Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


‘नशा मुक्त भारत’ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई, पहली बार पकड़ी गई ‘जिहादी ड्रग’, कीमत सुनकर चौंक जाएंगे आप

  नई दिल्ली। ‘नशा-मुक्त भारत’ की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए भारत सरकार की एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के माध्यम से पहली बार कैप्टागॉन (ज...

Also Read

 नई दिल्ली। ‘नशा-मुक्त भारत’ की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए भारत सरकार की एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के माध्यम से पहली बार कैप्टागॉन (जिहादी ड्रग) जब्त किया है. ड्रग की कीमत 182 करोड़ रुपए आंकी गई है.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार हुई जिहादी ड्रग गी जब्ती की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म में जानकारी दी है. अमित शाह ने अपने पोस्ट में बताया कि मध्य पूर्व के लिए नियत ड्रग की खेप के भंडाफोड़ के साथ एक विदेशी नागरिक को गिरफ्तारी किया गया है. उन्होंने इसे नशे के खिलाफ शून्य सहनशीलता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के चमकते उदाहरण के रूप में बताया है.

इसके साथ उन्होंने दोहराया कि मोदी सरकार ‘नशा-मुक्त भारत’ के लिए दृढ़ संकल्पित है. मैं दोहराता हूं कि हम भारत में प्रवेश करने वाले या देश छोड़ने वाले हर ग्राम नशीले पदार्थ पर सख्ती करेंगे, जो हमारी भूमि को पारगमन मार्ग के रूप में उपयोग करते हैं. NCB के साहसी और सतर्क योद्धाओं को बधाई.



ड्रग क्या है कैप्टागॉन?

कैप्टागॉन एक चालू नाम ‘स्ट्रीट नेम’ है, जो ऐतिहासिक रूप से ‘फेनेथिलिन’ (Fenethylline) से जुड़ा है. यह एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट (उत्तेजक) ड्रग है, जिसे मूल रूप से 1960 के दशक में ADHD और नार्कोलेप्सी जैसे ध्यान संबंधी विकारों के इलाज के लिए विकसित किया गया था. इसकी लत लगाने वाली प्रकृति और दुरुपयोग की संभावना के कारण 1980 के दशक तक इसकी मूल दवा-निर्माण विधि पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

सूत्रों के अनुसार, अवैध ड्रग बाजारों में इस समय चल रही ज़्यादातर गैर-कानूनी कैप्टागॉन गोलियों में आमतौर पर एम्फ़ैटेमिन, कैफीन, मेथैम्फ़ैटेमिन और अन्य सिंथेटिक स्टिमुलेंट्स का मिश्रण होता है. इस ड्रग का निर्माण गुप्त रूप से किया जाता है.

सूत्रों ने आगे बताया कि पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में कैप्टागॉन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जाता है, क्योंकि इसके सेवन से उत्तेजना और खुशी (euphoria) का अनुभव होता है. इसके प्रभावों में बढ़ी हुई सतर्कता और ऊर्जा, भूख और थकान में कमी, कुछ समय के लिए खुशी का एहसास, लंबे समय तक जागते रहना, और आत्मविश्वास व आक्रामकता में वृद्धि शामिल है.

खबरों के मुताबिक, इस ड्रग के बार-बार इस्तेमाल से सोचने-समझने की शक्ति कम हो जाती है, व्यक्ति बिना सोचे-समझे व्यवहार करने लगता है, और मानसिक रूप से इस पर निर्भर हो जाता है. कुछ जगहों पर इसे “गरीब आदमी का कोकीन” भी कहा जाता है.

क्यों कहा जाता है ‘जिहादी ड्रग’?

सूत्रों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सुरक्षा चर्चाओं में कैप्टागॉन को अक्सर “जिहादी ड्रग” कहा जाता रहा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में इस ड्रग के दुरुपयोग और इसकी तस्करी को पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में सक्रिय चरमपंथी और संघर्ष-क्षेत्रों के नेटवर्क से जोड़ती है.

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने कैप्टागॉन के व्यापार को पश्चिमी एशिया में उभरते हुए सबसे बड़े सिंथेटिक ड्रग खतरों में से एक के रूप में पहचाना है. इसमें गुप्त प्रयोगशालाएं, रसायनों का अवैध इस्तेमाल, हवाला के जरिए फंडिंग, जाली व्यापार दस्तावेज़, समुद्री तस्करी के रास्ते, कूरियर नेटवर्क और छिपाने के अत्याधुनिक तरीके शामिल हैं.

इसका मुख्य कारण इसकी उत्पादन लागत का अपेक्षाकृत कम होना और अवैध बाजारों में इसकी मांग का बहुत ज़्यादा होना है. ऐतिहासिक रूप से अवैध कैप्टागॉन उत्पादन का मुख्य केंद्र सीरिया रहा है.

यह नामकरण ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया’ (ISIS) जैसे समूहों द्वारा इसके इस्तेमाल के कारण सामने आया. ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि इस ड्रग के उत्तेजक प्रभावों के कारण इसके सेवन करने वाले लोग कथित तौर पर लंबे समय तक जागते रह पाते थे, डर और थकान को दबा पाते थे, उनमें आक्रामकता और जोखिम उठाने की प्रवृत्ति बढ़ जाती थी, और वे तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी लंबे समय तक युद्ध जैसी गतिविधियों को जारी रख पाते थे.

पिछले एक दशक में हुई विभिन्न अंतरराष्ट्रीय जांचों और संघर्ष-क्षेत्रों से मिली बरामदगियों से यह संकेत मिला है कि युद्ध-प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय सशस्त्र समूहों और तस्करी करने वाले गिरोहों के पास कैप्टागॉन की गोलियां पाई गई हैं. सूत्रों के अनुसार, कैप्टागॉन की तस्करी से होने वाला भारी मुनाफ़ा, कथित तौर पर ISIS जैसे चरमपंथी-संबंधी नेटवर्कों के लिए अवैध वित्तपोषण का एक अहम ज़रिया भी बन गया है.