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आमजन की समस्याओं के निराकरण के लिए किस त्वरित गति से,कैसे होना चाहिए काम...? 'सुशासन तिहार' मैं दिख रहा है यह सब, तपती दोपहरी में मुख्यमंत्री श्री साय के गांव गांव पहुंचने से प्रशासनिक अमले के कामकाज में आ रही है कसावट

  0 अशोक त्रिपाठी   छत्तीसगढ़   . असल बात news.   जब हम,विकसित राज्य की कल्पना करते हैं,सुशासन की बात करते हैं लोकतंत्र की बात करते हैं,सभी ...

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 0 अशोक त्रिपाठी

 छत्तीसगढ़   .

असल बात news.  

जब हम,विकसित राज्य की कल्पना करते हैं,सुशासन की बात करते हैं लोकतंत्र की बात करते हैं,सभी के एक समान विकास की बात करते हैं,तो उसमें,जनकल्याण की भावना निहित होना,सबसे महत्वपूर्ण विषय होता  है.The very concept of a welfare state rests on the welfare of the people.प्रत्येक सरकारों,की जनता के हित में कार्य करना पहली प्राथमिकता होती है. इसके लिए तरह-तरह से प्रयास किए जाते हैं और उपाय भी किए जाते हैं,सरकार जब कोई योजना शुरू करती है तो भीड़ में यह कानाफुसी सबसे पहले जरूर सुनाई देने लगती है कि इससे हम लोग को क्या फायदा होने वाला है.कोई भी योजना आम जनता को तब ही आकर्षित कर पाती है जब उसमें जनकल्याण का उद्देश्य निहित हो.कई बार यह शिकायतें भी बनी रही है कि सरकार,योजनाएं तो बनाती है लेकिन जिनके लिए यह योजनाये बनाई जाती है,उन्हें,वास्तव में उसका लाभ नहीं मिल पाता.सरकार की कई जन कल्याणकारी योजनाएं विभिन्न लाल फीता शाही अनियमितताओं के कारण रास्ते में ही दम तोड़ देती है.The government makes schemes but the people for whom these schemes are made do not actually get their benefits. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि कोई तंत्र हो जो इसका भी परीक्षण करता रहे कि जो योजनाएं बन रही हैं, जिसका उद्देश्य आम जन का कल्याण करना है,उसका लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक सचमुच पहुंच रहा है कि नहीं.शासन- प्रशासन की कुशल प्रबंधन क्षमता तभी साबित हो सकेगी जब कोई भी योजना अपने उद्देश्यों पर ख़रा उतऱ सके.Any government can be considered successful only when it wins the trust of the general public.अभी चल रहा छत्तीसगढ़ सरकार का 'सुशासन तिहार'प्रत्येक नागरिक तक प्रशासन की पहुंच को वास्तविक धरातल पर उतारने की कोशिश कर रहा है.इस दौरान गांव-गांव के विकास की वास्तविक स्थिति को जानने की कोशिश की जा रही है,ताकि,वहां के विकास के आगे की योजनाएं बनाने में भी मदद मिल सके.सरकार पहुंच रही है तो इस दौरान वहाँ समस्या निवारण शिविर लग रहा है जिसमें जनसैलाब उमड़ पड़ रहा है.समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया जा रहा है और  जो जानकारी है उसके अनुसार अब तक कई सारी समस्याओं का निराकरण किया जा चुका है.कोशिश की जा रही है की शिकायतों का निराकरण सिर्फ कागजों पर ही ना हो,वरन,यह वास्तव में धरातल पर दिखे.प्रदेश के मुख्यमंत्री जब अपने बीच यूं ही सहजता से अचानक पहुंच जाए तो किसे खुशी नहीं होगी. सुशासन तिहाऱ में कबीरधाम जिले के ग्राम लोहान में पहुंचे मुख्यमंत्री श्री साय ने वहां एक सामान्य ग्रामीण के आग्रह को स्वीकार किया और उसके घर चले गए.इस बड़े अभियान से सरकार की सुस्पष्ट नीति, संवेदनशीलता,सहभागिता और जन कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को साबित करने की कोशिश की आ रही है. छत्तीसगढ़ प्रदेश के सरल विनम्र मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि सुशासन तिहार से आम जनता का शासन- प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है.यह अभियान सुदूर दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा.आम जनता के बीच सीधे पहुंचकर समस्याओं को निराकरण करने का प्रयास किया जा रहा है. सुशासन तिहार की झलकियां पर गौर करेंगे तो सुकमा जिले में तो कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक काफी आगे बढ़कर प्रोटोकॉल की परवाह के बिना खुद मोटरसाइकिल चलाकर 30 किलोमीटर लंबे उबड़-खाबड़ और दुर्गम रास्ते को पार कर  ग्राम गोंडारास व नीलवाया पहुंच गए,और वहां ग्रामीणों की समस्याओं को सुना.कहा जा सकता है कि यहां नए परिवेश में नया वातावरण बन रहा है.It is a matter of happiness that, in Chhattisgarh, a new environment is being created in the new Era.When the government respects the basic needs and rights of the people, an atmosphere of peace, stability and cooperation prevails in the society. समस्या का निराकरण के बाद आवेदकों से संतुष्टि का फीडबैक भी लिया जा रहा है.

