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भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में स्क्रैप की बिक्री से 6813.86 करोड़ रुपए की कमाई की, जो निष्क्रिय संपत्तियों के उपयोग या बिक्री से तय किए 6000 करोड़ रुपए के लक्ष्य से ज्यादा

*स्क्रैप से होने वाली लगातार आय और गैर-किराया राजस्व में वृद्धि से रेलवे को यात्री किराए में वृद्धि किए बिना स्टेशन अनुभव बेहतर बनाने में मद...

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*स्क्रैप से होने वाली लगातार आय और गैर-किराया राजस्व में वृद्धि से रेलवे को यात्री किराए में वृद्धि किए बिना स्टेशन अनुभव बेहतर बनाने में मदद मिली

*डिपो, यार्ड और कार्यशालाओं में ज़रुरी स्थानों को खाली किया गया, जिससे 'पुनर्चक्रण' को बढ़ावा देकर और अपशिष्ट संचय को 'कम' करके रेलवे को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाया गया

*पिछले 5 वर्षों में 168% की वृद्धि के साथ, रेलवे का गैर-किराया राजस्व लगभग 290 करोड़ रुपए से बढ़कर 777 करोड़ रुपए से अधिक हुआ

*विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर 120 जनऔषधि केंद्र और 22 प्रीमियम ब्रांड आउटलेट इस वृद्धि को दर्शा रहे है

*स्वच्छ स्टेशन, आधुनिक बुनियादी ढांचा, उन्नत सुविधाएं और बेहतर सुरक्षा प्रणालियां यात्री अनुभव को बेहतर बना रही हैं

*ग़ैर किराया राजस्व के इस्तेमाल से विभिन्न क्षेत्रों द्वारा सह-कार्य डिजिटल लाउंज, चिकित्सा केंद्र, बहुस्तरीय कार पार्किंग, गेमिंग ज़ोन आदि विकसित किए जा रहे हैं*

छत्तीसगढ़ .

असल बात news.  

भारतीय रेलवे, स्क्रैप से होने वाली निरंतर आय और गैर-किराया राजस्व स्रोतों में लगातार वृद्धि की मदद से यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाते हुए अपनी वित्तीय स्थिरता को मजबूत कर रहा है और यह सभी सुविधाएं बिना यात्री टिकट किराए बढ़ाए मुमकिन हो पा रही हैं। निष्क्रिय संपत्तियों से मूल्य प्राप्त करके और किराए के अलावा अन्य नए राजस्व स्रोतों का विस्तार करके, रेलवे यह सुनिश्चित कर रहा है कि स्टेशन पर सुविधाओं, स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं और यात्री सुविधाओं में सुधार वित्तीय रूप से टिकाऊ तरीके से हासिल किए जाएं। यह संतुलित दृष्टिकोण कुशल परिसंपत्ति प्रबंधन, ग्राहक-केंद्रित निवेश और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं पर रणनीतिक फोकस को दर्शाता है, जो अधिक आरामदायक, आधुनिक और विश्वसनीय यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए रेलवे की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

*भारतीय रेलवे ने स्क्रैप के मुद्रीकरण की अपार संभावनाओं को दर्शाया

भारतीय रेलवे ने स्क्रैप निपटान में एक अहम उपलब्धि हासिल की है और वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। 6000 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले, रेलवे ने 6813.86 करोड़ रुपए की स्क्रैप बिक्री दर्ज की, जो निर्धारित बेंचमार्क से कहीं अधिक है और उल्लेखनीय दक्षता दर्शाती है।

यह उपलब्धि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के मजबूत प्रदर्शन पर आधारित है, जिसमें भारतीय रेलवे ने 5400 करोड़ रुपए के लक्ष्य को पार करते हुए 6641.78 करोड़ रुपए की स्क्रैप बिक्री की थी।

निरंतर स्क्रैप मुद्रीकरण भारतीय रेलवे के कुशल परिसंपत्ति प्रबंधन और पारदर्शी निपटान तंत्र के प्रति केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस्तेमाल में ना आने वाली सामग्रियों को व्यवस्थित रूप से हटाकर, संगठन न केवल निष्क्रिय परिसंपत्तियों से मूल्य प्राप्त कर रहा है, बल्कि डिपो, यार्ड और कार्यशालाओं में महत्वपूर्ण स्थान भी खाली कर रहा है।

यह पहल पुनर्चक्रण को बढ़ावा देकर और अपशिष्ट संचय को कम करके पर्यावरणीय स्थिरता में भी अहम योगदान देती है।

