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हाथी के शावकों को खदेड़ने के लिए ग्रामीणों ने फोड़े पटाखे, फिर पत्थर बरसाकर दौड़ाया

  रायगढ़ . छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में ग्राम छर्रा टांगर में शनिवार को हाथियों का दल पहुंचा. दल के साथ दो हाथी के शावक भी थे. गांव में हा...

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 रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में ग्राम छर्रा टांगर में शनिवार को हाथियों का दल पहुंचा. दल के साथ दो हाथी के शावक भी थे. गांव में हाथियों के प्रवेश के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए. इस दौरान कुछ लोगों ने हाथियों को खदेड़ने के लिए फटाखे फोड़े और पत्थरबाजी की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई.

जानकारी के मुताबिक, ग्रामीणों के इस बर्ताव से दो शावक रास्ता भटक गए. हंगामे, फटाखे और पत्थरबाजी किए जाने के कारण काफी गंभीर स्थिति देखने को मिली. बताया जा रहा है कि चार से पांच हाथियों का दल गांव में पहुंचा था. दोनों शावक जब पानी वाले इलाके में थे, तब अचानक कुछ ग्रामीणों ने उन पर हमला कर दिया. दो शावकों के साथ होने के कारण हाथी अधिक संवेदनशील और आक्रोशित दिखाई दिए. घटना के दौरान सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ हाथियों का रास्ता रोककर उन्हें दौड़ाती और पत्थरबाजी करती नजर आई. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है.   




घटना की सूचना के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया. अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाइश देने के बाद किसी तरह हाथियों को गांव से सुरक्षित बाहर निकाला जा सका.     

हाथियों के झुंड को उकसाना हो सकता है खतरनाक

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों, विशेषकर शावकों के साथ मौजूद झुंड को उकसाना बेहद खतरनाक हो सकता है. ऐसे मामलों में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए.

राहत की बात यह रही है कि इस घटना में किसी जनहानि या घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है.

रास्ता भटकने से हो सकती थी बड़ी परेशानी 

घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के एसडीओ डी. के. मांडवा ने कहा कि देर रात चार हाथियों का दल अचानक गांव के पानी वाले इलाके में आ गए, जिससे गांव वालों की भारी भीड़ जमा होने से ये स्थिति बनी. हाथी अपने रास्ते से आते हैं और उसी रास्ते से वापस लौटने पर कोई दिक्कत नहीं होती. ग्रामीणों के इस तरह के बर्ताव से हाथी शावक रास्ता भटक जाते तो परेशानी खड़ी हो सकती थी. फिलहाल हाथी शावकों के साथ हाथियों का दल छर्रा टांगर गांव से निकलकर जंगलों की ओर चले गया है.