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”नन्हे बच्चों के मधुर गायन और सुर-ताल पर सधे नृत्य से जीवंत हुआ भारत का सांस्कृतिक विरासत“,इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय और अखिल भारतीय उत्कृष्ट बहुउद्देश्यीय संस्था का संयुक्त आयोजन

भिलाई . असल बात news.  विश्व विरासत दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय उत्कृष्ट बहुउद्देश्यीय संस्था और इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा सांस्कृतिक ...

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भिलाई .

असल बात news. 

विश्व विरासत दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय उत्कृष्ट बहुउद्देश्यीय संस्था और इंटैक दुर्ग-भिलाई अध्याय द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम ”आ अब लौट चले“ का आयोजन मैत्री विद्या निकेतन भिलाई में किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों के गायन, वादन और नृत्य कौशल को मंच प्रदान कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भूपेन्द्र कुलदीप, कुलसचिव हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग थे तथा अतिविशिष्ट अतिथि श्रीमती राजअम्मा एवं श्री सजीव, निदेशक मैत्री विद्या निकेतन थे।

मुख्य अतिथि डॉ. भूपेन्द्र कुलदीप ने कहा इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता यह है कि बच्चे गायन, वादन और नृत्य के माध्यम से देशभक्ति और शाश्त्रीय संगीत में अपनी कौशल का प्रदर्शन करेंगे और सभी की प्रतिभा का सम्मान होगा, प्रथम, द्वितीय और तृतीय की प्रतिस्पर्धा ना होने से सभी प्रतिभागी विजयी होगें। इस उत्कृष्ट सोच के लिये आयोजक बधाई के पात्र है।

सम्मानीय अतिथि राजअम्मा ने कहा कि यह महत्वपूर्ण आयोजन मैत्री विद्या निकेतन के सभागार में हो रहा है, यह अत्यंत गौरव की बात है भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिये संस्था कटिबद्ध है। श्री सजीव ने कहा कि देशभक्ति एवं शाश्त्रीय गायन, वादन और नृत्य के माध्यम से बच्चें भारत की गौरवशाली संस्कृति को मंच पर प्रस्तुत करेंगे। आज रैम्प और रिमिक्स के जमाने में देशभक्ति और शाश्त्रीय कला को जीवंत रखने के लिये ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण है।

अखिल भारतीय उत्कृष्ट समूह की अध्यक्ष एवं कार्यक्रम आयोजिका श्रीमती शानु मोहनन ने कहा कि उत्कृष्ट समूह का उद्देश्य हमेशा ऐसे आयोजन करना होता है, जिसमें कोई सार्थक पहल हो। इस कार्यक्रम में पांच साल से पंद्रह साल तक के बच्चे केवल देशभक्ति एवं शाश्त्रीय गायन, वादन और नृत्य की प्रस्तुति देंगे, इससे बच्चों में भारत की अमूल्य धरोहर यहॉं की कला और संस्कृति से परिचित होंगे और प्रतिस्पर्धा ना होने के कारण बच्चे उन्मुक्त भाव से अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इंटैक दुर्ग-भिलाई की संयोजिका डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भारतीय सांस्कृतिक निधि का मुख्य उद्देश्य है। सांस्कृतिक धरोहर के संवहक के रुप में बच्चों में देशभक्ति भावना का विकास करना तथा भारतीय शाश्त्रीय संगीत एवं नृत्य कला के प्रति जागरुकता एवं सम्मान उत्पन्न करना है।

