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इस बार भी हम सब मिलकर के इस कठिन हालत से बहुत ही अच्छी तरह बाहर निकल जाएंगे - प्रधानमंत्री श्री मोदी

  नई दिल्ली. असल बात news.   मन की बात की 132वीं कड़ी में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वेस्ट एशिया संकट और कोरोना संकट के बारे मे...

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नई दिल्ली.

असल बात news.  

मन की बात की 132वीं कड़ी में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वेस्ट एशिया संकट और कोरोना संकट के बारे में भी बातें की तथा विश्वास व्यक्त किया कि हम इस संकट में भी जीत हासिल कर लेंगे और उन्होंने देश की आम जनता को आव्हान किया कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती से बाहर निकलना है। जो लोग इस विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं, उन्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए.उन्होंने ज्ञान भारतम सर्वे, जिसका संबंध हमारी महान संस्कृति और समृद्ध विरासत से है का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद manuscripts यानि पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है। आपके पास अगर कोई manuscript है, पांडुलिपि है, या उसके बारे में जानकारी है, तो उसकी फोटो ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर जरूर साझा करें। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने मन की बात में,छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के एक गांव का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के किसानों ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली idea पर काम किया।इन किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे recharge तालाब और सोखता गड्ढे बनाएँ जिससे बारिश का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे वह जमीन के अंदर जाने लगा। आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस model को अपना चुके हैं और गाँव का ground water level बहुत बेहतर हो गया है। 

मन की बात की 132वीं कड़ी में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने  सम्बोधन की शुरुआत में वेस्ट एशिया संघर्ष के बारे में बात करते हुए कहा कि मार्च का ये महीना, वैश्विक स्तर पर बहुत ही हलचल भरा रहा है। हम सबको याद है कि पूरा विश्व भूतकाल में कोविड के कारण एक लंबे समय तक अनेक समस्याओं से गुजरा था। हम सभी की अपेक्षा थी कि कोरोना के संकट से निकलने के बाद  दुनिया नए सिरे से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगी। लेकिन, दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियाँ बनती चली गईं। वर्तमान में हमारे पड़ोस में एक माह से भीषण युद्ध चल रहा है। जिस क्षेत्र में अभी युद्ध चल रहा है, वह क्षेत्र हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा केंद्र है। इसकी वजह से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल को लेकर संकट की स्थिति बनती जा रही है। हमारे वैश्विक संबंध, अलग-अलग देशों से मिल रहा सहयोग और पिछले एक दशक में देश का जो सामर्थ्य बना है, इनकी वजह से भारत इन परिस्थितियों का डटकर मुकाबला कर रहा है।

उन्होंने सभी देशवासियों से फिर यह आग्रह किया कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती से बाहर निकलना है। जो लोग इस विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं, उन्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह देश के 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा विषय है, इसमें स्वार्थ भरी राजनीति का कोई स्थान नहीं है। ऐसे में जो भी लोग अफवाह फैला रहे हैं, वे देश का बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं। मैं सभी देशवासियों से अपील भी करूंगा कि वो जागरूक रहें, अफवाहों के बहकावे में ना आएं। सरकार की तरफ से जो आपको निरंतर जानकारी दी जा रही है, उस पर भरोसा करें और उसी पर विश्वास करके कोई कदम उठाएं। मुझे हर बार की तरह इस बार भी विश्वास है कि जैसे हमने देश के 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से पुराने संकटों को हराया था, इस बार भी हम सब मिलकर के इस कठिन हालत से बहुत ही अच्छी तरह बाहर निकल जाएंगे।

