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कार्बन फुटप्रिंट के दुष्प्रभावों को जड़ से खत्म करने के उपायों पर व्याख्यान

भिलाई. असल बात न्यूज़.    स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय आमदी नगर, हुडको, भिलाई में ग्रीन ऑडिट समिति के संयुक्त तत्वाधान से कंप्य...

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भिलाई.

असल बात न्यूज़.   

स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय आमदी नगर, हुडको, भिलाई में ग्रीन ऑडिट समिति के संयुक्त तत्वाधान से कंप्यूटर विभाग द्वारा कार्बन फुटप्रिंट के दुष्प्रभावों को जड़ से खत्म करने के उपायों पर व्याख्यान का आयोजन किया गया| 

कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए स.प्रा. रूपाली खर्चे, विभागाध्यक्ष कम्प्यूटर साईंस एवं श्रीमती उषा साहू ग्रीन ऑडिट समिति प्रभारी ने बताया भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की परंपराओं और मूल्यों पर आधारित पर्यावरण संरक्षण पर बल दिया हैं। इसी परंपराओं और मूल्यों को ध्यान में रखते हुए इस व्याख्यान आयोजन किया गया है| 

महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा एवं डॉ. मोनिषा शर्मा  ने इस आयोजन हेतु विभाग को बधाई दी और भविष्य में ऐसे कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. हंसा शुक्ला ने इस तरह के व्याख्यान से आज की पीढ़ी को अवगत कराने के लिए प्रेरणा दी।

श्रीमती श्रीलता नायर सहा.प्रा. कंप्यूटर विभाग द्वारा यह व्याख्यान दिया गया |  उन्होंने इ-मेल द्वारा उत्पन्न होने वाला अप्रत्यक्ष कार्बन फुटप्रिंट एवं उसके कारन पर्यावरण पर होने वाले दुष्प्रभाव तथा उनको कम करने के तरीकों पर अपनी बेहतरीन प्रस्तुति दी। व्याख्यान में उन्होंने बताया की कार्बन फ़ुटप्रिंट (या ग्रीनहाउस गैस फ़ुटप्रिंट) एक परिकलित मान या सूचकांक है जो किसी गतिविधि द्वारा उत्पादित ग्रीनहाउस गैसों की कुल मात्रा की तुलना करने में मदद करता है| उन्होंने बताया कि प्रति ईमेल कार्बन फ़ुटप्रिंट की गणना कैसे करें साथ ही यह भी बताया कि एक टेक्स्ट ईमेल पर 4 ग्राम कार्बन उत्पन्न होता है, इससे ओजोन परत पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है | दुष्प्रभाव कम करने के तरीके जैसे, अवांछित न्यूज़लेटर्स से सदस्यता समाप्त करना, ईमेल के लिए स्वीकृति भेजने से बचना, मूल डेटा के बजाय लिंक को प्राथमिकता देना, ईमेल के स्पैम फ़ोल्डर और ट्रैश फ़ोल्डर को हमेशा साफ़ करना आदि  भी बताया ।

इस कार्यक्रम में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्राध्यापक साथ ही विद्यार्थी भी सम्म्लित थे। यह कार्यक्रम शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक था। अंत में श्रीमती श्रीलता नायर ने प्रश्न मंच भी रखा जहाँ कुछ प्राध्यपकों और विद्याथियों द्वारा प्रश्न भी पूछा गया जिससे उन्हें अधिक जानकारी मिली। कार्यक्रम में सहा.प्रा जे पी साहू, स प्रा संतोषी चक्रवर्ती एवं सहा.प्रा सुमैया नाज का सराहनीय योगदान रहा।