*रेलवे को सुदृढ़ और यात्री अनुभव को बेहतर बनाता गैर-किराया राजस्व

गैर-किराया राजस्व (एनएफआर) भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने का एक ज़रुरी स्तंभ बनकर उभरा है, जिससे पूरे नेटवर्क में यात्रियों को सीधा लाभ मिलता है। स्टेशन पुनर्निर्माण, विज्ञापन, रेलवे संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग और अन्य नवोन्मेषी पहलों जैसे माध्यमों से राजस्व उत्पन्न करके, एनएफआर यात्री किराए और माल ढुलाई से होने वाली आय पर अत्यधिक निर्भरता को कम करता है। यह अतिरिक्त आय भारतीय रेलवे को आधुनिक बुनियादी ढांचे में पुनर्निवेश करने, स्टेशन सुविधाओं को उन्नत करने, स्वच्छता और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने, डिजिटल सेवाओं में सुधार करने और बेहतर ट्रेनें और सुरक्षा प्रणालियाँ शुरू करने में सक्षम बनाती है। कुल मिलाकर इससे यात्रियों को अधिक आरामदायक, सुविधाजनक और विश्वसनीय यात्रा अनुभव मिलता है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में लगभग 290 करोड़ रुपए से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 777.76 करोड़ रुपए तक एनएफआर आय में लगातार वृद्धि एक मजबूत विकास पथ को दर्शाती है, जो पांच वर्षों में लगभग 168% की कुल वृद्धि दर्ज करती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित एनएफआर लक्ष्य 720.85 करोड़ रुपए था, जिसे वास्तविक आय 777.76 करोड़ रुपए तक पहुँचकर पहले ही पार कर लिया गया है, जो लगभग 107.9% की उपलब्धि है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एनएफआर आय 686.86 करोड़ रुपए थी। यह प्रक्रिया भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में रणनीतिक मुद्रीकरण पहलों के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है।

इस संबंध में निम्नलिखित पहल की गई हैं:

*प्रीमियम ब्रांड आउटलेट

एनएफआर को बढ़ावा देने के लिए कंपनी के स्वामित्व वाले सिंगल ब्रांड प्रीमियम आउटलेट स्थापित करने के लिए जोनल रेलवे को दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। रेलवे ने इस नीति के तहत कुछ नवोन्मेषी ब्रांडेड आउटलेट खोले हैं और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इसी तर्ज पर अन्य ब्रांडेड स्टोर भी खोले जाएंगे। सभी भारतीय रेलवे में एनएफआर के ज़रिए 22 प्रीमियम ब्रांड आवंटित किए गए हैं।

*प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों (पीएमबीजेके) का उद्घाटन

रेलवे स्टेशनों से गुजरने वाले यात्रियों के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रेलवे ने रेलवे स्टेशनों के परिसर में 50 प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) स्थापित करने के लिए एक नीतिगत ढांचा तैयार किया और उसे लागू किया। पीएमबीजेके के स्टॉल भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं। 12 मार्च 2024 को, सभी 50 पीएमबीजेके का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया। इस पहल की सफलता को देखते हुए और कल्याणकारी योजना का और विस्तार करने के लिए, भारतीय रेलवे पर अतिरिक्त 100 पीएमबीजेके स्थापित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन अतिरिक्त 100 पीएमबीजेके में से 18 पीएमबीजेके का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 13 नवंबर 2024 को किया गया। अब तक, भारतीय रेलवे पर 150 में से 120 पीएमबीजेके खोले जा चुके हैं। भारतीय रेलवे पर प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) आउटलेट्स के और विस्तार का अधिकार जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को सौंप दिया गया है, ताकि पीएमबीजेके योजना के प्रसार में तेजी लाई जा सके, अधिक राजस्व उत्पन्न किया जा सके और साथ ही यात्रियों को इनका लाभ मिल सके।

*क्षेत्रीय रेलवे द्वारा की गई उल्लेखनीय पहल

रेलवे ने नवोन्मेषी विचारों और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के ज़रिए से यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और गैर-किराया राजस्व (एनएफआर) को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं।

इसके तहत की गई कुछ उल्लेखनीय पहलों में शामिल हैं: बहुस्तरीय कार पार्किंग, चिकित्सा देखभाल केंद्र, नर्सिंग पॉड, वैगन सफाई अनुबंध, सशुल्क सेवा के रूप में ई-व्हीलचेयर की सुविधा, स्वास्थ्य कियोस्क, गेमिंग जोन, प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन, प्लेटफॉर्म ब्रांडिंग, यात्री सुविधा और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए खाली जगह का उपयोग आदि।

पश्चिमी रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रीमियम को-वर्किंग स्पेस/डिजिटल लाउंज की एक नई पहल की है। इसमें हाई-स्पीड वाई-फाई, वर्कस्टेशन, चार्जिंग पॉइंट, कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं और आरामदायक बैठने की व्यवस्था उपलब्ध है। अतिरिक्त सेवाओं में प्रिंटिंग, स्कैनिंग, जलपान और अन्य उपयोग संबंधी योजनाएं जैसे घंटे के हिसाब से वर्कस्पेस का उपयोग और बंडल पैकेज शामिल हैं। यह पहल रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक, आरामदायक और उत्पादक प्रतीक्षा अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह के बेहतर विचारों को अन्य रेलवे में भी लागू करने के लिए अन्य क्षेत्रीय रेलवे को ज़रुरी निर्देश दिए गए हैं।