 उन्होंने  ‘मन की बात’ में  ज्ञान भारतम सर्वे, जिसका संबंध हमारी महान संस्कृति और समृद्ध विरासत से है के बारे में बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद manuscripts यानि पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है।  इस सर्वे से जुड़ने का एक माध्यम, ज्ञान भारतम ऐप है। आपके पास अगर कोई manuscript है, पांडुलिपि है, या उसके बारे में जानकारी है, तो उसकी फोटो ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर जरूर साझा करें। हर entry से जुड़ी जानकारी को दर्ज करने से पहले उसकी पुष्टि भी की जा रही है। मुझे इस बात की खुशी है कि अब तक हजारों manuscripts पांडुलिपि लोगों ने शेयर की हैं। उदाहरण के तौर पर अरुणाचल प्रदेश के नामसाई के चाओ नंतिसिन्ध लोकांग जी ने ताई लिपि में पांडुलिपियाँ साझा की हैं। अमृतसर के भाई अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपि शेयर की हैं। यह हमारी महान सिख परंपरा और पंजाबी भाषा से जुड़ी लिपि है। कुछ संस्थाओं ने palm leaf यानि ताड़ के पत्तों पर लिखी manuscripts दी हैं। राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय ने copper plates पर लिखी बहुत पुरानी पांडुलिपियाँ share की हैं। वहीं, लद्दाख की Hamis Monastery ने तिब्बती में बहुमूल्य पांडुलिपियों के बारे में जानकारी दी है। यहाँ पर मैंने कुछ ही उदाहरण दिए हैं। यह survey, जून के मध्य तक जारी रहने वाला है। आप सभी से मेरा आग्रह है कि अपनी संस्कृति से जुड़े पहलुओं को सामने लाएं और share करें।


भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। देश के युवा की ताकत जब राष्ट्र निर्माण में जुड़ती है, तो बहुत बड़ी मदद मिलती है। राष्ट्र निर्माण के इस दायित्व को निभाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है, मेरा युवा भारत यानि MY Bharat संगठन। ये संगठन देश के युवाओं को अलग – अलग positive गतिविधियों से जोड़ रहा है। हाल ही में MY Bharat द्वारा Budget Quest का आयोजन किया गया। इसका मकसद था देशभर के युवाओं को budget प्रक्रिया और नीति निर्माण से जोड़ना। इससे जुड़ी quiz में देशभर से करीब 12 लाख युवाओं ने हिस्सा लिया। Quiz के बाद करीब एक लाख साठ हजार प्रतिभागियों को निबंध प्रतियोगिता के लिए चुना गया। मुझे इनमें से कुछ निबंध पढ़ने का अवसर भी मिला। इनसे पता चलता है कि मेरे युवा साथी देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए कितना तत्पर हैं। तेलंगाना के सूर्यापेट से कोटला रघुवीर रेड्डी, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से सौरभ बैसवार और बिहार के गोपालगंज से सुमित कुमार ने किसान कल्याण से जुड़े topic पर लिखा है । पंजाब के मोहाली से आंचल और ओडिशा के केंद्रपाड़ा से ओम प्रकाश रथ ने, women – led development को आगे बढ़ाने के तरीकों पर अपने विचार प्रकट किए हैं।

हरियाणा के यमुनानगर से प्रथम बरार ने लिखा है कि Green और Clean Bharat ही समृद्ध भारत का मार्ग है । इससे उनकी गहरी सोच का पता चलता है । दिल्ली के शंख गुप्ता का सुझाव है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए और अधिक प्रयास होने चाहिए।

हमारे युवा साथियों ने skill development और ease of doing business पर भी अपने विचार साझा किए हैं। मैं उन सभी युवाओं की सराहना करता हूं, जो अपने ideas share कर रहे हैं। ये विचार देश को आगे ले जाने में बहुत अहम हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी में आगे कहा कि देशभर के cricket fans के लिए यह महीना जोश और उत्साह से भर देने वाला रहा है। जब भारत ने T20 World Cup में ऐतिहासिक जीत दर्ज की तो देश में हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। अपनी team की इस शानदार सफलता पर हम सभी को बहुत गर्व है। पिछले महीने के आखिर में कर्नाटक के हुबली में एक बहुत ही रोचक मुकाबला देखने को मिला, इस मुकाबले को जीतकर जम्मू-कश्मीर की cricket team ने रणजी trophy को अपने नाम कर लिया। सबसे खुशी की बात है कि करीब 7 दशकों के लंबे इंतजार के बाद इस team ने अपना पहला रणजी खिताब हासिल किया। यह अभूतपूर्व सफलता खिलाड़ियों के कई बरसों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। टीम के कप्तान पारस डोगरा ने अद्भुत कौशल दिखाया। अपने नेतृत्व से इस जीत में उन्होंने अहम योगदान दिया। आज देश में कश्मीर के युवा गेंदबाज आकिब नबी के प्रदर्शन की भी चर्चा हो रही है, जिन्होंने रणजी सीजन में 60 विकेट लिए हैं। इस जीत से टीम के खिलाड़ी और coaching staff के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के लोग बहुत रोमांचित हैं। Cricket के मैदान में इस शानदार प्रदर्शन के बाद वहां के युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह और बढ़ गया है। आने वाले समय में यह कई युवाओं को sports को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। जम्मू-कश्मीर के लोगों में खेलों को लेकर गजब का जज्बा रहा है। मुझे खुशी है कि अब यह बड़े खेल आयोजनों का हब भी बनता जा रहा है। Khelo India Winter Games के लिए गुलमर्ग तो पहले ही अपनी पहचान बना चुका है। Football जैसे sports भी यहां के युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। मुझे आशा है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों की जीत का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

