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पुरखौती विरासत यात्रा: तालाबों की नगरी धमधा पहुंची दुर्ग भिलाई इंटैक की टीम

   भिलाई . असल बात news.   भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट दुर्ग भिलाई अध्याय के सदस्य पुरखौती विरासत भ्रमण में शामिल हुए।...

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भिलाई .
असल बात news.  

भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट दुर्ग भिलाई अध्याय के सदस्य पुरखौती विरासत भ्रमण में शामिल हुए। विरासत यात्रा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो एसके पाण्डे, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एसके पाटिल एवं पूर्व सदस्य सचिव राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्रो. डीएन शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुआ। धमधा में यह आयोजन धर्मधाम गौरव गाधा समिति के संयोजक गोविन्द पटेल के सौजन्य से सम्पन्न हुआ। 

धमधागढ़ पुरखौती यात्रा एक आनंददायक ऐतिहासिक सार्थक उद्देश्य से भरी हुई यात्रा थी l  यात्रा में धमधा के ऐतिहासिक स्थलों को, धार्मिक सरोकारों से जुड़े ऐतिहासिक मंदिर त्रिमूर्ति महामाया , प्राचीन ऐतिहासिक शिव मंदिर ,कबीर चौरा, राजा किला, एवं सबसे आल्हाद से भर देने वाली तालाबों से जुड़े हुए सुधार कार्य जिसमें उन्होंने कई तालाबों को नवजीवन दिया । छोटी गलियों में सहेजी पुरानी परंपरागत बनावट,  100 वर्षों से पुराने मकान वहां के एक अलहदा व्यवसाय कांसे  का बर्तन  निर्माण देखते रहे। अद्भुत कार्य कौशल जैसे ताम्रकार जी के द्वारा बनाई गई मिटटी की मूर्तिया और पीढ़ी दर पीढ़ी कांसा  उद्योग एवं लेखो का संभाला गया इतिहास में जीवंत विरासत देखने को मिला l 

गोविन्द पटेल ने बताया कि धमधा एक प्राचीन नगरी है जहां इतिहास के कई साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। राजा सांड विजय ने इस नगरी को बसाया। सुरक्षा के लिए यहां राजमहल (अब खंडहर) के चारों तरफ चक्रवार तालाबों की खुदाई की गई थी। इन तालाबों के कारण धमधा को छह आगर छह कोरी (एक सौ छब्बीस)  तालाबों के नाम से प्रसिद्धि मिली। पर आज इनमें से बमुश्किल दो दर्जन तालाब ही शेष हैं। गौरव गाथा समिति तालाबों के पुनरुद्धार में जुटी है। पिछले कुछ वर्षों में समिति के सदस्यों ने श्रम एवं अंशदान से छह तालाबों का जीर्णोद्धार किया है। 

भ्रमण के दौरान दल ने पंडितवा तालाब, कबीर मठ, दानी तालाब ताम्रपत्र, चारगोडिय़ा मंदिर, टार तालाब, प्राचीन वृद्धेश्वर शिवलिंग, भानपुर, महामाया मंदिर, बूढ़ादेव, राजा किला, राज्य संरक्षित स्मारक चौखडिय़ा तालाब, शीतला मंदिर, अशोक कसार का कांसा उद्योग, रामलीला चौक, विष्णु प्रसाद ताम्रकार की अनूठी मूर्तिकला, पठऊवा शैली में निर्मित विमलचंद ताम्रकार का सौ साल पुराना घर भी देखा। सामान्यतः तालाब गोलाकार होते है किन्तु धमधा का यह तालाब चौकोर आकार में बने होने के कारण चौखडिय़ा तालाब के नाम से प्रसिध है इसी तरह यहाँ का एक मंदिर चार स्तंभों के उपर बना है इस लिए इसे चारगोडिय़ा मंदिर कहते है l 

