छत्तीसगढ़ . असल बात news. छत्तीसगढ़ में लगभग सभी स्थानों पर पिछले दो दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है.पहले चक्रवाती प्रभाव से बंगाल क...
छत्तीसगढ़ .
असल बात news.
छत्तीसगढ़ में लगभग सभी स्थानों पर पिछले दो दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है.पहले चक्रवाती प्रभाव से बंगाल की खाड़ी से होकर चीन की तरफ से धुआंधार बारिश के छींटे आ रहे थे अब जानकारी के अनुसार यह चक्रवार्ती प्रभाव थोड़ा आगे बढ़ गया है और सोवियत रूस के ऊपर से हिमालय पर्वत पारकर चक्रवात कल शाम से देश में देश में प्रवेश कर गया है, व कम दबाव का क्षेत्र बन गया है और उससे देश भर में भारी बारिश हो रही है.शुरुआत में इस भारी बादलों से घिरे इस चक्रवात का केंद्र छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्थित हो गया था, और उसके प्रभाव से कल शाम से यहां लगातार तेज बारिश शुरू हो गई है. इस चक्रवात के प्रभाव से सोवियत रूस से लेकर अपने देश तक में हर जगह भारी बारिश हो रही है. अब राजस्थान,दिल्ली,गुजरात,हिमाचल प्रदेश भी इसके प्रभाव में आ रहा है. छत्तीसगढ़ में तो कल शाम से अनवरत बारिश हो रही है और चक्रवाती प्रभाव से दो दिन और ऐसी ही बारिश जारी रहने की संभावना है.यहां ज्यादातर डैम में पानी,पहले की ही बारिश से लबालब भर गया है और लगातार बारिश होते रहने से खतरनाक स्थिति बन रही है. बस्तर संभाग के तो कई जिले बाढ़ के प्रभाव से जूझने लगे हैं जहां युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है.बाढ़ में फंसे दर्जनों लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। चक्रवाती प्रभाव की बारिश अभी कहीं भी बंद नहीं हुई है।
राज्य के ज्यादातर हिस्सा में कल शाम से शुरू ही भारी बारिश पूरे रात भर जाली रहे और आज सुबह से भी दिन भर और अनवरत बारिश हो रही है और इसके रात में भी जारी रहने की संभावना है.इस मानसून सीजन में ऐसी बारिश पहले नहीं हुई है. छत्तीसगढ़ में कल दिन भर में 7.5 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई है.
छत्तीसगढ़ में बाढ़ आने के पुराने इतिहास को देखे तो यहां वर्ष 1994 में मानसून सीजन में भारी-बड़ी हुई थी और तब राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ आ गई थी. तब छत्तीसगढ़ अंचल मध्य प्रदेश का हिस्सा था.उस दौरान बाढ़ से बचाव के लिए कई क्षेत्रों में बचाव व राहत अभियान शुरू करना पड़ा था. महानदी,शिवनाथ नदी,खारून नदी और तमाम छोटी नदियां सब बाढ़ के प्रभाव से जूझ रही थी.तब बाढ़ में डूब जाने से कई लोगों की मौतें भी हो गई थी.
इधर भारी बारिश को देखते हुए शासन -प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है.मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहां है कि भारी बारिश को लेकर पूरा प्रशासन अलर्ट है और आमजनों की सुरक्षा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है.मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश दिए हैं.नदी-नालों और उफनते जलस्रोतों से दूर रहने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है.आपात स्थिति में तत्काल डायल 112 सहित स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने को कहा गया है.
