्विकास/उन्नयन/आधुनिकीकरण कार्य स्टेशन की श्रेणी/स्थिति/संभाले गए यातायात आदि के आधार पर किया जाता है।

रेल मंत्रालय ने दीर्घकालिक आधार पर स्‍टेशनों के विकास के लिए 'अमृत भारत स्टेशन योजना' शुरू की है।इस योजना में रेलवे स्टेशनों को बेहतर बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार करना और उनका चरणों में कार्यान्वयन करना शामिल हैं। मास्टर प्लान में निम्नलिखित शामिल हैं:

स्टेशन और परिचलन क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार

स्टेशन का शहर के दोनों भागों के साथ एकीकरण

स्टेशन भवन में सुधार

प्रतीक्षालय, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पेयजल बूथों में सुधार

यात्री यातायात के अनुरूप अधिक चौड़े ऊपरी पैदल पुल/एयर कॉनकोर्स की व्यवस्था

लिफ्ट/स्वचालित सीढ़ियों/रैंप की व्यवस्था

प्लेटफॉर्म की सतह और प्लेटफॉर्म पर कवर में सुधार/व्यवस्था

‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के लिए कियोस्क की व्यवस्था

पार्किंग क्षेत्र, मल्टी-मोडाल एकीकरण

दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं

बेहतर यात्री सूचना प्रणाली

प्रत्येक रेलवे स्टेशन पर आवश्यकता को देखते हुए एक्ज़ीक्यूटिव लाउंज, व्यावसायिक बैठकों के लिए निर्दिष्ट स्थान, भूसुदर्शनीकरण आदि की व्यवस्था।

  इस योजना में आवश्यकतानुसार, चरणबद्ध रूप से और यथाव्यवहार्य दीर्घकालिक और पर्यावरण अनुकूल समाधान, गिट्टीरहित रेलपथ की व्यवस्था आदि और दीर्घावधि में स्टेशन पर सिटी सेंटर के निर्माण की भी परिकल्पना की गई है।

  अभी तक, अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत विकास के लिए 1338 रेलवे स्टेशनों को चिह्नित किया गया है जिनमें से 32 स्टेशन छत्तीसगढ़ में स्थित हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकास के लिए चिह्नित स्टेशनों के नाम निम्‍नानुसार हैं:

राज्य स्टेशनों की संख्या स्टेशनों के नाम

छत्तीसगढ़ 32 अकलतारा, अंबिकापुर, बैकुंठपुर रोड, बालोद, बाराद्वार, बेल्हा, भानुप्रतापपुर, भाटापारा, भिलाई, भिलाई नगर, भिलाई पावर हाउस, बिलासपुर, चांपा, दल्लीराजहरा, डोंगरगढ़, दुर्ग, हथबंध, जगदलपुर, जांजगीर नैला, कोरबा, महासमुंद, मंदिर हसौद, मारौदा, निपानिया, पेंड्रा रोड, रायगढ़, रायपुर जंक्शन, राजनंदगांव, सारोना, तिल्दा-नेओरा, उरकुरा, उसलापुर

*स्टेशन जहां कार्य पूरा किया जा चुका है:*

छत्तीसगढ़ राज्य में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों पर विकास कार्य तीव्र गति से शुरू किया गया है। अब तक 05 स्टेशनों का कार्य पूरा हो चुका है। छत्तीसगढ़ में पूरे किए जा चुके स्टेशनों के नाम निम्नानुसार हैं:

राज्य स्टेशनों की संख्या स्टेशनों के नाम

छत्तीसगढ़ 05 अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई, डोंगरगढ़, उर्कुरा

अन्य रेलवे स्टेशनों पर विकास कार्य तीव्र गति से शुरू किया गया है और कुछ स्टेशनों की प्रगति निम्नलिखित है:

भिलाई पावर हाउस स्टेशन: नए द्वितीय प्रवेश स्टेशन भवन, मुख्य प्रवेश स्टेशन भवन में सुधार, प्लेटफॉर्म का उन्नयन, प्रतीक्षालय में सुधार, परिचलन क्षेत्र का विकास, पार्किंग, लिफ्ट, एस्केलेटर और 12 मीटर पैदल पार पुल का विकास पूरा हो चुका है। स्टेशन भवन का फिनिशिंग कार्य और प्लेटफार्मों पर प्रकाश व्यवस्था में सुधार कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

दल्लीराझरा स्टेशन: स्टेशन भवन, प्रतीक्षालय, शौचालय, प्लेटफॉर्म उन्नयन और जन उद्घोषणा प्रणाली में सुधार कार्य पूरे हो चुके हैं। परिचलन क्षेत्र में सुधार, लैंडस्केपिंग, कला और संस्कृति से संबंधित कार्यों, साइनेज और प्लेटफार्मों पर प्रकाश व्यवस्था में सुधार कार्य शुरू किए गए हैं।

रायपुर जंक्शन स्टेशन: उपयोगी साधनों का स्थानांतरण एवं द्वितीय प्रवेश द्वार की तरफ पुनर्स्थापन कार्य पूरा हो चुका है। द्वितीय प्रवेश स्टेशन भवन, मुख्य और द्वितीय प्रवेश द्वार दोनों तरफ बहुस्तरीय पार्किंग सुविधा, सर्विस बिल्डिंग और द्वितीय प्रवेश द्वार की तरफ परिचलन क्षेत्र के विकास के संरचनात्मक कार्य शुरू किए गए हैं।

