सेवा सेतु : डिजिटल सुशासन की नई पहचान सेवा सेतु : डिजिटल सुशासन की नई पहचान जनता के द्वार- डिजिटल सरकार अब 520 शासकीय सेवाएं घर बैठे एक क्...
सेवा सेतु : डिजिटल सुशासन की नई पहचान
सेवा सेतु : डिजिटल सुशासन की नई पहचान
जनता के द्वार- डिजिटल सरकार
अब 520 शासकीय सेवाएं घर बैठे एक क्लिक पर
तेजबहादुर सिंह भुवाल, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
रायपुर, 26 जून 2026
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रशासनिक सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और जनसुलभ बनाने की दिशा में "सेवा सेतु" पोर्टल एक प्रभावी और अभिनव डिजिटल माध्यम के रूप में स्थापित हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करते हुए सेवा सेतु के माध्यम से अब नागरिकों को अधिकांश शासकीय सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ई-डिस्ट्रिक्ट से सेवा सेतु तक का सफर:
पूर्व में राज्य में ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को केवल 86 शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था का विस्तार कर इसे "सेवा सेतु" के रूप में विकसित किया गया। आज यह पोर्टल 36 विभागों की 520 से अधिक शासकीय सेवाओं का एकीकृत डिजिटल मंच बन चुका है, जहां विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
इससे नागरिकों को अलग-अलग विभागों के कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा आवेदन, ट्रैकिंग और सेवा प्राप्ति की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हो गई है।
घर बैठे एक क्लिक में 520 शासकीय सेवाएं:
इस सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर से घर बैठे ही विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस पोर्टल से समय, श्रम और धन की बचत होने के साथ-साथ सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।
सेवा सेतु पोर्टल पर उपलब्ध श्रेणीवार 520 प्रमुख सेवाओं में शामिल हैं—
• व्यवसाय, उद्योग एवं वाणिज्यिक सेवाएं -106
• लाइसेंस, परमिट एवं विनियामक सेवाएं - 85
• सामाजिक कल्याण, पेंशन एवं वित्तीय सहायता सेवाएं -65
• शिक्षा, छात्रवृत्ति एवं शैक्षणिक सेवाएं- 58
• भूमि, संपत्ति एवं राजस्व सेवाएं- 37
• व्यक्तिगत पहचान एवं प्रमाण पत्र सेवाएं- 35
• शासकीय अनुमोदन, अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं स्वीकृति सेवाएं 31
• जन शिकायत, सुरक्षा एवं विधिक सेवाएं- 25
• रोजगार, कौशल एवं श्रम सेवाएं- 19
• केंद्र सरकार की सेवा-19
• भुगतान, कर एवं वित्तीय लेनदेन सेवाएं-18
• कृषि, ग्रामीण एवं आजीविका सेवाएं-15
• स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं-7
शासकीय प्रमुख सेवाएं-
• जाति प्रमाण पत्र
• आय प्रमाण पत्र
• निवास प्रमाण पत्र
• विवाह प्रमाण पत्र
• राशन कार्ड संबंधी सेवाएं
• पेंशन योजनाएं
• नाम परिवर्तन सेवा
• व्यापार लाइसेंस
• विभिन्न विभागों की अन्य नागरिक सेवाएं
ग्राम पंचायत स्तर तक डिजिटल सेवाओं का विस्तार:
सेवा सेतु को केवल एक ऑनलाइन पोर्टल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसकी पहुंच प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इसके प्रभावी संचालन हेतु पंचायत सचिवों, सेवा सेतु केंद्र संचालकों तथा संबंधित विभागीय कर्मचारियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना, नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना तथा शासन की विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार करना है। पंचायत स्तर पर सेवा सेतु केंद्रों को जनसुविधा का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी डिजिटल सेवाओं का समान लाभ मिल सके।
उल्लेखनीय उपलब्धियां:
सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से अब तक प्राप्त उपलब्धियां इसकी सफलता को प्रमाणित करती हैं—
• 36 विभागों की सेवाएं एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध।
• 520 से अधिक शासकीय सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध।
