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कांग्रेस-डीएमके रिश्तों में दरार? एमके स्टालिन ने इंडिया गठबंधन से अलग होने का किया ऐलान, सांसदों को अलग बैठने की मंजूरी

 देश के मुख्य विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) अलांयस को बहुत बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस और डीएमके की राहें जुदा हो गई है। डीएमके चीफ एमके स्...

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 देश के मुख्य विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) अलांयस को बहुत बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस और डीएमके की राहें जुदा हो गई है। डीएमके चीफ एमके स्टालिन (MK Stalin) ने इंडिया गठबंधन (India Alliance) से अलग होने का ऐलान किया है। साथ ही संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में अपने सांसदों को इंडिया गठबंधन से अलग बैठने की मंजूरी भी दे दी है। इसी के साथ ही कांग्रेस और डीएमके का साथ छूट गया है।

दरअसल तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके से हाथ मिला लिया है। तमिलनाडु में कांग्रेस टीवीके के साथ सत्ता में है। इसके बाद से ही दोनों पार्टियों के अलग होने का अंदेशा जताया जा रहा था। आखिरकार डीएमके चीफ एमके स्टालिन ने इसका ऐलान कर दिया है। DMK नेता कनिमोझी करुणानिधि ने बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर बैठने की व्यवस्था में बदलाव करने का अनुरोध किया था। लोकसभा सचिवालय से अपनी पार्टी के सांसदों के लिए अलग सीटिंग की मांग की थी. अब उस मांग को मंजूरी मिल गई है।




इधर इंडिया अलांयस बैठक को लेकर एमके स्टालिन ने कहा कि हम इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वो ऐसी किसी बैठक में शामिल नहीं होगी जिसमें कांग्रेस भी मौजूद हो। डीएमके ने बताया कि उन्हें दिल्ली के ‘कांस्टीट्यूशन क्लब’ में होने वाली इस बैठक में शामिल होने का न्योता मिला था। हालांकि पार्टी ने इस बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है।

पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान का हवाला

डीएमके मुख्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि कांग्रेस के धोखे से उनके कार्यकर्ताओं को बहुत दुख पहुंचा है। नकी भावनाओं का आदर करते हुए पार्टी 8 जून को नई दिल्ली में होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक में हिस्सा नहीं लेगी। एमके उस किसी भी बैठक में शामिल नहीं होगी, जिसमें कांग्रेस पार्टी भाग ले रही होगी। पार्टी अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए ये कदम उठा रही है।

पीठ में छुरा घोंपने का आरोप

बता दें कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन था। हालांकि चुनाव नतीजों के बाद महज पांच सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए टीवीके को अपना समर्थन दे दिया। इस वजह से दोनों पार्टियों के बीच कड़वाहट पैदा हो गई है। DMK के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के इस कदम को ‘पीठ में छुरा घोंपना’ और ‘धोखाधड़ी’ बताया है। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने अपने इस कदम को पूरी तरह सही ठहराया है।