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बिहान से मिली नई उड़ान, ममता बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

कोंडागांव,  असल बात News 25 अगस्त 2026  कोण्डागांव जिले के ग्राम राजागांव की रहने वाली ममता आज अपने परिवार के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक...

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कोंडागांव, 

असल बात News

25 अगस्त 2026

 कोण्डागांव जिले के ग्राम राजागांव की रहने वाली ममता आज अपने परिवार के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाला उनका परिवार आज मेहनत, स्वरोजगार और शासन की योजनाओं के सहयोग से बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ रहा है। ममता की कहानी यह बताती है कि महिलाओं को सही अवसर, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी कायम कर सकती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत ममता माँ वैष्णवी स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें बैंक से ऋण प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने में किया। ममता ने ऋण की सहायता से कपड़ों का कारोबार शुरू किया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने कारोबार को आगे बढ़ाया। आज उनकी कपड़ों की दुकान से सप्ताह में लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक की आय हो जाती है। इस आमदनी से वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

ममता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में समूह से जुड़ने और बैंक से ऋण मिलने ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। उन्होंने इस अवसर को अपनी जिंदगी बदलने की शुरुआत बनाया और मेहनत से अपने कारोबार को आगे बढ़ाया।

ममता के परिवार में भी सभी सदस्य अपनी-अपनी आजीविका से जुड़े हुए हैं। उनके पति मछली की दुकान चलाते हैं, वहीं उनका बेटा भी मछली का व्यवसाय करता है। उनकी बेटी पढ़ाई के साथ-साथ सिलाई का काम भी करती है। सिलाई से होने वाली आय से वह अपनी पढ़ाई और व्यक्तिगत जरूरतों के खर्च में सहयोग करती है। इस तरह परिवार के सभी सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं।

ममता के लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि आज उनका परिवार पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है। जहां कभी आर्थिक परेशानियां परिवार के सामने बड़ी चुनौती थीं, वहीं अब स्वयं का व्यवसाय और परिवार के सदस्यों की आय के अलग-अलग साधनों ने जीवन को आसान बनाया है। आर्थिक मजबूती के साथ परिवार में भविष्य को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

ममता अपनी सफलता का श्रेय लखपति दीदी योजना, स्व-सहायता समूह और शासन से मिले सहयोग को देती हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक सहायता मिली, बल्कि आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी मिला। बैंक ऋण की सुविधा ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया और आज वे अपनी मेहनत से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए देशभर में अनेक योजनाएं और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। लखपति दीदी पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण, स्वरोजगार और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से महिलाएं अब परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अपने भविष्य को भी सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

ममता बाछड़ की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक तस्वीर है। उन्होंने स्व-सहायता समूह से मिली ताकत और शासन की योजनाओं से मिले सहयोग को अवसर में बदला। बैंक से मिले ऋण का सदुपयोग कर उन्होंने कपड़ों का कारोबार शुरू किया और आज उनकी मेहनत रंग ला रही है। उनकी आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ममता कहती हैं, “समूह में जुड़ने से मुझे काफी फायदा मिला। सरकार की मदद से बैंक से ऋण मिला और मैंने कपड़ों का कारोबार शुरू किया। आज मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी अच्छी हो चुकी है। लखपति दीदी योजना से मुझे आगे बढ़ने का अवसर मिला।उन्होंने विष्णु भैया का बहनों के लिए स्नेह और सम्मान के लिए धन्यवाद दिया।