• 39 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त।
• 95.9 प्रतिशत आवेदनों का सफल निराकरण।
• 16,700 से अधिक सेवा केंद्र नागरिकों की सुविधा के लिए संचालित।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सेवा सेतु नागरिकों के बीच एक विश्वसनीय, प्रभावी और पारदर्शी डिजिटल सेवा मंच के रूप में तेजी से स्थापित हो रहा है।
डिजिटल सुशासन की मजबूत पहल:
सेवा सेतु केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि "जनता के द्वार, डिजिटल सरकार" की अवधारणा को साकार करने वाला सशक्त माध्यम है। इसके माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम हुई है तथा सरकारी सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनी हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक बिना किसी अनावश्यक परेशानी के, समयबद्ध तरीके से शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सके। सेवा सेतु इसी दिशा में डिजिटल सुशासन का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम साबित हो रहा है।
डिजिटल और सुदृढ़ ग्रामीण प्रबंधन की ओर छत्तीसगढ़
96 प्रतिशत से अधिक राजस्व ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण
19 हजार 805 ग्रामों का सर्वेक्षण संपन्न, शेष क्षेत्रों में कार्य युद्ध स्तर पर जारी
विष्णु वर्मा, सहायक संचालक
रायपुर, 13 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ राज्य में राजस्व ग्राम सर्वेक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भू-संपत्तियों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड (नक्शे) तैयार करना और नागरिकों को उनकी भूमि/मकान का कानूनी मालिकाना हक (स्वामित्व) प्रदान करना है। यह भूमि संबंधी विवादों को कम करने और योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए बेहद कारगर है। राजस्व विभाग ने प्रदेश के सभी 33 जिलों में फैले कुल 20 हजार 551 राजस्व ग्रामों में से 19 हजार 805 ग्रामों (लगभग 96.37 प्रतिशत) का विस्तृत सर्वेक्षण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। यह आंकड़ा राज्य में भूमि सुधार और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
19 हजार 805 ग्रामों का सर्वेक्षण पूर्ण
छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण विकास, भूमि प्रबंधन और पारदर्शी राजस्व प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित राजस्व ग्राम सर्वेक्षण अभियान बड़ी सफलता की ओर अग्रसर है। भूमि प्रबंधन और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में राज्य ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, जिसके तहत प्रदेश के कुल लक्षित 20 हजार 551 राजस्व ग्रामों में से 19 हजार 805 ग्रामों (96.37 प्रतिशत) का सर्वेक्षण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में केवल 746 ग्राम (3.63 प्रतिशत) ही असर्वेक्षित श्रेणी में शेष बचे हैं। इन शेष ग्रामों में भी विकास की प्रक्रिया तेजी से गतिमान है, जहाँ 371 ग्रामों में सर्वेक्षण का कार्य प्रक्रियाधीन है, वहीं केवल 375 ग्रामों में विभिन्न भौगोलिक व प्रशासनिक कारणों से सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ किया जाना शेष है।
मैदानी और विकसित क्षेत्रों में सर्वेक्षण का कार्य लगभग शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। रायपुर जिले में 545 ग्रामों का, महासमुंद जिले में 1153 ग्रामों का, राजनांदगांव जिले में 694 ग्रामों का सर्वेक्षण का कार्य लगभग शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। इसी प्रकार कबीरधाम जिले के 1011 ग्रामों का, बिलासपुर जिले के 708 ग्रामों का, जांजगीर-चांपा जिले के 450 ग्रामों का, सक्ती जिले के 465 ग्रामों का और सूरजपुर जिले के 552 ग्रामों का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर मिसाल कायम की है।
आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कार्य में तेजी
