नई दिल्ली,छत्तीसगढ़. असल बात news. 0 विशेष संवाददाता 0 अशोक त्रिपाठी पूरे देश में अभी परिसीमन विधेयक 2026 पर चर्चाओं का दौर चल रहा है तथा ...
नई दिल्ली,छत्तीसगढ़.
असल बात news.
0 विशेष संवाददाता
0 अशोक त्रिपाठी
पूरे देश में अभी परिसीमन विधेयक 2026 पर चर्चाओं का दौर चल रहा है तथा इसकी समीक्षा भी हो रही है कि किस राज्य पर इसका क्या असर पड़ सकता है.दक्षिण के राज्य से आवाज आ रही है कि वहां इससे नुकसान उठाना पड़ सकता है. छत्तीसगढ़ राज्य की बात करें,तो,यहां लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या में वृद्धि का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है.अब परिसीमन विधेयक से सीटों की संख्या बढ़ाने जा रही है तो इसका सभी जगह स्वागत हो रहा है. संभावना है कि यह परिसीमन विधेयक लागू हो जाने पर छत्तीसगढ़ में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़कर 17 तक हो सकती है. और इसमें महिला आरक्षण विधेयक का फार्मूला भी लागू हो गया तो यहां लोकसभा की कुल 6 सीटे,महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती है.कहा गया है कि यह व्यवस्था 2029 के बाद होने वाले चुनाव से ही लागू होगी.ऐसे में यह सवाल बना रहेगा कि वर्ष 2028 में छत्तीसगढ़ में विधानसभा का जो चुनाव होगा उसमें यह व्यवस्था लागू हो पाएगी कि नहीं...?लोकसभा के चुनाव को पूरे देश में एक साथ वर्ष 2029 में ही होंगे और तब यह सिस्टम अवश्य लागू दिखेगा.
संविधान के 131 वे संशोधन परिसीमन विधेयक 2026 का छत्तीसगढ़ में हर जगह स्वागत ही हो रहा है. कहा जाए तो लगभग प्रत्येक राजनीतिक दल और उसके कार्यकर्ता यहां लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं.इससे राजनीति में ऊंचाइयों को हासिल करने का अवसर बढ़ेगा. छत्तीसगढ़ में तो यह भी चर्चा शुरू हो गई की महिला आरक्षण विधेयक को नगरीय निकाय के चुनाव में भी लागू किया जा सकता है.
अब बात करें,लोकसभा चुनाव की तो छत्तीसगढ़ में लोकसभा की कुल सीटों 543 सीटों में से 11 सीट है.इस तरह से यहां मौजूदा सिर्फ 2.1प्रतिशत सीट है. इसमें 50% की वृद्धि की जानी है. ऐसे में 6 सीट बढ़ाई जा सकती है. तब यहां लोकसभा सीटों की कुल संख्या 17 हो सकती है.
फिलहाल लोकसभा में,परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा चल रही है. यह विश्वास दिलाया गया है कि 2019 के पहले तक जो भी चुनाव होंगे वह सब पुरानी व्यवस्था में ही होंगे. अभी जनगणना भी दो चरणों में हो रही है. पहले चरण में घरों की, फिर दूसरे चरण में व्यक्तियों की गणना हो रही है.अभी प्रथम चरण चल रहा है जिसमें घरों की गणना हो रही है, घरों की कोई जाति नहीं होती इसलिए फॉर्म में जाति का आप्शन नहीं है.
पर यहां सिर्फ लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ जाने की ही बात नहीं है कि सिर्फ किसी से खुश हो लिया जाए. इसी के साथ महिला आरक्षण विधेयक भी आ रहा है जिसमें महिला वर्ग को 33% आरक्षण देने का प्रावधान किया जा रहा है.और छत्तीसगढ़ में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़कर 17 हो जाती है तो,यहां 6 सीट तो निश्चित रूप से महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो जाने की संभावना है. अब यहां नहीं सोच लेना चाहिए कि जो नई लोक सभा सीट गठित होंगी,सिर्फ वही सीट ही आरक्षित होने वाली है. मैदानी इलाकों की भी कई सीट आरक्षित होगी.


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