उन्होंने कहा,मैं अक्सर कहता हूं, जो खेलेगा, वो खिलेगा। मुझे ये देखकर अच्छा लगा कि हमारे देश के युवा, अब उन खेलों को भी खूब अपना रहे हैं, जो पहले उतने लोकप्रिय नहीं थे। उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली Athlete गुलवीर सिंह ने ऐसे ही एक खेल में कमाल कर दिखाया है। उन्होंने कुछ ही हफ्ते पहले New York City Half Marathon में तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रच डाला। वे एक घंटे से कम समय में Half Marathon पूरा करने वाले पहले भारतीय Athlete बने। Squash खिलाड़ी बेटी अनाहत सिंह ने Squash on Fire Open का बड़ा अंतर्राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया। सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्होंने ये सफलता हासिल की। इसके साथ ही वे PSA World Ranking में Top-20 में जगह बनाने वाली सबसे कम उम्र की एशियाई महिला खिलाड़ी बन गई हैं। मुझे अस्मिता Athletics League की जानकारी भी मिली है। इसमें 8 मार्च को महिला दिवस के अवसर पर कई sporting events का शानदार आयोजन किया गया। League में करीब 02 लाख बेटियों ने भागीदारी की। ये देखकर अच्छा लगता है कि भारत की नारीशक्ति देश में हो रहे इस sporting transformation में अहम भूमिका निभा रही है।

 उन्होंने कहा कि आप सभी अपनी fitness पर जरूर ध्यान दें। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में अब 100 दिनों से भी कम समय बचा है, पूरी दुनिया में योग के प्रति आकर्षण भी लगातार बढ़ रहा है। अफ्रीका के जिबूती में अल्मिस जी अपने अरविंद योग सेंटर के जरिए योग को बढ़ावा दे रहे हैं। वे यहां की कई और जगहों पर भी लोगों को योग सिखाते हैं। आपमें से कई लोगों ने Instagram Content Creator युवराज दुआ की post पर मेरे से reply को लेकर comments किए हैं। उन्होंने मुझसे आग्रह किया था कि मैं उनके पिता से कहूं कि वे sugar intake कम करें। मुझे खुशी है कि मेरे अनुरोध का उनके पिता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि आप भी sugar intake को कम करें और जैसा मैंने पहले भी कहा है, हमें खाने के तेल में 10 प्रतिशत की कटौती भी करनी है। इन छोटे-छोटे प्रयासों से आप मोटापे और lifestyle से जुड़ी बीमारियों से दूर रहेंगे।

एक पुरानी कहावत है ‘करत करत अभ्यास के, जड़मत होत सुजान’ यानी हम जब निरंतर अभ्यास करते हैं तो उतनी ही ज्यादा बुद्धिमता हासिल करते जाते हैं। लोग भी सबसे बेहतर तब सीखते हैं जब उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। मुझे बेंगलुरु में शिक्षा से जुड़े एक unique प्रयास के बारे में जानकारी मिली है। यहां एक टीम Prayog Institute of Education Research चला रही है। इस टीम का Research Projects पर विशेष focus है। यह टीम school level पर science education को लोकप्रिय बनाने में जुटी है। उन्होंने ‘अन्वेषण’ नाम का एक प्रयोग किया है, इसके जरिए 9वीं से 12वीं class तक के students को Chemistry, Earth Science और Wellness जैसे क्षेत्रों में Innovation करने का मौका मिलता है - इससे Students  को research का बहुत अच्छा अनुभव हासिल होता है साथ ही अपने Projects को publish करने का platform भी मिलता है।