सरोना स्टेशन: नए द्वितीय प्रवेश स्टेशन भवन का कार्य, मुख्य प्रवेश स्टेशन भवन में सुधार, प्लेटफार्म का उन्नयन, प्रतीक्षा क्षेत्रों में सुधार, परिचलन क्षेत्र का विकास, पार्किंग, जन उद्घोषणा प्रणाली, लिफ्ट, एस्केलेटर और 12 मीटर पैदल पार पुल का विकास कार्य पूरा हो चुका है। स्टेशन भवन का फिनिशिंग कार्य, लैंडस्केपिंग, कला एवं संस्कृति और प्लेटफार्मों पर प्रकाश व्यवस्था में सुधार कार्य शुरू किए गए हैं।

  रेलवे स्टेशनों का विकास/उन्नयन जटिल प्रकृति का होता है, जिसमें यात्रियों और रेलगाड़ियों की संरक्षा शामिल होती है और इसके लिए दमकल विभाग से स्वीकृति, धरोहर, पेड़ों की कटाई, विमानपत्तन क्लीयरेंस इत्यादि जैसी विभिन्न सांविधिक स्वीकृतियों की आवश्यकता होती है। इनकी प्रगति जनोपयोगी साधनों को स्थानांतरित करना (जिनमें जल/सीवेज लाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल, गैस पाइप लाइन, पावर सिगनल केबल इत्यादि शामिल हैं), अतिलंघन, यात्री संचलन को बाधित किए बिना रेलगाड़ियों का परिचालन, रेलपथ व उच्च वोल्टेज बिजली लाइनों के सान्निध्य में किए जाने वाले कार्यों के कारण गति प्रतिबंध आदि जैसी ब्राउन फील्ड संबंधी चुनौतियों के कारण भी प्रभावित होती है और ये कारक कार्य को पूरा करने के समय को प्रभावित करते हैं।

  अमृत भारत स्टेशन योजना सहित अन्य योजनाओं के अंतर्गत रेलवे स्टेशनों का विकास/उन्नयन/आधुनिकीकरण के लिए वित्तपोषण सामान्यतः योजना शीर्ष-53 'ग्राहक सुविधाएँ' के अंतर्गत किया जाता है। योजना शीर्ष-53 के अंतर्गत आवंटन और व्यय का विवरण क्षेत्रीय रेल-वार रखा जाता है, न कि कार्य-वार अथवा रेलवे स्टेशन-वार अथवा राज्य-वार। छत्तीसगढ़ राज्य दो क्षेत्रीय रेलों नामतः दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और पूर्व तट रेलवे के अंतर्गत आता है। इन क्षेत्रीय रेलों के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 हेतु 1,163 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है जिसमें से (फरवरी, 2026 तक) 974 करोड़ रुपए का व्यय उपगत किया जा चुका है।

*रेलगाड़ी सेवाएं

दल्लीराझरा-दुर्ग खंड को नीचे सूचीबद्ध 10 रेल सेवाओं द्वारा सेवित किया जा रहा है: -

क्र. सं. रेलगाड़ी सं. और नाम

1 78824 दुर्ग-दल्लीराझरा डेमू

2 78825 दल्लीराझरा-दुर्ग डेमू

3 68764 रायपुर-ताड़ोकी मेमू

4 68765 ताड़ोकी-रायपुर मेमू

5 78817 दुर्ग-दल्लीराझरा डेमू

6   78818 अंतागढ़-दुर्ग डेमू

7 78826 दुर्ग-दल्लीराझरा डेमू

8 78827 दल्लीराझरा-दुर्ग डेमू

9 78815 रायपुर-अंतागढ़ डेमू

10 78816 अंतागढ़-रायपुर डेमू

इसके अलावा, रेल सेवाओं के फेरों में वृद्धि एक सतत प्रक्रिया है, जो विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है.

  दुर्ग एक मौजूदा रेलवे स्टेशन है और पहले से ही दल्लीराझरा से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में, दुर्ग-दल्लीराझरा को 05 जोड़ी रेलगाड़ियों द्वारा सेवित किया जा रहा है। वर्तमान में, इस खंड में वर्तमान यातायात को संभालने की पर्याप्त लाइन क्षमता है। रावघाट को अतिरिक्त संपर्कता प्रदान करने और उस क्षेत्र में संपर्कता सुधारने के लिए, रेलवे ने दल्लीराझरा–रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना (235 कि.मी.) का कार्य शुरू किया है। मार्च 2025 तक 1,028 करोड़ रुपए का व्यय उपगत किया जा चुका है तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस परियोजना हेतु 85 करोड़ रुपए का परिव्यय प्रदान किया गया है। परियोजना की स्थिति निम्नानुसार है:

रेलखंड स्थिति

दल्लीराझरा-ताड़ोकी (77 कि.मी.) कमीशन कर दिया गया।

ताड़ोकी-रावघाट (18 कि.मी.) कार्य पूरा हो चुका है।

रावघाट-जगदलपुर (140 कि.मी.) भूमि अधिग्रहण का कार्य शुरू कर दिया गया है।