पिछले एक मई से प्रारंभ हुआ सुशासन तिहार अभी 10 जून तक चलता रहेगा. अभी लगभग सभी क्षेत्रों में तेज गर्मी चल रही है, दोपहरी अत्यंत गर्म हो रही है. ऐसे समय में मुख्यमंत्री श्री साय सहित अन्य मंत्रीगण सुशासन तिहार में किसी भी गांव में अचानक पहुंच रहे हैं.सुशासन की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार करने उत्साहपूर्वक  सुशासन तिहार 2026 का प्रदेशव्यापी शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह अभियान शासन और आमजन के बीच की दूरी को समाप्त कर पारदर्शी, त्वरित एवं संवेदनशील प्रशासन सुनिश्चित करने की एक महत्वपूर्ण पहल बताया जा रहा हूं है।लगभग सभी जिलों के गांव गांव में  जिले में 'सुशासन तिहार' के जरिए, प्रशासन सीधे ग्रामीणों के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। कोशिश की जा रही है कि जैसी सरकार की प्राथमिकता है समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कुराहट,खुशियां आ सके।अभियान के अंतर्गत सभी जिलों में  जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया गया, जहां मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी स्वयं उपस्थित होकर आम नागरिकों की समस्याएं सुन रहे है। इसे राज्य के अंतिम व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ पहुंचाने की छत्तीसगढ़ सरकार की  प्रतिबद्धता को पूरा करने का प्रभावी माध्यम कहा गया है। शिविर में केवल शिकायतें ही नहीं सुनी जा रही है, बल्कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का 'डिलीवरी सेंटर' भी बनाया जा रहा है। एक शिविर में  पुलिस विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा हेतु हेलमेट वितरण और भारत माता वाहिनी को संसाधन भेंट किए गए। इसी तरह युवाओं को कौशल विकास का सम्मान पत्र और टीबी मुक्त गांव के सरपंचों को महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट कर उनकी सामाजिक सहभागिता को सराहा गया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि जनता के आशीर्वाद से सरकार बनी है और उनकी सेवा करना ही सरकार का परम कर्तव्य है। सुशासन तिहार सरकार की जनता तक सीधी पहुंच और संवेदनशील कार्यशैली का प्रतीक है।सुशासन तिहार का सकारात्मक प्रभाव अब गांव-गांव और शहरों तक दिखाई दे रहा है। शासन और प्रशासन सीधे जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, जिससे लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है। वे स्वयं भी अचानक गांवों में पहुंचकर पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर आम जनता से संवाद कर रहे हैं।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने पिछले दिनों राजस्व प्रकरणों की विशेष समीक्षा की तथा समयसीमा से बाहर एवं एक वर्ष से अधिक लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा है कि राजस्व से जुड़े छोटे-छोटे मामले सीधे आम नागरिकों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करते हैं, इसलिए इनके निराकरण में संवेदनशीलता और गंभीरता आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने राजस्व अभिलेखों की त्रुटियों को शीघ्र सुधारने तथा जानबूझकर गलती करने वाले संबंधित कर्मचारियों एवं पटवारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि प्रदेश में शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा प्रारंभ की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक सीधे फोन अथवा ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे तथा शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की सतत मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निराकरण में संवेदनशीलता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सुशासन बिहार में गांव-गांव पहुंच रहे हैं. उनके जशपुर जिला प्रवास के दौरान ग्राम भैंसामुड़ा में एक बेहद आत्मीय और उत्साहवर्धक दृश्य देखने को मिला, जब वे शासकीय प्राथमिक शाला चंदागढ़ के स्कूल परिसर में अचानक पहुंच गए। विद्यालय पहुंचते ही उनकी नजर मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चों पर पड़ी, जिनका जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों की इस ऊर्जा ने मुख्यमंत्री को इतना आकर्षित किया कि वे बिना औपचारिकता के सीधे मैदान में उतर गए और उनके साथ क्रिकेट खेलने लगे। मुख्यमंत्री को अपने बीच खेलते देख बच्चों की खुशी दोगुनी हो गई और पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से भर उठा।इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से सहज संवाद करते हुए उनकी दिनचर्या, पढ़ाई और खेल के प्रति रुचि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से पूछा कि वे नियमित रूप से खेलते हैं या नहीं और किस खेल में उनकी विशेष रुचि है। बच्चों के साथ इस आत्मीय संवाद के बीच उन्होंने यह भी समझने का प्रयास किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की क्या स्थिति है और किन-किन संसाधनों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। बच्चों के उत्साह और खेल के प्रति  रुचि को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने निर्देशित किया कि स्कूल के विद्यार्थियों के लिए आवश्यक क्रिकेट किट और स्पोर्ट्स ड्रेस उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर खेल सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने कौशल का समुचित विकास कर सकें और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण खेल और शिक्षा के संतुलित विकास की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया।

मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा केवल एक प्रशासनिक निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि  उनके सहज और प्रेरणादायक क्षणों ने ग्रामीणों के मन में विशेष उत्साह और विश्वास का वातावरण निर्मित किया है।जोकि लोगों  में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार भी कर रहा है।एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक दृश्य ग्राम भैंसामुड़ा में भी देखने को मिला, जिसने ग्रामीणों के मन में गहरी छाप छोड़ी है ।

विकासखंड पत्थलगांव के इस दूरस्थ गांव में पहुंचकर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों का औचक निरीक्षण किया। गांव से गुजरते समय निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने न केवल कार्य की गुणवत्ता को परखा, बल्कि वहां कार्यरत श्रमिकों से आत्मीय संवाद भी किया। उन्होंने उनके परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि यही मेहनत प्रदेश के विकास की वास्तविक ताकत है।

इस दौरान मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और सादगी का एक अनूठा उदाहरण तब सामने आया, जब उन्होंने स्वयं करणी उठाकर सीमेंट-गारा से ईंट जोड़ते हुए श्रमदान किया। मुख्यमंत्री को अपने हाथों से निर्माण कार्य में सहभागी होते देख वहां उपस्थित ग्रामीण भावुक हो उठे। यह दृश्य केवल एक प्रतीकात्मक पहल नहीं, बल्कि जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश बन गया।

हितग्राही श्रीमती अनुसुइया पैंकरा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनका वर्षों पुराना सपना अब साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उन्हें पक्का घर मिल रहा है, जिससे उनके परिवार का जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक बनेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर चंदागढ़ के राजमिस्त्री श्री मोहन चक्रेश से भी चर्चा की। उन्होंने उनके रोजगार, दैनिक मजदूरी और पारिवारिक स्थिति के बारे में जानकारी ली तथा उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।मुख्यमंत्री श्री साय की यह पहल गरीबों के प्रति उनकी संवेदनशीलता, सहभागिता और जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गई। इस घटना ने ग्रामीणों के मन में शासन के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया।


कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम धनरास में आयोजित शिविर में 332 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 103 का तत्काल समाधान किया गया।वहां वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि यह अभियान शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है।

रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड के ग्राम कठिया में आयोजित शिविर में मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब की उपस्थिति में कई हितग्राहियों को शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया। महिलाओं को मनरेगा जॉब कार्ड प्रदान किए गए। दिव्यांग हितग्राही श्री योगेश यादव को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई गई। शिविर में हितग्राहियों के चेहरे पर खुशी देखते ही बनती थी।

शिविरों में विभिन्न विभागों द्वारा वन-स्टॉप समाधान केंद्र के रूप में स्टॉल लगाए गए, जहां आमजन को आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, केसीसी ऋण, उज्ज्वला योजना, कृषि उपकरण, मत्स्य पालन सामग्री सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ मौके पर ही प्रदान किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाओं की उपलब्धता ने ग्रामीणों को त्वरित राहत दी।

सुशासन तिहार के माध्यम से न केवल शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है, बल्कि आम नागरिकों को शासन की योजनाओं के प्रति जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वयं इस अभियान की सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं तथा औचक निरीक्षण के माध्यम से जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा भी करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा तथा 757 करोड़ रुपये के बिजली बिल माफ किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराने की अपील की।हाल ही में प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं गांव के नजदीक ही उपलब्ध हो सकेंगी तथा धान खरीदी प्रक्रिया भी अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगी।













"सुशासन तिहार" मैं विभिन्न गांवों में दिखा अद्भुत नजारा 

    ​रिसदा के हाई स्कूल प्रांगण में लगे शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संवेदनशीलता रही। शिविर में आए 573 आवेदनों में से लगभग आधे  का निराकरण तुरंत किया गया।  सरकारी मशीनरी को फाइलों को अटकाने के बजाय सुलझाने पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। जिन आवेदनों में तकनीकी पेच हैं, उनके लिए समय-सीमा (Timeline) निर्धारित कर दी गई है।

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम पंचायत मोहतरा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में प्रशासन की संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला, जहाँ ग्राम मोहतरा निवासी महिला कौशिल्या साहू को आवेदन करते ही तत्काल आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया।   शिविर में अपनी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर पहुँची कौशिल्या साहू ने जैसे ही आयुष्मान कार्ड के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत किया, संबंधित विभाग के अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई। मौके पर ही पात्रता की जाँच कर ऑनलाइन प्रक्रिया पूर्ण की गई और तत्काल कार्ड प्रिंट कर उन्हें सौंप दिया गया।

सुशासन की यह लहर केवल चिचिरदा तक सीमित नहीं रही। सिमगा विकासखंड के ग्राम जांगड़ा में भी समाधान शिविर का सफल आयोजन हुआ। जिले के 7 नगरीय निकायों में विशेष शिविर लगाकर आम जनता की समस्याओं को सुना गया और उनका समाधान किया गया। इस पहल से न केवल ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान हो रहा है, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।

कुनकुरी अंतर्गत ग्राम पंचायत कलिबा में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न जनहितैषी विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कुल 16 करोड़ 5 लाख 91 हजार रुपए की लागत से 12 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इन कार्यों में उच्च स्तरीय पुल, आधुनिक हाट बाजार, फल-सब्जी मंडी, स्कूल भवन और महतारी सदनों जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य शामिल हैं, जिनसे क्षेत्र में आवागमन, शिक्षा, कृषि विपणन, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी।

कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में  सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था।

आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे।गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं - कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर।

जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा - “आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।”

मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। श्रीमती कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है।कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढ़ने का हौसला मिला है।

सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में  लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं।

सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के सुदूर वनांचल ग्राम चंदागढ़ में पहुंचकर संवेदनशील और जनकेंद्रित शासन की एक प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर जैसे ही चंदागढ़ में उतरा, ग्रामीणों ने उत्साह और आत्मीयता के साथ उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री  पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम भैंसामुड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने बजरंग बली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद गांव के बीचों-बीच बरगद के विशाल पेड़ की शीतल छांव में जनचौपाल सजी।मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्रामवासियों से राशन, नमक, शक्कर की उपलब्धता, पेयजल व्यवस्था, बिजली, पटवारी से संबंधित समस्याओं सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्राम चंदागढ़ और भैंसामुड़ा के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए सामुदायिक भवन निर्माण, मिनी स्टेडियम निर्माण, सीसी रोड निर्माण तथा बच्चों के लिए क्रिकेट किट और यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को सामुदायिक भवन के लिए उपयुक्त स्थल का चयन करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का भी जायजा लिया। कलावती चौहान ने बताया कि गांव में महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को मिल रहा है, जिस पर मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त किया।यहां मुख्यमंत्री श्री साय ने तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य की स्थिति की जानकारी ली और चरण पादुका योजना के लाभ के संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य में श्री रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से आमजन को धार्मिक और सामाजिक रूप से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में स्थापित अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से अब आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं और ग्रामीणों को ऑनलाइन बैंकिंग एवं अन्य सुविधाओं का भी लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी समस्याओं का प्राथमिकता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लोगों को उनका लाभ समय पर मिले।

वर्तमान में धरमजयगढ़ और आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गंभीर बीमारी या विशेष उपचार के लिए रायगढ़, बिलासपुर अथवा अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक दोनों प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब वहां एक संस्थान को अस्पताल बनाने के लिए जमीन दी गई है.अस्पताल बनने के बाद स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे ग्रामीणों को त्वरित उपचार मिल सकेगा। अस्पताल में सामान्य चिकित्सा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन उपचार, जांच सुविधाएं तथा अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहेगी। उम्मीद की गई है कि यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का एक बड़ा केंद्र बनेगा। इससे वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर मजबूत होगा और ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा।अस्पताल का संचालन गरीबों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाएगा। शासन द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार भूमि का उपयोग केवल अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों तथा अन्य वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा। 

ग्राम गोंडेरास में इमली की छाँव में समस्याओं का तत्काल समाधान

        गोंडेरास गांव में कलेक्टर और एसपी ने किसी आलीशान मंच के बजाय इमली के पेड़ के नीचे बिछी खाट पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। ग्रामीणों द्वारा सोलर प्लेट्स के खराब होने की शिकायत पर कलेक्टर ने तत्काल क्रेडा विभाग को सभी घरों में मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गाँव में आंगनबाड़ी और पंचायत भवन जैसे बुनियादी कार्यों के लिए 70 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई, जिसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को ही सौंपी गई है। शिविर में 17 किसान क्रेडिट कार्ड, 12 जाति प्रमाण पत्र और 11 पीएम-किसान प्रकरणों का निराकरण, 2  किसान किताब, 2 पटवारी प्रतिवेदन सहित कई दस्तावेज मौके पर ही वितरित किए गए। 

       ग्राम नीलावाया पहुँचकर अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर चौपाल लगाई। बारिश के दिनों में ग्रामीणों को होने वाली 15 किमी की अतिरिक्त दूरी को खत्म करने के लिए कलेक्टर ने मौके पर ही नाले पर पुलिया निर्माण की स्वीकृति दी। 4 मोतियाबिंद मरीजों को जिला अस्पताल भेजने और गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए सचिव को कड़े निर्देश दिए गए। शिविर के दौरान 2 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म पूरी की गई और 22 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र तत्काल बनाकर सौंपे गए।

प्रदेश के मुखिया श्री विष्णुदेव साय ने सुदूर वनांचल ग्राम कमराखोल में चौपाल के दौरान एक ग्रामीण के बढ़ते बिजली बिल और बकाया राशि को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करने पर , आश्वस्त करते हुए कहा -“परेशान होने की जरूरत नहीं है, आपकी सरकार आपके साथ है।”  हमारी सरकार की बिजली बिल भुगतान समाधान योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है, जिसके तहत पुराने बकाया बिलों में व्यापक छूट प्रदान की जा रही है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कृषि पंप धारकों को भी योजना का लाभ मिल रहा है, जबकि बीपीएल परिवारों के लिए विशेष रियायतों का प्रावधान किया गया है।मुख्यमंत्री श्री साय की कार्यशैली केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने तत्काल कलेक्टर को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि कमराखोल सहित आसपास के गांवों के लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और समस्याओं का समाधान उनके अपने गांव में ही हो सके।इस दौरान कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने जानकारी दी कि जिले में अब तक 13 हजार से अधिक उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं और उन्हें कुल 11.75 करोड़ रुपये से अधिक की छूट प्रदान की जा चुकी है।

सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की चौपाल केवल समस्याओं के समाधान का मंच नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलावों की सजीव तस्वीर भी बनी। इसी चौपाल में स्वच्छता दीदी श्रीमती मनीषा मरकाम की कहानी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।मनीषा मरकाम अपने पति श्री रंजीत मरकाम और तीन बेटों के साथ एक साधारण परिवार से हैं। उनके बच्चे वर्तमान में अध्ययनरत हैं और परिवार की आजीविका खेती-किसानी एवं मजदूरी पर निर्भर है। सीमित आय के बीच घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई संभालना पहले चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव आया है।

सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया।सरलाबाई मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है।चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया।अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी।

सुशासन तिहार के तहत प्रदेशभर में चल रहे औचक निरीक्षण और जनसंवाद के क्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कबीरधाम जिले के ग्राम लोखन में एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सुशासन के ध्येय को और अधिक जीवंत बना दिया। निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल औपचारिक समीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने उस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चुना, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। उनके इस व्यवहार ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुशासन केवल नीति और कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर उसे महसूस करने और जीने की प्रक्रिया है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में कार्य कर रहीं श्रमिक बहनों के बीच जाकर कुछ समय उनके साथ ईंट जोड़ाई में हाथ बँटाया।  

इसी दौरान श्रमिक बहन संगीता ने पूरे आत्मीय अधिकार और सहजता के साथ मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री से कहा - “ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए, मसाला बढ़िया से डालिए।” यह संवाद एक सामान्य वाक्य से कहीं अधिक था; इसमें वह विश्वास झलकता है, जो आज सरकार और जनता के बीच विकसित हो रहा है। यह वह स्थिति है, जहाँ आम नागरिक बिना झिझक अपनी बात रखता है और नेतृत्व उसे उसी सहजता से स्वीकार करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जनता के साथ मिलकर धरातल पर साकार करना है। उन्होंने कहा कि जब शासन और जनता के बीच संवाद, विश्वास और सहभागिता का रिश्ता बनता है, तभी विकास की प्रक्रिया प्रभावी और स्थायी बनती है। उनके अनुसार, यही आत्मीयता और साझेदारी सुशासन की सबसे बड़ी ताकत है।

विभिन्न विकास कार्यों का भूमि पूजन और लोकार्पण

राज्य सरकार गांव, गरीब, किसान और अंतिम व्यक्ति तक विकास की सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सड़क, पुल, स्कूल, बाजार और महिला केंद्र जैसी आधारभूत सुविधाओ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में कुल 12 करोड़ 86 लाख 3 हजार रुपए की लागत से 8 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से ग्राम पंचायत कलिबा में 57 लाख 66 हजार रुपए की लागत से आधुनिक हाट बाजार का निर्माण कराया जाएगा, जिसमें कव्हर्ड शेड, बोरवेल एवं सीसी रोड जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसी प्रकार ग्राम पंचायत बेहराखार में 80 लाख 59 हजार रुपए की लागत से आधुनिक हाट बाजार का निर्माण किया जाएगा। इन बाजारों के बनने से किसानों और ग्रामीण व्यापारियों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर एवं सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा तथा स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। लोक निर्माण विभाग (सेतु) द्वारा कलिबा-टांगरबहार (बैगाटोली) मार्ग पर 5 करोड़ 11 लाख 6 हजार रुपए की लागत से उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाएगा। वहीं बांसपतरा-दुलदुला मार्ग पर चांपाझरिया नाला में 5 करोड़ 90 लाख 80 हजार रुपए की लागत से उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। इन पुलों के निर्माण से विशेषकर बरसात के दिनों में आवागमन सुगम होगा और ग्रामीणों को लंबे समय से चली आ रही कठिनाइयों से राहत मिलेगी।

