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अब, जीका का खतरा, महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में इसका संक्रमण फैलने की खबर, छत्तीसगढ़ को भी रहना होगा सतर्क,केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय नेराज्यों को परामर्श जारी किया

  राज्यों से गर्भवती महिलाओं में जीका वायरस संक्रमण की जांच और संक्रमित गर्भवती माताओं के भ्रूण के विकास पर निरंतर  नजर रखते हुए सतर्कता बरत...

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राज्यों से गर्भवती महिलाओं में जीका वायरस संक्रमण की जांच और संक्रमित गर्भवती माताओं के भ्रूण के विकास पर निरंतर 
नजर रखते हुए सतर्कता बरतने का आग्रह 


  एडीज मच्छर से मुक्त रखने की कार्रवाई जरुरी 

नई दिल्ली.

असल बात न्यूज़. 

अब फिर एक संक्रामक बीमारी के फैलने की खबर आ रही है. जीका. इससे महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्र में कई लोग संक्रमित पाए जा चुके हैं.  इसके बाद स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएसडॉ. अतुल गोयल ने महाराष्ट्र में जीका वायरस के कुछ दर्ज किए गए मामलों को देखते हुए राज्यों को स्पेशल संक्रामक बीमारी को पहले से रोकने के लिए एक परामर्श जारी किया है। इसमें देश में जीका वायरस की स्थिति पर निरंतर सतर्कता बनाए रखने की जरूरत पर प्रकाश डाला गया है।डेंगू और चिकनगुनिया की तरह जीका भी एडीज मच्छर जनित वायरल बीमारी है।इसके महाराष्ट्र के पुणे में 6, कोल्हापुर में और संगमनेर 1 यानी पूरे आठ मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि यह एक नान घातक बीमारी है 

चूंकि जीका संक्रमित गर्भवती महिला के भ्रूण में माइक्रोसेफली और न्यूरोलॉजिकल प्रभाव आ जाता हैइसलिए राज्यों को सलाह दी गई है कि वे चिकित्सकों को कड़ी निगरानी के लिए सचेत करें। राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे संक्रमित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं या प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले मामलों की देखभाल करने वाले लोगों को निर्देश दें कि वे गर्भवती महिलाओं की जीका वायरस संक्रमण के लिए जांच करेंजीका से संक्रमित पाई गईं गर्भवती माताओं के भ्रूण के विकास की निगरानी करें और केंद्र सरकार के दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करें। राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे स्वास्थ्य सुविधाओं/अस्पतालों को एक नोडल अधिकारी की पहचान करने की सलाह दें जो अस्पताल परिसर को एडीज मच्छर से मुक्त रखने के लिए निगरानी और कार्य करें।

राज्यों को कीट विज्ञान निगरानी को मजबूत करने और आवासीय क्षेत्रोंकार्यस्थलोंस्कूलोंनिर्माण स्थलोंसंस्थानों और स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में वेक्टर नियंत्रण गतिविधियों को तेज करने के महत्व पर जोर देते हुए निर्देश दिया गया है। राज्यों से समुदाय के बीच घबराहट को कम करने के लिए सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों पर एहतियाती आईईसी संदेशों के माध्यम से जागरूकता को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया गया हैक्योंकि जीका किसी भी अन्य वायरल संक्रमण की तरह ही है जिसके अधिकांश मामले लक्षणहीन और हल्के होते हैं। हालांकिइसे माइक्रोसेफली से जुड़ा मामला बताया जाता हैलेकिन 2016 के बाद से देश में जीका से जुड़े माइक्रोसेफली की कोई रिपोर्ट नहीं आई है।

किसी भी आसन्न उछाल/प्रकोप का समय पर पता लगाने और नियंत्रण के लिएराज्य अधिकारियों को सतर्क रहनेतैयार रहने और सभी स्तरों पर उचित रसद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। राज्यों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे पहचान में आए जीका के किसी भी मामले के बारे में तुरंत एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपीऔर राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीवीबीडीसीको बताएं

जीका परीक्षण सुविधा राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणेराष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), दिल्ली और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआरकी कुछ चुनिंदा वायरस अनुसंधान और नैदानिक ​​प्रयोगशालाओं में उपलब्ध है। जीका संक्रमण के बारे में उच्च स्तर पर समीक्षा की जा रही है।

डीजीएचएस ने इस साल की शुरुआत में 26 अप्रैल को एक एडवाइजरी भी जारी की थी। एनसीवीबीडीसी के निदेशक ने भी फरवरी और अप्रैल, 2024 में दो एडवाइजरी जारी की हैं ताकि राज्यों को एक ही वेक्टर मच्छर से फैलने वाली जीकाडेंगू और चिकनगुनिया बीमारी के बारे में पहले से चेतावनी दी जा सके।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय स्थिति पर लगातार नज़र रख रहा है।

पृष्ठभूमि:

डेंगू और चिकनगुनिया की तरह जीका भी एडीज मच्छर जनित वायरल बीमारी है। हालांकिजीका संक्रमित गर्भवती महिलाओं से पैदा होने वाले शिशुओं में माइक्रोसेफली (सिर का आकार कम होनासे जुड़ा हैजो इसे एक बड़ी चिंता का विषय बनाता है।

भारत में 2016 में गुजरात राज्य में जीका का पहला मामला सामने आया था। तब सेतमिलनाडुमध्य प्रदेशराजस्थानकेरलमहाराष्ट्रउत्तर प्रदेशदिल्ली और कर्नाटक जैसे कई अन्य राज्यों में भी बाद में जीका मामले दर्ज किए हैं।