परीक्षा पर चर्चा के दौरान कुछ Students ने मुझे बताया था कि वह science पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन उन्हें इससे डर भी लगता है। इस दिशा में Prayog की टीम का प्रयास बहुत ही सराहनीय है, यह पहल, Students को science के साथ जुडने और Practically कुछ करके दिखाने का मौका देती है। जब हम किसी चीज को खुद करके देखते हैं - जिज्ञासा और रुचि पैदा होती है। कौन जानता है कि मेरे इन युवा साथियों में ही कोई आने वाले समय का बेहतरीन scientist हो।


शिक्षा के माध्यम से अतीत को संरक्षित करने और भविष्य को तैयार करने का एक प्रयास नागा समुदाय भी कर रहा है। इस समुदाय के लोग अपनी आदिवासी परंपराओं का बहुत सम्मान करते हैं। वो इस पर गर्व तो करते ही हैं साथ ही अपनी approach को आधुनिक भी रखते हैं। Naga tribes में मोरूंग लर्निंग की एक पारंपरिक व्यवस्था थी, इसमें, बुजुर्ग लोग अपने अनुभवों से युवाओं को पारंपरिक ज्ञान, इतिहास और life skills  के बारे में बताते थे। समय के साथ यह system अब मोरूंग concept of education में बदल गया है। इसके माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जाती है। इसमें समुदाय के बुजुर्ग उन्हें कहानियाँ, लोकगीत और पारंपरिक खेलों के साथ life skills सिखाते हैं। इस तरह हमारा नागालैंड अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए, बच्चों की शिक्षा को आगे ले जा रहा है। आपको भी अपने क्षेत्र में ऐसे प्रयासो के बारे में पता चले, तो मुझे जरूर share कीजिएगा। 

ग्रीष्म काल की शुरुआत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है यानि ये समय जल संरक्षण के अपने संकल्प को फिर से दोहराने का है। पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों को बहुत जागरूक बनाया है। इस अभियान के तहत देश-भर में करीब 50 लाख Artificial Water Harvesting Structure बनाए गए हैं। मुझे ये देखकर अच्छा लगता है कि अब जल संकट से निपटने के लिए गाँव-गाँव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं। कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, कहीं बरसात के जल को सहेजने के लिए प्रयास किया जा रहा हैं। अमृत सरोवर अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं। बारिश का मौसम आने से पहले इन सरोवरों की साफ-सफाई भी शुरू हो गई है। आज मैं आपसे कुछ प्रेरक उदाहरण भी साझा करना चाहता हूँ। ये उदाहरण बताते हैं कि जनभागीदारी से जल संरक्षण का काम कितना व्यापक हो जाता है।

त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में बसा वांगमुन गाँव 3000  फीट की ऊंचाई पर बसा है। ये गाँव पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा था। गर्मियों के दिनों में गाँव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। आखिरकार गाँव के लोगों ने बारिश की हर बूंद को सहेजने का निर्णय किया। आज वांगमुन गाँव के लगभग हर घर में Rooftop Rainwater Harvesting System स्थापित हो गया है। जो गाँव कभी पानी की कमी से जूझ रहा था, वो जल संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के एक उपलब्धि के बारे में बोलते हुए कहा कि इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी एक अनोखी पहल देखने को मिली। यहां के किसानों ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली idea पर काम किया। यहां के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे recharge तालाब और सोखता गड्ढे बनाएँ जिससे बारिश का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे वह जमीन के अंदर जाने लगा। आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस model को अपना चुके हैं और गाँव का ground water level बहुत बेहतर हो गया है। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गाँव में भी लोगों ने मिलकर पानी की समस्या दूर की है। गाँव के 400 परिवारों ने अपने घरों में soak pit बनाया और water conservation का जन-आंदोलन बना दिया। इससे गाँव का ground water level बेहतर हुआ है, साथ ही प्रदूषित पानी की वजह से होने वाली बीमारियाँ बहुत कम हो गई हैं।