वहीं दूसरी ओर, बस्तर संभाग के दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में भौगोलिक एवं तकनीकी चुनौतियों के कारण कुछ कार्य अभी भी शेष है। आंकड़ों के अनुसार, नारायणपुर में सर्वाधिक 240 ग्राम, सुकमा में 111 ग्राम और बीजापुर में 95 ग्राम वर्तमान में असर्वेक्षित श्रेणी में हैं। हालांकि, विभाग इन क्षेत्रों में विशेष रणनीतियों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कार्य को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें से कुल 371 ग्रामों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया वर्तमान में भी गतिमान है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को लाभ
इस व्यापक सर्वेक्षण के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों में एक नए युग की शुरुआत होगी। डिजिटल और अद्यतित (Updated) भूमि रिकॉर्ड होने से भूमि संबंधी आपसी विवादों और मुकदमों में भारी कमी आएगी। किसानों को बैंकों से ऋण प्राप्त करने, फसल बीमा और शासकीय योजनाओं (जैसे किसान न्याय योजना) का लाभ प्राप्त करने में सुगमता होगी। इसी तरह राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास ग्रामीण सशक्तिकरण की रीढ़ साबित हो रहा है। विभाग के आला अधिकारियों के अनुसार, शेष बचे 375 ग्रामों में भी जल्द ही सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य आगामी महीनों में छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत डिजिटल और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला आदर्श राज्य बनाना है।
99.95 प्रतिशत ऑटो म्यूटेशन सफलता दर ने रचा रिकॉर्ड, ऑटो डायवर्सन में 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का हुआ निराकरण
कोरिया बना नंबर-1, धमतरी ने टॉप-5 में दर्ज कराई दमदार मौजूदगी; जिलों के प्रदर्शन ने दिखाई जवाबदेह प्रशासन की तस्वीर
NGDRS इंटीग्रेशन, मल्टीपल खसरा और रिकवरी मॉड्यूल से राजस्व सेवाओं को मिलेगा नया डिजिटल ढांचा
आम नागरिक को दफ्तरों के चक्कर से राहत, पारदर्शिता और समयबद्ध निस्तारण के साथ सुशासन का मजबूत मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़
रायपुर, 08 जुलाई 2026
सुशासन के नए डिजिटल युग में राजस्व प्रशासन अब फाइलों और लंबित प्रकरणों के पारंपरिक चक्रव्यूह से बाहर निकल चुका है। राज्य शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने तकनीक को माध्यम बनाकर जमीन से जुड़ी सेवाओं का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। 'ऑटो म्यूटेशन' (स्वतः नामांतरण) और 'ऑटो डायवर्सन' (स्वतः व्यवर्तन) जैसी जन-हितैषी व्यवस्थाओं ने विभाग को तेज, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बनाया है। इससे आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर, लंबे इंतजार और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से स्थायी मुक्ति मिली है।
पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और भौतिक सत्यापन की थकाऊ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से अब यह स्वतः संपन्न हो रहा है। इसके साथ ही, भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए आवेदन, प्रीमियम निर्धारण और शुल्क गणना को भी आधुनिक तकनीक से त्रुटिहीन बनाया गया है। छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल गवर्नेंस मॉडल आज देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।
आंकड़ों की जुबानी: सफलता की एक नई गाथा
राजस्व विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक आंकड़े इस ऐतिहासिक परिवर्तन की गवाही देते हैं। राज्य में अब तक कुल 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से रिकॉर्ड 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का सफलतापूर्वक ऑटो म्यूटेशन किया जा चुका है। संपूर्ण प्रदेश में केवल 71 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं, जिससे विभाग ने 99.95 प्रतिशत की अभूतपूर्व सफलता दर हासिल की है।