धमधा के छह आगर, छह कोरी तालाबों का इतिहास देखने के बाद इन्टेक दल विष्णु ताम्रकार के निवास पर मिट्टी के जीवंत कला को देखने उनके घर गए l धमधा के अवकाश प्राप्त शिक्षक विष्णु प्रसाद ताम्रकार के घर का प्रथम तल एक संग्राहलय है। यहां देश के कई प्रमुख महानुभावों की मूर्तियां तो हैं ही, साथ ही है फल और सब्जियों के रैक। एकदम असली जैसे दिखने वाले ये फल और सब्जियां मिट्टी की बनी हैं जिन्हें बड़ी खूबसूरती से रंगा गया है। दीवारों पर मिट्टी से खेलते बच्चों की तस्वीरें भी सजी हुई हैं।

विष्णु ताम्रकार का कहना है कि वो बचपन से ही मूर्ति बनाने का शौक रखते हैं। उसके बाद उनकी नौकरी लग गई। नौकरी के दौरान उन्हें मूर्ति बनाने का समय नहीं मिल पाता था लेकिन अब रिटायरमेंट के बाद भरपूर समय मिलता है। इस समय का इस्तेमाल वो अपने हुनर को आकार देने में लगाते हैं। इसमें फल, पक्षी और राजनेताओं की मूर्तियां शामिल हैं। वे चाहते हैं कि सरकार मूर्ति कला को प्रोत्साहित करे और धमधा में म्यूजियम बनवाएं। पुरखोती यात्रा के दौरान सदस्यों ने श्री अशोक कसार के घर में संचालित कांसा उद्योग (लगभग एक सौ पचास वर्ष से संचालित) कांसा उद्योग के प्रत्येक प्रक्रिया को बारीकी से देखा एवं दानी तालाब के मध्य में स्थित स्तम्भ में स्वत 1881  में मुद्रित शिलालेख को देख कर अचंभित हुए l  

इन्टेक दुर्ग भिलाई अध्याय से प्रो. डीएन शर्मा एवं श्री रवि श्रीवास्तव एवं विद्या गुप्ता, शानू मोहनन, इंटैक दुर्ग-भिलाई की संयोजक डॉ हंसा शुक्ला, फोटोग्राफर कांति भाई सोलंकी, डॉ प्रज्ञा सिंह, डॉ संध्या मदन मोहन, कमलेश चंद्राकर, चित्रकार डॉ महेश चतुर्वेदी, दीपक रंजन दास, डॉ अलका दास. जगमोहन सिन्हा, आदि सम्मिलित हुए।  

इस विरासत यात्रा के पश्चात् धमधा के एतिहासिक, पुरातात्विक तथ्यों को बारीकी से जानने के  लिए धर्मधाम गौरव गाथा समिति के सदस्यों द्वारा संगोष्टी का आयोजन किया l इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. पाटिल ने कहा कि आपसी सहयोग से यहां के युवाओं ने धमधा के अमूल्य विरासत के संरक्षण के लिए जो किया वह सराहनीय है। पर यदि बड़े पैमाने पर इस कार्य को करना है तो इसके लिए वैज्ञानिक ढंग से प्रस्ताव तैयार करना होगा। इसमें आने वाले पांच साल की कार्ययोजना तैयार करनी होगी तथा एक प्राक्कलन तैयार करना होगा।  

प्रो. पाण्डेय ने गोविन्द पटेल एवं उनके साथियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि हमें विरासत में बहुत कुछ मिला। हमें इस पर चिंतन और काम करने की जरूरत है कि हम आने वाली पीढिय़ों के लिए कैसी विरासत छोड़ कर जा रहे हैं अतः विरासत को सहेजने के लिए हम सबको सामूहिक प्रयास करना होगा l इन्टेक दुर्ग भिलाई अध्याय की संयोजिका हंसा शुक्ल ने कहा की सदस्यों को इस यात्रा से धमधा के गुमनाम एहेतिहसिक स्थलो की जानकारी प्राप्त हुई पुरखोती विरासत यात्रा सफलता पूर्वक संपन हुई धमधा के समृध विरासत की जानकारी श्री गोविन्द पटेल एवं उनके साथियों द्वारा दी गई इसलिए इस विरासत यात्रा से सभी सदस्य धमधा के तालाबो, किला या उद्योग के सम्बन्ध में सटीक जानकारी कर सके l धर्मधाम गौरव गाधा समिति, धमधा के साथ मिलकर इन्टेक दुर्ग भिलाई अध्याय धमधा के समृद्ध एतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में सहयोग देगा l