दुर्ग,भिलाई . असल बात news. यहां 6 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को मृत्युदंड सुनाया गया है.अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ...
दुर्ग,भिलाई .
असल बात news.
यहां 6 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को मृत्युदंड सुनाया गया है.अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी विशेष न्यायालय पोक्सो दुर्ग ने यह सजा सुनाई है. न्यायालय ने आरोपी को विभिन्न धाराओं का दोषी पाया तथा प्रकरण को विरलतम से विरलतम श्रेणी का मानते हुए पोक्सो अधिनियम की धारा 6(1) एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) के तहत मृत्युदंड की सजा सुनाई है.यह घटना लगभग 1 वर्ष 5 महीने पहले की है जिसमें न्यायालय ने तेज गति से सुनवाई करते हुए आज अपना निर्णय दे दिया है.न्यायालय के द्वारा पीड़िता के परिजनों को आहत प्रतिकर योजना के अंतर्गत क्षतिपूर्ति राशि भी प्रदान करने का निर्देश दिया है.
प्रकरण के बारे में प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहन नगर थाने में अप्रैल 2025 को बालिका के लापता होने की सूचना मिली थी। उसे समय बालिका को एक वाहन से बरामद किया गया था और चिकित्सकीय सहायता के लिए अस्पताल पहुंचाने पर वहां उसे चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।पुलिस ने घटनास्थल एवं संबंधित स्थानों से भौतिक, जैविक, चिकित्सकीय, DNA तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा।
प्रकरण में त्वरित कार्यवाही और विवेचना के लिये पुलिस अधीक्षक द्वारा एक विशेष टीम गठित की गई थी जिसका नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर ,निरीक्षक (विवेचक)शिव चंद्रा ने किया। जांच टीम ने घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध CCTV फुटेज एवं DVR को सुरक्षित कर जप्त किया था।
माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी सोमेश यादव, उम्र 24 वर्ष, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड क्रमांक 58, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 5(ड) एवं 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) एवं 238(क) के अंतर्गत दोषसिद्ध पाया गया।
न्यायालय द्वारा प्रकरण को “विरलतम से विरलतम” श्रेणी का मानते हुए पॉक्सो अधिनियम की धारा 06(1) एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के अंतर्गत मृत्युदंड तथा प्रत्येक धारा में ₹5,000 अर्थदंड अधिरोपित किया गया। इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के अंतर्गत 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड से दंडित किया गया।
न्यायालयीन आदेश के अनुसार उक्त दंड एक साथ भुगताए जाने हैं तथा अर्थदंड अदा नहीं किए जाने की स्थिति में निर्धारित अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मृत्युदंड की पुष्टि संबंधी प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर के समक्ष विधि अनुसार होगी।
न्यायालय द्वारा मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के अंतर्गत ₹7,00,000 की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने का निर्देश भी दिया गया है।
प्रकरण की त्वरित कार्यवाही के लिये पुलिस अधीक्षक द्वारा एक विशेष टीम गठित की गई थी जिसका नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर ,थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा द्वारा पतासाजी, घटनास्थल से साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य संकलन, आरोपी की गिरफ्तारी, FSL एवं DNA परीक्षण तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में थाना मोहन नगर के विवेचक सहित संबंधित पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों की भूमिका रही।न्यायालय में इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती रूपवर्षा दिल्लीवार ने पैरवी की.
*दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस के द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि बच्चों के संबंध में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी अथवा अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। विशेषकर बालिकाओं एवं बच्चों की सुरक्षा के मामलों में सूचना देने में देरी न करें। समय पर प्राप्त सूचना पुलिस को त्वरित कार्रवाई और साक्ष्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।दुर्ग पुलिस महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में त्वरित, निष्पक्ष, संवेदनशील एवं वैज्ञानिक विवेचना सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही आम नागरिकों से अपेक्षा है कि वे बच्चों की सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी मानते हुए पुलिस का सहयोग करें।
यहां बालिका की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उसका नाम, फोटो, पता अथवा पहचान उजागर करने वाली किसी जानकारी को प्रकाशित नहीं किया गया है।


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