वहीं दूसरी ओर, 'ऑटो डायवर्सन' व्यवस्था के तहत कुल 5 हजार 661 आवेदन दर्ज किए गए, जिनमें से 4 हज़ार 739 मामलों का त्वरित निराकरण किया गया। इस प्रकार 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण कर यह साबित कर दिया गया कि जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को भी डिजिटल माध्यम से सुगम और पारदर्शी बनाया जा सकता है। राजस्व सेवाएँ सीधे नागरिक के जीवन, संपत्ति और निवेश से जुड़ी होती हैं; अतः इनमें गति आने से राज्य की आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिली है।
ऑटो म्यूटेशन ने बदली नामांतरण की तस्वीर
किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद भू-अभिलेखों में नाम दर्ज होना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। पुराने दौर में पटवारियों और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटना, दस्तावेजों की जांच में महीनों गंवाना और अनिश्चितता का सामना करना आम बात थी, जिसने भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा दिया।
आज छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल चुकी है। 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का स्वतः नामांतरण होना यह दर्शाता है कि अब नागरिक को अपने हक के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से समय और धन की भारी बचत हो रही है और रिकॉर्ड रीयल-टाइम अपडेट होने से जमीनी धोखाधड़ी पर लगाम लगी है।
इस सफलता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा एक सख्त तकनीकी लॉक सिस्टम विकसित किया गया है। इसके तहत, यदि किसी संपत्ति का एक भी पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक नहीं हो पाएगी जब तक पिछला म्यूटेशन क्लियर न हो जाए। यह कदम निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को जवाबदेह बनाता है।
जिला-वार प्रदर्शन ने दिखाई नई प्रशासनिक संस्कृति
ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में जिलों के बीच एक स्वस्थ और परिणाम-उन्मुख प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जो यह प्रमाणित करती है कि सुधार जमीनी स्तर पर लागू हो चुके हैं। कोरिया जिला कुल 59 प्रकरणों में से सभी 59 का शत-प्रतिशत निराकरण कर 100 प्रतिशत सफलता दर के साथ पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर रहा।कोरबा जिला 98.46 प्रतिशत की सफलता दर के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसी तरह मुंगेली जिला 94.16 प्रतिशत मामलों का निपटारा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।बालोद जिला 93.72 प्रतिशत निस्तारण दर के साथ शीर्ष जिलों में शामिल रहा।धमतरी जिला कुल 165 प्रकरणों में से 153 का वैधानिक निराकरण कर 92.73 प्रतिशत सफलता दर के साथ राज्य में पाँचवाँ (शीर्ष-5) स्थान प्राप्त किया। धमतरी का यह प्रदर्शन नियमित समीक्षा और जवाबदेह कार्यशैली का परिणाम है।
तकनीकी सुधार और नए डिजिटल मॉड्यूल्स
विभाग अपनी वर्तमान उपलब्धियों से आगे बढ़कर एक एकीकृत 'डिजिटल इकोसिस्टम' के निर्माण में जुटा है। NGDRS API Integration इसके माध्यम से सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से प्राप्त हो रही हैं, जिससे प्रीमियम का निर्धारण मानवीय हस्तक्षेप के बिना पूरी तरह स्वचालित और पारदर्शी हो गया है।
'Diverted to Diverted' मॉड्यूल:
यदि पहले से डायवर्टेड भूमि का आंतरिक उपयोग बदलना हो (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक), तो इस मॉड्यूल के तहत निस्तारण के लिए 15 दिवस की समय सीमा तय की गई है।
'मल्टीपल खसरा' मॉड्यूल
एक से अधिक खसरों वाली भूमि के लिए अब एक ही आवेदन में अनेक खसरों का चयन, स्वतः शुल्क गणना और ई-चालान की सुविधा मिलेगी। इसके लिए समय सीमा जुलाई 2026 रखा गया है।
'रिकवरी' मॉड्यूल
पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए पूर्व भुगतानों की प्रविष्टि, शेष प्रीमियम की गणना, भू-राजस्व/उपकर की मांग और एक उच्च स्तरीय रिकवरी डैशबोर्ड की व्यवस्था की जाएगी।इसके लिए समय सीमा अगस्त 2026 निर्धारित किया गया है।
सुशासन का नया मॉडल बनता छत्तीसगढ़