इसके साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत प्राथमिक शाला कोरवाडेरा, प्राथमिक शाला डडगांव, माध्यमिक शाला बालक नारायणपुर तथा प्राथमिक शाला लालगोड़ा के नवीन भवन निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया गया। इन भवनों के निर्माण से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में कुल 3 करोड़ 19 लाख 88 हजार रुपए की लागत से पूर्ण हुए 4 विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया। कृषि उपज मंडी समिति जशपुर द्वारा ग्राम पंचायत कंडोरा (महुआटोली) स्थित उपमंडी कुनकुरी में 2 करोड़ 45 लाख 78 हजार रुपए की लागत से निर्मित फल-सब्जी मंडी, गोदाम, प्लेटफार्म, टायलेट, पार्किंग एवं सीसी रोड का लोकार्पण किया गया। इस आधुनिक मंडी के शुरू होने से किसानों एवं व्यापारियों को कृषि उपज के भंडारण, परिवहन और विपणन की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

इसके अतिरिक्त पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ढोढ़ीबहार, नारायणपुर एवं केराड़ीह में निर्मित महतारी सदनों का भी लोकार्पण किया गया। प्रत्येक महतारी सदन 24 लाख 70 हजार रुपए की लागत से निर्मित हुआ है। इन केंद्रों में महिलाओं को बैठक, प्रशिक्षण, स्व-सहायता समूह गतिविधियों एवं सामाजिक आयोजनों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी।


कुकरेल सहित दरगहन, सलोनी, केरेगांव और भोथापारा जैसे 17 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में अपनी मांगें और समस्याएं लेकर पहुंचे। कुल 314 आवेदनों में से 306 आवेदन विकास कार्यों और व्यक्तिगत मांगों से संबंधित थे, जिनमें से 262 मांगों को तत्काल मंजूरी या प्रक्रिया में लिया गया। जल संसाधन, स्वास्थ्य,राजस्व, कृषि और महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टालों पर हितग्राहियों को योजनाओं की जानकारी के साथ-साथ सीधे लाभान्वित किया गया।

    ​ शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल शिकायतों का निपटारा करना ही नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच की दूरी को कम करना भी है। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सरल और सुलभ हो गई है। प्रशासन प्रत्येक आवेदन के गुणवत्तापूर्ण निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है। सुशासन तिहार के तहत जिले के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।सुशासन तिहार का यह अभियान 10 जून तक अनवरत जारी रहेगा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अगले शिविरों की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, ताकि 'साय सरकार' के सुशासन का लाभ हर घर तक पहुँच सके।



किसी भी सरकार के लिए जनता के हित में कार्य करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव जनता का विश्वास और कल्याण ही होता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे (infrastructures) और रोजगार के अवसरों जैसी जनहितैषी नीतियां देश के समग्र विकास की रीढ़ होती हैं।कानून व्यवस्था और स्थिरता (Law, Order, and Stability): जब सरकार लोगों की बुनियादी जरूरतों और अधिकारों का सम्मान करती है, तो समाज में शांति, स्थिरता और सहयोग का माहौल बना रहता है।

सुशासन तिहार’ शासन की कार्यप्रणाली में बेहतर और सकारात्मक बदलाव का संकल्प है। 40 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से अब प्रशासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुंच रहा है और  समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। पहले नागरिकों को अपने कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन जावा किया जा रहा है कि सुशासन तिहार से शासन स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहा है और उनका निराकरण करेगा। अधिकारीगण  जन चौपाल में प्राप्त प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर उसका समाधान सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी ग्रामीणों से ले रहे है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। पुल और सड़कों के निर्माण से ग्रामीण संपर्क मजबूत होगा, स्कूल भवनों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, आधुनिक बाजार एवं मंडियों से किसानों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी तथा महतारी सदन महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत केंद्र बनेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि गांवों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और समृद्ध बनाना है। वैसे अब नक्सल प्रभावित इलाकों में भी विकास के स्वर सुनाई देने लगे हैं. यह सबको मालूम है कि आम जनता को राजस्व विभाग में सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है यहां कर्मचारी अधिकारी ज्यादातर नदारद रहते हैं.बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री श्री साय इस समस्या के निराकरण पर प्राथमिकता पूर्वक फोकस कर रहे हैं.उम्मीद की जानी चाहिए कि सुशासन बिहार चलते-चलते प्रशासनिक कार्य में सुधार की पहल का काफी कुछ असर धरातल पर दिखने लगेगा.