प्रति, श्रीमान थाना प्रभारी महोदय थाना मोहन नगर जिला दुर्ग. विषय --बीमार, असहाय चलने- फिरने में असमर्थ,बीमार पीड़िता को न्याय दिलाने बा...
प्रति,
श्रीमान थाना प्रभारी महोदय
थाना मोहन नगर
जिला दुर्ग.
विषय --बीमार, असहाय चलने- फिरने में असमर्थ,बीमार पीड़िता को न्याय दिलाने बाबत
महोदय जी,
मैं श्रीमती सावित्री देवी त्रिपाठी पति श्री तीर्थमणि त्रिपाठी कैलाश नगर धमधा नाका रेलवे ओवर ब्रिज के समीप थाना क्षेत्र मोहन नगर जिला दुर्ग की निवासी हूं.मैं, अभी जिस घर में रहती हूं वह हमारा पैतृक मकान है और अभी यह मेरे पति श्री तीर्थमणि त्रिपाठी के नाम पर है. मैं कैंसर पेशेंट हूं. लगभग 25 साल पहले कीमोथेरेपी के माध्यम से इसका इलाज हुआ था. भिलाई इस्पात चंद्र के मुख्य चिकित्सालय में इसका इलाज हुआ और उसके बाद बैतूल के अस्पताल में कीमोथेरेपी की गई. बीमारी तो कुछ ठीक हो गई है लेकिन उसके बाद से मैं कई तरह की शारीरिक परेशानियों से पीड़ित हूं. लगभग 4 महीने पहले मैं फिसल कर गिर गई थी और उसकी वजह से मेरे कमर की हड्डी में फैक्चर आ गया. मुख्य चिकित्सालय में इसका ऑपरेशन किया गया जिससे मुझे कुछ राहत मिली है लेकिन तब से मैं अभी तक चलने- फिरने में असमर्थ हूं. यहां तक कि मैं स्वयं अपने पैरों पर खड़े होकर लैट्रिन बाथरूम जाने में भी असमर्थ हूं. पिछले 4 महीने से मैं सिर्फ बिस्तर पर पड़े- पड़े कुछ खा पी लेती हूँ और जीवन निर्वाह कर रही हूं. इसके साथ ही मुझे सांस की बीमारी की भी प्रॉब्लम है जिसकी दवाई मुझे पिछले लगभग 15 वर्षों से नियमित रूप से लेनी पड़ रही है. अस्वस्थता की वजह से मुझे हर 2 महीने के भीतर, कुछ दिनों तक हॉस्पिटल्स हो जाना पड़ जाता है.
यह कि मेरे घर में यहां कैलाश नगर दुर्ग में मेरे साथ मेरा मँझला बेटा भी रहता है. मैं सिर्फ दाल, चावल, रोटी ही खा पाती हूं मसाले,सब्जी से मुझे परहेज करने को कहा गया है. यहां तक की चाय जैसी चीज लेने पर मेरे मुंह में छाले पड़ जाते हैं. मेरा खाना होटल से आता है, जिसका पेमेंट मेरे पति के द्वारा किया जाता है. मेरा बेटा दलिया और दूध इत्यादि दे देता है. उसका पैसा मैं, उसे अपने बड़े लड़के से दिलवा देती हूं,
यह कि मेरे मझले बेटे ने, पिछले लगभग 15 वर्षों से एक महिला जिसका नाम संगीता है, को अपने साथ रख लिया है. उससे, उसको दो बच्चे हो गए हैं. दोनों बच्चे स्कूल जाते हैं पढ़ाई करते हैं. इसके पहले मेरे बेटे की पूर्व की पत्नी से दो और बच्चे पहले सेहैं जोकि हमारे साथ ही रहते हैं. इनमें से एक बच्चे अनमोल को लगभग 7 महीने पहले कोई बीमारी हो गई जिसके कारण वह चलने- फिरने में असमर्थ हो गया है. उसकी पढ़ाई छूट गई है.
मेरे बेटे ने जिस महिला को घर में अपने साथ रख लिया है वह हम सभी लोगों को तरह-तरह से प्रताडित करते रहती है. उसकी नजर हमारे घर पर लगी हुई है और वह बार-बार इसमें हिस्से की मांग करने लगी है. वह पिछले कई वर्षों से, मुझे और बच्चों को गंदी-गंदी गालियां देती है. घर में हमेशा कलेश पैदा करती है.
यह कि, अभी पिछले 2 महीने से वह बात-बात पर झगड़ा करने लगी है. अभी 3 दिन पहले वह मेरे कमरे में आ गई और बगल के कमरे में बच्चों के रूप में टीवी लगी है उसको तेज आवाज से बजाकर बोलने लगी इस बुढ़िया को सोने नहीं देना है इसको परेशान करना है और रात लगभग 11:00 बजे तक टीवी, तेज आवाज में चालू कर देखती रही. मैं चलने फिरने में असमर्थ हूं तो वह मेरा सामान भी इधर-उधर कर देती है.
यहां की इसके दूसरे दिन वह सुबह 6:00 बजे ही मेरे कमरे में आ गई और गाली गलौज करने लगी तथा जान से मारने की धमकी देने लगी. मैं अपने बिस्तर से उठ नहीं पाती हूं तो वह टांग पकड़ कर मुझे खींचने लगी धक्का देने लगी. फिर गुस्से में आकर वह मेरा गला दबाने लगी. मैं अपनी जान बचाने के लिए एक जोर-जोर से चिल्लाई तो पास कहीं कमरे से मेरी पोती नम्रता मेरे पास आई और मेरी जान बचाने का प्रयास करने लगी. वह महिला उसे भी धक्का देकर मारने लगी

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