यह ऐतिहासिक बदलाव सिर्फ तकनीकी आंकड़ों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ नागरिकों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने का माध्यम है। किसान, गृहस्वामी, व्यापारी और औद्योगिक निवेशक सभी को अब घर बैठे अपने मोबाइल पर पारदर्शी सेवाएँ मिल रही हैं।
दिसंबर 2026 तक के लिए तय किए गए रोडमैप के अनुसार, राज्य के सभी क्षेत्रों की सैटेलाइट/ड्रोन मैपिंग, टीएनसीपी से एनओसी लिंकिंग और मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का वृहद् अपग्रेडेशन किया जाना है। ये कदम छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय बेंचमार्क के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। तकनीक, संवेदनशीलता और जवाबदेही के इस बेजोड़ संगम से छत्तीसगढ़ ने जन-केंद्रित शासन की एक नई मिसाल पेश की है।
सुशासन तिहार बना त्वरित समाधान का प्रभावी मंच, 405 का निराकरण
राजस्व मामलों के ऑन-द-स्पॉट समाधान से किसानों और आमजनों को मिली बड़ी राहत
मुंगेली, 04 जून 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप आयोजित सुशासन तिहार-2026 जिले में आमजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासनिक संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन की संवेदनशीलता, तकनीक और तत्परता के समन्वय से आमजनों की समस्याओं का समाधान तेजी से किया जा रहा है। यह अभियान शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। इसी कड़ी में राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन, खाता विभाजन, फौती नामांतरण, नक्शा बंटांकन, त्रुटि सुधार, ऋण पुस्तिका निर्माण एवं अन्य राजस्व मामलों का शिविरों में ही निराकरण कर लोगों को बड़ी राहत प्रदान की गई।
जिले के छह तहसीलों मुंगेली, पथरिया, लोरमी, लालपुर थाना, सरगांव और जरहागांव में आयोजित शिविरों के दौरान सैकड़ों आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 405 मामलों का निराकरण कर आवेदकों को तत्काल लाभ पहुंचाया गया। सबसे अधिक आवेदन अन्य शिकायतों एवं मामलों, फौती नामांतरण, एग्रीस्टैक पोर्टल, ऋण पुस्तिका तथा सीमांकन से संबंधित रहे। सुशासन तिहार के दौरान कई ऐसे मामलों का समाधान किया गया, जिनका वर्षों से निराकरण नहीं हो पा रहा था। ग्राम खम्हरिया के रोहित पात्रे और पौनी के राजकुमार सिंह के खाता विभाजन प्रकरण का मौके पर निराकरण कर दिया गया, जिससे भूमि संबंधी विवाद समाप्त हुआ। वहीं ग्राम दाबो के कलम प्रसाद के फौती नामांतरण प्रकरण का त्वरित निराकरण होने से वारिसानों को खाद, बीज एवं बैंक ऋण प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
पथरिया तहसील के ग्राम मोहभट्ठा निवासी अशोक कुमार को सीमांकन कार्य पूरा होने से भूमि की स्पष्ट जानकारी मिली, जबकि ग्राम परसदा के व्यास नारायण को नई ऋण पुस्तिका एवं ऑनलाइन नक्शा बटांकन की सुविधा तत्काल उपलब्ध कराई गई। लालपुर थाना क्षेत्र के ग्राम खपरीडीह निवासी वीरेन्द्र कुमार साहू को शिविर में ही नक्शा बटांकन एवं किसान किताब उपलब्ध कराई गई। वहीं ग्राम परसकापा के लक्ष्मण दिवाकर के भूमि नक्शे का ऑनलाइन विभाजन कर डिजिटल रिकॉर्ड अद्यतन किया गया। सरगांव और लोरमी तहसीलों में भी डिजिटल ऋण पुस्तिका, ऑनलाइन नक्शा सुधार और फौती नामांतरण जैसे मामलों का त्वरित निराकरण कर सुशासन का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया गया।
राजस्व अभिलेखों के अद्यतन होने से किसानों को खाद-बीज वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड, बैंक ऋण एवं विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिली है। शिविरों के माध्यम से ऋण पुस्तिका, नामांतरण एवं सीमांकन जैसे कार्य मौके पर होने से किसानों का समय, धन और श्रम बचा है। राजस्व अधिकारियों के अनुसार खाता विभाजन, सीमांकन और अभिलेख सुधार जैसे मामलों के त्वरित निराकरण से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवादों और न्यायालयीन प्रकरणों में कमी आएगी। डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी और जनहितैषी बनाया जा रहा है।

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