भिलाई,दुर्ग . असना बात news. नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2013 के क्रियान्वयन पर छात्रों- शिक्षकों के बीच गहन विचार -विमर्श के उद्देश्य से ...
भिलाई,दुर्ग .
असना बात news.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2013 के क्रियान्वयन पर छात्रों- शिक्षकों के बीच गहन विचार -विमर्श के उद्देश्य से हेमचंद यादव विश्वविद्यालय,दुर्ग में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार रूंगटा डेंटल कॉलेज के सभागार में आयोजित किया गया। उद्घाटन डॉ.लवली शर्मा, कुलपति,इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय,खैरागढ़,राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा,श्रीमती किरणमयी नायक तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो (डॉ) संजय तिवारी नेे दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
मुख्य अतिथि प्रो.(डॉ.)लवली शर्मा ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि नारी को सशक्त बनना होगा, इसके लिए थोड़ी सी सोच बदलनी होगी। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम- 2023 को एक एतिहासिक कानून बताते हुए कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी महिलाएँ राजनीतिक निर्णय-निर्माण में अपेक्षित स्थान पाने से वंचित रही है ।
मुख्य वक्ता डॉ. किरणमयी नायक ने अधिनियम के विभिन्न आयामों की विस्तृत विवेचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के लागू होने से पूर्व जनगणना एवं परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करना संवैधानिक अनिवार्यता है।यह कानून दशकों के महिला आंदोलन एवं संघर्ष का प्रतिफल है।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी ने कहा कि यह संगोष्ठी न केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम है,अपितु भारत के संवैधानिक लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने युवाओ को संवैधानिक जागरूकता एवं लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाने का आह्वान किया।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र के द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय संगोष्ठी में विद्यार्थि यों को भारत की विधायी संस्थाओं में लैंगिक प्रतिनिधित्व की असमानताओ पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए तथा संसदीय चर्चा में भाग लेने का अवसर दिया गया है.। उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित यह कार्यक्रम नारी शक्ति मंडल वंदन अधिनियम-2023 के तत्काल कार्यान्वयन पर संरचित चर्चाओं को सुगम बनता है।यह एक ऐतिहासिक विधेयक है जो संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओ के लिए एक तिहाई (33ः) सीटें आरक्षित करता है।
उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्र में थैंक्यू विश्वविद्यालय की भूतपूर्व कुलपति डॉ अरुणा पल्टा, सामाजिक कार्यकर्ता शताब्दी पाण्डेय तथा प्रख्यात अधिवक्ता विभा सिंह ने विचारोंत्तेजक वक्तव्य प्रस्तुत किया जिस पर छात्रों ने भी विचार रखे और बहस में हिस्सा लिया.जिसमें प्रमुख रूप से हर्षजीत कौर गिल, आकांक्षा बाघमारिया,श्रेया सिंह,विधि विश्वकर्मा, याग्नि देवांगन, राशि चंद्राकर,प्रिया सिंह, नम्रता देवतारे, पल्लवी ठाकुर, हरीश साहू,धृति वैष्णव,अनुष्का राजभर, अंशिका, कलश यादव,मोनिका चंदनानी, तीक्षा पात्रे, छाया ना ेर्ग े,विनीता मिश्रा,मोनिका ने हिस्सा लिया,
सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं को पुरस्कृत किया गया प्रथम स्थान पर कलश यादव, द्वितीय स्थान पर मोनिका चन्दनानी, और तृतीय स्थान पर संयुक्त रूप से पल्लवी ठाकुर और याग्नि देवांगन रहे समापन समारोह में विजेता छात्र छात्राओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
अंतिम सत्र् स्वस्तिवाचनिक सत्र् (टंसमकपबजवतल ैमेेपवद) रहा। इस सत्र में डॉ हंसा शुक्ला ने नारी की परिभाषा बताई और वैदिक काल से शक्ति पूजा के होने का उल्लेख किया। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का सविस्तार वर्णन किया और छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण नारी व्यक्तित्व की चर्चा की तत्पश्चात डॉ सुचित्रा शर्मा ने अपना वक्तव्य दिया और कहा कि समाज की पितृसत्तात्मक व्यवस्था को बदलना होगा तभी समानता आ सकेगी। प्रत्येक नारी को स्वयं परीक्षण करना जरूरी है । खुद की मजबूती को जानकर, कमजोरी को दूर करके, संभावनाओ को दृष्टिगत रखते हुए , समस्याओं के निराकरण हेतु कार्य करना चाहिए तभी वास्तव में नारी शक्ति का विकास हो सकेगा। उन्होंने आकर्षण के नियम का उल्लेख करते हुए कहा कि
प्रत्येक नारी को सकारात्मक सोचते हुए कार्य करना चाहिए। इस सत्र की मुख्य अतिथि डॉ रमा देवी पाणी ने अधिनियम की गूढ़ बातों को सभागार में रखा और अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने समाज में व्याप्त उंगलियों पर भी चर्चा की.


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