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रिश्वतखोरी के मामले में रिटायर्ड बाबू दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा, जुर्माना भी लगाया

  अंबिकापुर। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज रिश्वतखोरी के मामले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जल संसाधन विभाग के सेवा...

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 अंबिकापुर। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज रिश्वतखोरी के मामले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड-03 (बाबू) व्हीके सिन्हा को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला गुरुवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय अंबिकापुर ने सुनाया।



पेंशन और ग्रेच्युटी प्रकरण में मांगी थी रिश्वत

एसीबी के अनुसार, ग्राम कटकोना निवासी शिकायतकर्ता लोचन सिंह ने 16 जुलाई 2020 को एसीबी अंबिकापुर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनके पिता लरघुराम जल संसाधन विभाग में चौकीदार के पद से 30 नवंबर 2015 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें केवल बचत निधि की राशि मिली थी, जबकि ग्रेच्युटी और पेंशन संबंधी प्रकरण लंबित था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 व्ही.के. सिन्हा ने लंबित प्रकरण का निराकरण कराने के एवज में पहले 3 हजार रुपये लिए और बाद में 8 हजार रुपये की अतिरिक्त रिश्वत की मांग की।


एसीबी ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। सत्यापन के दौरान रिश्वत की रकम 7 हजार रुपये तय हुई। इसके बाद 13 अगस्त 2020 को एसीबी की टीम ने व्हीके सिन्हा को शिकायतकर्ता से 7 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी को जल संसाधन विभाग के कार्यालय के बाहर मुख्य सड़क पर पकड़ लिया गया था।

2021 में पेश हुआ था चालान

विवेचना पूरी होने के बाद 22 जून 2021 को आरोपी के खिलाफ विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, अंबिकापुर में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। एसीबी की इस कार्रवाई और न्यायालय के फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।