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तापमान में उतार चढ़ाव की वजह से ग्रामीण इलाकों में डायरिया, वायरल बुखार, खांसी-जुकाम पैर पसारना शुरू कर दिया

  बलौदाबाजार। जिले में मौसम के बदलते मिजाज ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. तापमान में उतार चढ़ाव की वजह से ग्रामीण इलाकों में डायरिया, व...

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 बलौदाबाजार। जिले में मौसम के बदलते मिजाज ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. तापमान में उतार चढ़ाव की वजह से ग्रामीण इलाकों में डायरिया, वायरल बुखार, खांसी-जुकाम पैर पसारना शुरू कर दिया है. मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीज अस्पताल में पहुंचने लगे हैं. बदले मौसम की मार बच्चों पर ज्यादा पड़ रही है. बलौदा बाजार के पलारी तहसील क्षेत्र के ग्राम बलौदी में फैली गंदगी, दूषित पानी और खाना खाकर 35 से 40 लोग बीमार हैं. इनमें से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी में ही 19 लोग भर्ती है. वहीं कुछ गंभीर मरीजों को जिला चिकित्सालय और कुछ को रायपुर भी रेफर किया गया है.



डायरिया की बढ़ती शिकायत को देख मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एमपी महेश्वर अपने स्वास्थ्य दल के साथ ग्राम पहुंचे और स्थिति का जायजा लेते हुए ग्रामीणों को सावधानी बरतने के साथ स्वास्थ्य टीम को मुस्तैद रहने के लिए कहा. ग्रामीणों से जानकारी लेने के बाद उन्होंने पूरे गांव का भी दौरा किया.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि ग्राम बलौदी मे डायरिया के मरीज मिले हैं जिनका ईलाज जारी है और स्थिति नियंत्रण में है. उन्होनें कहा कि गांव में शादी व्याह का सीजन चल रहा है. इस दौरान ग्रामीण बासी भोजन भी कर लेते हैं, साथ ही बच्चे खुले में बिक रहे गुपचुप चाट भी खा रहे हैं. जो डायरिया के फैलने का प्रमुख कारण है. मैं इस गांव के साथ ही सभी जिला वासियों से अपील है किस भीषण गर्मी से बचें, बासी भोजन न करें और अपने आसपास साफ-सफाई रखें. अभी लगभग 35 से 40 मरीज मिले हैं सबका ईलाज जारी है स्थिति नियंत्रण में है.

कुसमी में भी डायरिया के 5 से ज्यादा मरीज

ग्राम बलौदी की तरह इसके पड़ोसी गांव कुसमी में भी 5 से अधिक लोग डायरिया से पीड़ित मिले हैं, जिन्हें उपचार के लिए पलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया है. बीमारी फैलने की वजह डॉक्टर शादी विवाह का सीजन बता रहे हैं. यह भी कह रहे हैं कि कई लोग बाहर से शादी से गांव लौटे हैं. खान-पान की वजह से बीमारी फैल रही है. वहीं गांव में तालाब के पानी में ग्रामीणों की निस्तारी है. तालाब में ही नहाते हैं, वहीं पानी के लिए सार्वजनिक नालों और टंकियों में भरे पानी का इस्तेमाल करते हैं. इन दिनों तालाब में पानी कम है, उसी में गांव के जानवर और ग्रामीण दोनों निस्तारी कर रहे हैं.