Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला: जांच और आदेश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, सवालों के घेरे में प्रशासन

  खैरागढ़. प्रदेश सरकार अवैध कॉलोनियों और अवैध प्लाटिंग पर सख्ती दिखाने की बात कर रही है. शासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि जहां अवैध प्लाटिंग...

Also Read

 खैरागढ़. प्रदेश सरकार अवैध कॉलोनियों और अवैध प्लाटिंग पर सख्ती दिखाने की बात कर रही है. शासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि जहां अवैध प्लाटिंग मिले वहां एफआईआर दर्ज हो, अवैध निर्माण तोड़े जाएं और जरूरत पड़े तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो. लेकिन खैरागढ़ के बहुचर्चित सरकारी भूमि प्रकरण में हालात कुछ अलग ही नजर आ रहे हैं. यहां जांच पर जांच हुई, रिपोर्ट पर रिपोर्ट बनी, पत्राचार भी हुआ, मंत्री तक मामले का संज्ञान ले चुके हैं, मीडिया लगातार सवाल उठा रहा है, लेकिन कार्रवाई अब भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है. मामला नजूल भूमि, एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क, छोटे झाड़ के जंगल और खसरा नंबर 167, 169 और 170 की जमीन से जुड़ा हुआ है. विभिन्न विभागों की रिपोर्टों में कथित अवैध प्लाटिंग का उल्लेख सामने आ चुका है. नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने भी अपनी टिप्पणी दी है और कलेक्टर कार्यालय की नजूल शाखा ने नगर पालिका को कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे. इसके बावजूद अब तक न तो किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सामने आई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की खबर आई.



दिलचस्प बात यह है कि नगर पालिका द्वारा जारी भवन अनुज्ञा की शर्तों में साफ लिखा है कि यदि कोई भूखंड अवैध प्लाटिंग का हिस्सा पाया जाता है तो उसकी अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब जांच रिपोर्टों में अवैध प्लाटिंग की बात कही जा रही है तो क्या उन भूखंडों पर जारी भवन अनुमतियों की समीक्षा हुई? क्या किसी अनुमति को निरस्त किया गया? क्या किसी निर्माण को अवैध घोषित किया गया? इन सवालों का जवाब अब तक जनता को नहीं मिल पाया है. शहर में चर्चा यह भी है कि छोटे-छोटे मामलों में प्रशासन तुरंत बुलडोजर और नोटिस लेकर पहुंच जाता है, लेकिन करोड़ों रुपये मूल्य की इस विवादित जमीन के मामले में कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है. आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी जिम्मेदार विभाग सिर्फ आश्वासन देने तक सीमित हैं.


नगर पालिका को दिए जा चुके हैं कार्रवाई के निर्देश


अपर कलेक्टर सुरेंद्र कुमार ठाकुर का कहना है कि नगर पालिका को कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं और आवश्यकता पड़ने पर स्मरण पत्र जारी कर समीक्षा की जाएगी. वहीं कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने कहा है कि दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों का अवलोकन करने के बाद ही वे इस मामले में कुछ स्पष्ट कह पाएंगे. फिलहाल खैरागढ़ की जनता एक ही सवाल पूछ रही है, जब शासन कार्रवाई चाहता है, जांच रिपोर्टें मौजूद हैं, विभागीय पत्राचार हो चुका है और मामला सार्वजनिक है, तो फिर कार्रवाई किस बात का इंतजार कर रही है? कहीं ऐसा तो नहीं कि फाइलें आगे बढ़ रही हैं, लेकिन कदम पीछे ही ठहरे हुए हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में केवल समीक्षा करता है या वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई भी सामने आती है.