बस्तर संभाग के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढा
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है।बुधवार से जारी भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और कई प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल पूरी मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है, जहां उनके भोजन, ठहरने, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
बस्तर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना में बाढ़ के पानी में फंसे लगभग 40 लोगों को बचाव दल ने नावों की सहायता से सुरक्षित बाहर निकालकर ग्राम पंचायत भवन में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर में पहुंचाया। इसी तरह तोकापाल के घाट धनोरा से 25 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया है। ग्राम पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले रिहायशी इलाकों में पानी भरने के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और पंचायत भवनों में स्थानांतरित किया गया है।
9 राहत शिविरों में 350 से अधिक प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय
बाढ़ प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिले में कुल 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें अब तक 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। बाढ़ का सर्वाधिक असर जगदलपुर शहर में देखने को मिला है, जहां स्थापित चार राहत शिविरों में 175 लोगों को ठहराया गया है। अकेले शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक प्रभावितों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है।
इसी प्रकार जगदलपुर तहसील के नगरनार क्षेत्र अंतर्गत नदी बोड़ना राहत शिविर में लगभग 40 लोग ठहरे हुए हैं। बस्तर तहसील के भैंसगांव शिविर में 77, बकावंड विकासखंड के बेलगांव राहत केंद्र में 35 तथा लोहंडीगुड़ा के ग्राम पंचायत भेजा में बनाए गए राहत शिविर में 26 प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। प्रशासन द्वारा सभी राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए भोजन, पेयजल, ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस दौरान अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और राहत शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावितों के लिए भोजन, पेयजल, सुरक्षित ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही मैदानी अमले को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए।
इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर, बांधों के गेट खुलने से निचले इलाकों में सतर्कता
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सुरक्षा मानकों के तहत ओडिशा में इंद्रावती नदी पर बने खातीगुड़ा बांध के तीन तथा मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास बसे गांवों और निचले इलाकों में सतर्कता एवं निगरानी बढ़ा दी है।
मन्धोता और बकावंड के बेलगांव सहित चारों ओर से पानी से घिरे क्षेत्रों में बचाव दल नावों एवं आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हैं। प्रशासनिक अधिकारी कंट्रोल रूम, फोन नेटवर्क और मैदानी अमले के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत शिविर स्थापित करने और राहत सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी भी रखी गई है।
प्रशासन की अपील, उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार न करें
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पूरी सतर्कता बरतें। किसी भी प्रकार की अफवाह पर भरोसा न करें तथा उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं। आपात स्थिति में बाढ़ आपदा नियंत्रण कक्ष अथवा संबंधित क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल सूचना दें।
जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दल आपसी समन्वय के साथ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की है।
उत्तर बस्तर कांकेर जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नालों में बढ़े जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने आज कांकेर शहर एवं आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा एवं राहत व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने सर्वप्रथम कांकेर शहर के दूध नदी के किनारे शांति नगर वार्ड स्थित क्षेत्र का निरीक्षण किया। नदी के बढ़ते जलस्तर एवं आसपास की स्थिति का जायजा लेते हुए नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को नदी किनारे आवश्यक स्थानों पर बैरिकेडिंग कराने, रेड फ्लैग लगाने तथा खतरे से संबंधित सूचना एवं चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। पुलिस, होमगार्ड, नगरपालिका एवं राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को सतर्क रहने तथा लगातार निगरानी बनाए रखने के लिए निर्देशित किया। इस दौरान उन्होंने पार्षद से चर्चा कर क्षेत्र की स्थिति एवं स्थानीय समस्याओं की जानकारी भी ली।
कलेक्टर ने भंडारीपारा के महादेव वार्ड का भी निरीक्षण किया। उन्होंने नदी किनारे बसे लोगों से चर्चा कर बारिश एवं जलस्तर की स्थिति की जानकारी ली तथा लगातार हो रही बारिश को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने और अनावश्यक रूप से नदी-नालों के समीप नहीं जाने की समझाइश दी। उन्होंने नदी किनारे बसे वार्डवासियों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर घर खाली कर पंचायत भवन जैसे सुरक्षित स्थानों में पहुंचने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने मनकेशरी के नदी किनारे के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया तथा लोगों को शीघ्र सुरक्षित स्थानों पर जाने की समझाईश दी। नदी किनारे अनाधिकृत रूप से अतिक्रमण नहीं करने के संबंध में भी लोगों को समझाइश दी। उन्होंने संबंधित सरपंच एवं सचिव को नदी किनारे की स्थिति पर सतत निगरानी रखने तथा जलभराव एवं बाढ़ को देखते हुए लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कोंडागांव जिले में भी भारी बारिश से खतरनाक स्थिति बन रही है. यहां जिला प्रशासन के द्वारा आपदा प्रबंधन, बचाव एवं सहायता के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जा रही हैं। जिले में लगातार वर्षा के साथ बाढ़ एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में त्वरित सूचना एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर संपर्क नंबर जारी किए गए हैं।
प्राकृतिक आपदा की सूचना एवं सहायता के लिए संपर्क नंबर टेलीफोन नंबर 7786242768 और मोबाइल नंबर 9343666514 पर संपर्क किया जा सकता है।
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा, जलभराव, बाढ़ अथवा अन्य आपात स्थिति की सूचना तत्काल जिला प्रशासन को दें, ताकि समय पर आवश्यक बचाव एवं राहत कार्य किए जा सकें। साथ ही नागरिकों से यह भी अपील की गई है कि लगातार बारिश के दौरान नदी-नालों, पुल-पुलियों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में घबराएं नहीं और तत्काल दिए गए संपर्क नंबरों पर सूचना दें।









"
"
" alt="" />
" alt="" />


