स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा पंद्रह दिवसीय मशरूम उत्पादन एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम...
स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा पंद्रह दिवसीय मशरूम उत्पादन एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जैव प्रौद्योगिकी की विभागाध्यक्ष डॉ शिवानी हरम ने प्रशिक्षण के उददेशियो को बताते हुए कहा की विद्यार्थियों एवं स्थानीय प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराने तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
श्री शंकराचार्य शैक्षणिक परिसर के निदेशक डॉक्टर दीपक शर्मा एवं डॉक्टर मोनिषा शर्मा ने मशरूम उत्पादन एवं उससे जुड़े स्वरोजगार के अवसरों पर प्रशिक्षण आयोजन करने हेतु विभाग को बधाई दी।
अपने उद्बोधन में प्राचार्य डॉ हंसा शुक्ला ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सराहना करते हुए कहा मशरूम उत्पादन एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम का परिचय एवं प्रकार बटन, ऑयस्टर आदि की जानकारी दी गयी उसके बाद सब्सट्रेट कम्पोस्ट की तैयारी की विधि, स्पॉन बीज का चयन एवं उपयोग, तापमान एवं आर्द्रता का नियंत्रण, रोग एवं कीट प्रबंधन फसल की कटाई एवं भंडारण तकनीक विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। तत्पश्चात रिया मंडल सहायक प्राध्यापक जैव प्रौद्योगिकी ने प्रतिभागियों को मशरूम से निर्मित विभिन्न न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों तथा मशरूम पापड़, मशरूम अचार, मशरूम सूप पाउडर एवं मशरूम चिप्स बनाने का भी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे अपने उत्पादन को विविध रूपों में बाजार में बेच सकें तथा स्वरोजगार के रूप में अपना सकें। प्रतिभागियों को उत्पादों के मूल्य निर्धारण, पैकेजिंग एवं विपणन संबंधी जानकारी भी प्रदान की गई, जिससे वे अधिक आय प्राप्त करने के लिए व्यावसायिक दृष्टिकोण विकसित कर सकें।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। विद्यार्थियों ने इस प्रशिक्षण में अत्यधिक रुचि दिखाई तथा कई प्रतिभागियों ने इसे अपने रोजगार के रूप में अपनाने की इच्छा व्यक्त की। प्राचार्य एवं प्रबंधन समिति ने इस सफल आयोजन की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यक्रम न केवल विद्याथ्थियों के व्यावसायिक कौशल को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि ग्रामीण विकास एवं स्वरोजगार को भी प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।



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