औपचारिकताओं के पूरा होते ही बच्चों की मनमोहक प्रस्तृति से सभागार देशप्रेम और शाश्त्रीय संगीत के रंग में सरोबार हो गया। नन्हीं कृतिका के ”जहॉं पांव में पायल हाथ में कंगन है माथे पे बिन्दिया, आई लव माय इंडिया“ गाने से कार्यक्रम शुरु हुआ। श्रवण डिंगा ने अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं की की-बोर्ड में सुन्दर प्रस्तुति दी, दीपा सोनी ने राम आऐंगे तो कुटिया सजाउंगी गाकर सुन्दर प्रस्तुति दी, रिया एवं आन्वी चन्द्राकर ने पियानो में मेरी झोपडी के भाग खुल जाऐंगे की मनमोहक प्रस्तुति दी, प्रणव गुप्ता ने पियानो में ए मेरे वतन के लोगों की प्रस्तुति से सभागार में सभी की आंखे नम हो गई, सावि खण्डेलवाल बोलो राम-राम-राम भजन गाकर सभागार को भक्तिमय कर दिया, एनी टेटे ने तेरी है जमीन तेरा आसमान गीत से अपनी गायन कौशल का परिचय दिया, ईशिका दलाई एण्ड समूह ने भरतनाट्यम की सुन्दर प्रस्तुति दी, आदित्य शुक्ला ने आओ बच्चों तुम्हें दिखाऐं झॉंकी हिन्दुस्तान गाने पर मोहक नृत्य प्रस्तुत किया, अननय दीक्षित ने हारमोनियम के साथ स्वर्ग से सुन्दर देश हमारा भारत इसका नाम की सुन्दर प्रस्तुति दी, नम्रता सिंग ने ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन भजन गाकर माहौल को पुनः भक्तिमय कर दिया, अरणव जैन एवं अर्चित जैन ने की-बोर्ड पर ए मेरे वतन के लोगो और मेलोनी रत्नानी एवं आर्या अग्रवाल ने एकल कत्थक की मनमोहक प्रस्तुति दी, आयुष्मान त्रिपाठी ने ढुमक चलत रामचन्द्र, बाजत पैजनिया एवं आराध्या त्रिपाठी ने श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन गाकर उपस्थित लोगों को भक्ति के रस में डुबो दिया, सुशील कुमार द्विवेदी एवं प्रद्यमन गुप्ता, श्रेया गोलछा, संस्कृति द्विवेदी, संचिता चक्रवर्ती, गुरुवंश सिंग, ससिन्द्र सिंग, अनंत जिंदल डीपीएस भिलाई के विद्यार्थियों ने ए वतन वतन मेरे आबाद रहे तु समूह गायन प्रस्तुति दी, रुद्रांशी चौधरी डीपीएस भिलाई की छात्रा ने भरतनाट्यम प्रस्तुत किया, ओमिशा पाण्डेय, समिरा शुक्ला, निखर जैन एवं आत्मजा दातोण्डे ने कत्थक की मनमोहक प्रस्तुति दी, इशिका दलाई ने भरतनाटयम एवं जी रक्षिता रेडडी ने भरतनाटयम या देवी सर्वभूतेषु की मनभावन प्रस्तुति दी, प्रीति बिसोई भरत नाटयम श्लोकाजली, लावण्या ने कुचिपुडी, प्रीति ने जगन्नाथ भगवान के शाश्त्रीय नृत्य के द्वारा सांस्कृतिक नृत्य की छटा बिखेर दी। आरोही श्रीवास्तव ने कत्थक, काहे छेड-छेड मोहे गरवा लगापई की नयनाभिराम प्रस्तुति दी, डी. पूर्वी और राशि अग्रवाल ने केसियो में जहॉं डाल डाल पर सोने की चिडिया करती है बसेरा की प्रस्तुति से माहौल को पुनः देशभक्ति के भाव से भर दिया। तान सेन संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थी अनिशा अग्रवाल, श्रव्या जैन, जिविका जासुजा और माहिरा जैन ने त्रिशुल बीट्स में कहते है हमको दुनिया वालो सुनो गौर से दुनिया वालो नृत्य की सुन्दर प्रस्तुति दी, बी. पलक ने एकल शाश्त्रीय नृत्य एवं स्वाधीन जैन, प्रज्ञान, प्रज्ञांस, कनक सोनी, एवं निकिता ने शाश्त्रीय समूह ने सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया, नित्यांजली एवं समूह, तान सेन संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थी ने अयिं गिरि नन्दिनी नन्दितमेदिनी की सुन्दर प्रस्तुति दी। अंतिम प्रस्तुति विद्या साहू का शाश्त्रीय गायन तारो को तोड न छोडूंगी थी। 

इस तरह मंच पर बच्चों ने गायन वादन एवं नृत्य की विभिन्न भारतीय शैलियों को प्रस्तुत कर भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर साकार कर दिया। बच्चों के साथ आये उनके पालक गण एवं गुरुओं ने इस आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। 

कार्यक्रम में मंच संचालन कुमारी आध्या मिश्रा एवं कुमारी आकांक्षा ने किया तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में अभिलाषा मिश्रा, पुष्पा चौव्हान, भारती, उमा नायर, तब्बसुम, सोनम गुप्ता, विश्वास तिवारी ने विशेष सहयोग दिया।