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मिट्टी से समृद्धि की ओर,‘बिहान’ से मिली उड़ान, हेमलता पटेल ने लिखी महिला सशक्तिकरण की नई इबारत

  ​रायपुर  . असल बात news.        सुबह की पहली किरण के साथ खेतों की ओर बढ़ते कदम, लहलहाती फसलों का जतन और शाम को बाजार में अपनी मेहनत की उपज...

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​रायपुर  .

असल बात news. 

      सुबह की पहली किरण के साथ खेतों की ओर बढ़ते कदम, लहलहाती फसलों का जतन और शाम को बाजार में अपनी मेहनत की उपज बेचकर सम्मानजनक आय, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम डोमाडीह (अ) की श्रीमती हेमलता पटेल के जीवन की यही आज नई पहचान है। कभी घर-परिवार की चौखट तक सीमित रहने वाली हेमलता आज पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की जीवंत मिसाल बनकर उभरी हैं।

        ​हेमलता के मन में हमेशा से परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने और खुद के दम पर पहचान बनाने का सपना था, लेकिन संसाधनों और सही मार्गदर्शन की कमी हमेशा आड़े आती रही। इसी बीच राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ उनके जीवन में एक नया मोड़ लेकर आया। गांव के ‘खुशी स्व सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, वित्तीय प्रबंधन और आजीविका की विविध गतिविधियों के बारे में जानने का अवसर मिला। समूह और क्लस्टर के सहयोग पर भरोसा जताते हुए उन्होंने 60 हजार रुपये का ऋण लिया और इस राशि को पारंपरिक खेती तथा सब्जी उत्पादन के विस्तार में लगा दिया।

         ​हेमलता ने इस अवसर को केवल एक ऋण की तरह नहीं, बल्कि अपनी किस्मत बदलने के एक माध्यम के रूप में लिया। उन्होंने खेतों में पसीना बहाया, बेहतर कृषि प्रबंधन अपनाया और ताजी सब्जियों को स्थानीय बाजारों तक पहुंचाना शुरू किया। उनकी मेहनत का असर जल्द ही दिखने लगा और बाजारों में उपज की मांग बढ़ने से मुख्य दिनों में उनका दैनिक कारोबार 3 से 4 हजार रुपये तक पहुँच गया। वर्तमान में खेती और सब्जी उत्पादन के बल पर वे सालाना लगभग 2 लाख रुपये की शानदार आमदनी अर्जित कर रही हैं।

       ​इस बदलाव ने न सिर्फ हेमलता के परिवार को आर्थिक स्थिरता दी, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी पढ़ाई-लिखाई की चिंता को भी दूर कर दिया है। आज वे घर के हर छोटे-बड़े निर्णय में मजबूती से अपनी भूमिका निभा रही हैं। ‘बिहान’ और ‘खुशी स्व सहायता समूह’ से मिले सहयोग ने हेमलता को एक साधारण गृहिणी से एक सफल महिला कृषक-उद्यमी बना दिया है। उनकी यह सफलता साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही दिशा और अवसर मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की तस्वीर बदल सकती हैं, बल्कि समाज के सामने आत्मनिर्भरता का एक नया उदाहरण भी पेश कर सकती हैं।