Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

Automatic Slideshow


टोल जांच में सामने आया स्पंज आयरन चोरी का खेल, फर्जी बिलों के सहारे करोड़ों का अवैध मिनरल व्यापार, तीन गिरफ्तार

  महासमुंद। टोल जांच के दौरान दो ट्रकों की तलाशी में करोड़ों रुपये के अवैध मिनरल ट्रेड का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हु...

Also Read

 महासमुंद। टोल जांच के दौरान दो ट्रकों की तलाशी में करोड़ों रुपये के अवैध मिनरल ट्रेड का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि हाईवे पर चल रहे ट्रकों से स्पंज आयरन चोरी कर उसे फर्जी बिल के सहारे अलग-अलग कंपनियों में खपाया जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क का कारोबार 106 करोड़ रुपये से अधिक का होने का अंदेशा है।

पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई कंपनियां और अन्य आरोपी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। मामले में करोड़ों रुपये के हवाला लेन-देन के भी सबूत मिलने की बात सामने आई है।



टोल जांच में पकड़े गए ट्रक

25 फरवरी 2026 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ट्रक क्रमांक CG 04 JC 4585 और CG 07 AV 5290 के जरिए अवैध रूप से स्पंज आयरन का परिवहन किया जा रहा है। सूचना की तस्दीक पर पुलिस ने दोनों ट्रकों को रोककर ड्राइवर सोनूलाल मोंगरे और रामेश्वर मानिकपुरी से दस्तावेज मांगे। ड्राइवरों द्वारा स्पंज आयरन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर पुलिस ने माल को धारा 106 बीएनएसएस के तहत जब्त कर लिया।


फर्जी बिल से होता था कारोबार

आगे की जांच में पता चला कि आरोपी रंजीत सिंह (45) निवासी लोहराचट्टी, थाना सोहेला, जिला बरगढ़ (ओडिशा) चोरी किए गए स्पंज आयरन को अवैध रूप से भंडारित कर कूट रचित बिलों के जरिए उसका परिवहन कराता था। इस मामले में पुलिस ने सोनूलाल मोंगरे, रामेश्वर मानिकपुरी और रंजीत सिंह को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ धारा 318(4), 316(4), 317(2), 336(2), 338, 340, 3(5) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया।


रायगढ़ की इस्पात कंपनी का नाम आया सामने

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि रायगढ़ की एक इस्पात कंपनी के संचालक तारक घोष और उनके सहयोगियों द्वारा फर्जी बिल उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस ने जांच के दौरान गढ़उमरिया, पुसौर (रायगढ़) स्थित इस्पात फर्म में जांच की, जहां फर्म संचालक की संलिप्तता पाए जाने पर तारक घोष (56) को 8 मार्च 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया।


कामगारों के नाम पर बनाई गई थी फर्जी कंपनियां

जांच में यह भी सामने आया कि मासिक वेतन पर काम करने वाले तीन कर्मचारियों के नाम पर सेल कंपनियां बनाकर फर्जी इनवॉइसिंग के जरिए यह पूरा खेल चलाया जा रहा था। बड़ी कंपनियों के नाम से बिल तैयार किए जाते थे, जबकि वास्तविक खनिज चोरी और अवैध भंडारण के जरिए जुटाया जाता था।


हवाला लेन-देन के भी मिले संकेत, जांच के दायरे में कई कंपनियां

पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में करोड़ों रुपये का हवाला लेन-देन भी किया जाता था। जांच में अब तक जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर कारोबार का आकार 106 करोड़ रुपये से अधिक का पाया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच के लिए स्पेशल टीम गठित की गई है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। जांच आगे बढ़ने पर कई अन्य कंपनियां और नए आरोपी भी सामने आ सकते हैं।