हमारे मछुआरे भाई-बहन सिर्फ समुद्र के योद्धा नहीं हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर भारत की एक मजबूत नींव भी हैं। वे सुबह होने से पहले समन्दर की लहरों से जूझते हुए, अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुट जाते हैं। ऐसे मेहनतकश मछुआरों का जीवन आज कई तरह से आसान बनाया जा रहा है। चाहे बंदरगाहों का विकास हो या मछुआरों के लिए बीमा, ऐसी कई पहल उनके बहुत काम आ रही है। हम जानते हैं कि समन्दर में उनकी गतिविधियों को मौसम का रुख बहुत प्रभावित करता है। इसे देखते हुए Technology के जरिए भी उनकी पूरी मदद की जा रही है। मुझे बेहद खुशी है कि ऐसे प्रयासों से हमारा fisheries sector न केवल समृद्ध हो रहा है, बल्कि कुछ नया करने का जज्बा भी भर रहा है।  आज fisheries और seaweed के क्षेत्र में नए-नए innovation हो रहे हैं, और हमारे मछुआरे भाई-बहन आत्मनिर्भर बन रहे हैं। ओडिशा के सम्बलपुर की सुजाता भूयान जी एक गृहणी थीं, लेकिन वो कुछ नया करके अपने परिवार की और मदद करना चाहती थीं। इसलिए कुछ वर्ष पहले उन्होंने हीराकुंड reservoir में Fish-Farming शुरू की। शुरुआती  दिन उनके लिए आसान नहीं थे। मौसम में होने वाले बदलाव, मछलियों के खाने का प्रबंध और घर की जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाने जैसी कई चुनौतियाँ थीं, लेकिन उनका हौसला अडिग था। केवल दो-तीन वर्ष के भीतर उन्होंने अपने प्रयास को एक फलते-फूलते business में बदल दिया। आज उनकी सफलता समुदाय की महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई

लक्षद्वीप में मिनीकॉय के हाव्वा गुलजार जी की कहानी हमारी माताओं-बहनों की अद्भुत संकल्प-शक्ति को सामने लाती है। दरअसल वे एक Fish Processing Unit चलाती थीं। लेकिन उन्हें लगा कि उनके पास एक अच्छा Cold Storage हो तो वे और बेहतर कर सकती हैं,  इसलिए, उन्होंने Cold Storage Unit लगाने का फैसला किया। आज यही उनकी ताकत बन चुका है। अब वे बेहतर Planning के साथ कारोबार कर पा रही हैं।

देश में आज हर तरफ ऐसे प्रयास हो रहे हैं, जो प्रेरित करने वाले हैं। बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुना। इसके लिए उन्होंने एक Pond Farm बनाया। इस कारोबार के लिए उन्हें training भी मिली। अब अपने Pond से मछलियों की बिक्री कर वे अच्छी कमाई कर रहे हैं। वहीं Seaweed की मांग को देखते हुए कई लोगों ने Seaweed Cultivation को भी अपनाया है। इसका उन्हें बड़ा लाभ भी हो रहा है। मैं एक बार फिर Fisheries Sector से जुड़े सभी लोगों की सराहना करता हूं। हमारी Economy को सशक्त बनाने के लिए उनका प्रयास बेहद प्रशंसनीय है।

जब समाज खुद आगे आता है, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव बन जाते हैं। हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं, जो हमें यही सिखाते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक प्रेरक प्रयास देखने को मिला। वहाँ एक ही घंटे में 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधे लगाए गए और एक नया Guinness World Record बना। इस प्रयास की सबसे खास बात ये रही कि इसमें हजारों लोग एक साथ जुड़े। छात्र, जवान, स्वयंसेवी संगठन, अलग-अलग संस्थाएं, सबने मिलकर इस काम को संभव बनाया। जनभागीदारी का यही स्वरूप ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के दौरान भी दिखता है। इस अभियान के तहत देशभर में करोड़ों पेड़ लगाए गए हैं।

 उन्होंने बताया कि नागालैंड के चिजामी गाँव से भी एक बहुत प्रेरक प्रयास सामने आया है। चिजामी गाँव की महिलाएं मिलकर 150 से अधिक variety के पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रख रही हैं। इन बीजों को एक community seed bank में संरक्षित किया जा रहा है, जिसे गाँव की महिलाएं ही चलाती हैं। इनमें चावल, बाजरा, मक्का, दालें, सब्जियाँ और कई तरह की जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं। यह एक ऐसा प्रयास है, जिसमें ज्ञान भी सुरक्षित है, परंपरा भी जीवित है और आने वाली पीढ़ियों के लिये एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है।


आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब ऐसे प्रयास हमें यह बताते हैं कि समाधान हमेशा कहीं दूर नहीं होता। कई बार हमारे अपने पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रयास ही हमें सबसे मजबूत रास्ता दिखाते हैं।

आज आप देश के किसी छोटे-बड़े शहर में जाएंगे तो एक बदलाव आप जरूर notice करेंगे। आपको बड़ी संख्या में घरों की छत पर solar panel लगे हुए दिखाई देंगे। कुछ साल पहले तक ये इक्का-दुक्का घरों पर ही दिखता था। लेकिन आज ‘पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ का प्रभाव देश के कोने-कोने में दिखने लगा है। इस योजना की वजह से, गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की पायल मुंजपारा के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने सूर्य पहल के माध्यम से solar power technology की training ली और 4 महीने का Solar PV technician का course पूरा किया। अब वो एक कुशल solar technician बन गई हैं। पायल एक सोलर उद्यमी के तौर पर अपनी पहचान बना रही हैं। वो आस-पास के जिलों में solar rooftop installation का काम करती हैं और इससे उन्हें हर महीने हजारों रुपए की आय होती है।

मेरठ के अरुण कुमार भी अब अपने इलाके में ऊर्जा दाता बन गए हैं। हाल ही में, दिल्ली में हुए कार्यक्रम में अरुण कुमार ने हिस्सा लिया था और अपने अनुभव साझा किये थे। उन्होंने बताया था कि वो न केवल बिजली बिल की बचत कर रहे हैं, बल्कि अपनी अतिरिक्त बिजली बेच भी रहे हैं।

जयपुर के मुरलीधर जी की सफलता भी कुछ ऐसी ही है। पहले उनकी खेती डीजल पंप पर निर्भर थी, जिसमें हर साल हजारों रुपए खर्च होते थे। जब उन्होंने solar pump अपनाया, तो उनकी खेती का तरीका ही बदल गया। अब उन्हें ईंधन की चिंता नहीं रहती, सिंचाई समय पर होती है, और उनकी सालाना आय भी बढ़ गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि अब उनका परिवार साफ ऊर्जा के साथ, बेहतर जीवन जी रहा है।

‘पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ का फायदा North East के इलाकों में भी मिल रहा है। त्रिपुरा में रियांग जनजाति के कई गाँव ऐसे थे, जहाँ बिजली की समस्या थी। अब solar mini-grid के माध्यम से वहाँ के घरों में रोशनी रहती है। वहाँ बच्चे अब शाम के बाद भी पढ़ पा रहे हैं। लोग mobile charge कर पा रहे हैं और गाँव का सामाजिक जीवन भी बदल गया है।

 प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सभी से सोलर ऊर्जा को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि देश में solar ऊर्जा क्रांति के ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं। आप भी इस क्रांति से जुड़िये और दूसरों को भी जोड़िये.

‘मन की बात’ के लिए मुझे हर महीने देश के अलग–अलग हिस्सों से ढ़ेरों संदेश मिलते हैं। इन संदेशों से ये भी पता चलता है कि दूर–दराज के क्षेत्रों में बैठे लोग कितने चाव से इस कार्यक्रम को सुनते हैं। जब मैं आपके सुझाव पढ़ता हूँ, तो मुझे लगता है कि ये सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, ये हम सबका एक साझा संवाद बन गया है। आपके विचार, आपके अनुभव, इस कार्यक्रम को लगातार बेहतर बनाने की प्रेरणा देते हैं। आप अपने आसपास की प्रेरक गाथाएं यूं ही साझा करते रहिए। हो सकता है, आपकी एक छोटी सी कोशिश, किसी और के जीवन में बड़ा बदलाव ले आए, किसी को आगे बढ़ने का नया हौसला दे दे - यही तो रेडियो की असली ताकत है। ये देश के अलग–अलग कोने में बैठे लोगों का एक विचार, एक भावना और एक उद्देश्य जोड़ देता है। अगले महीने फिर मिलेंगे, कुछ नए प्रेरक व्यक्तित्वों के साथ, कुछ ऐसे प्रयासों के साथ, जो हमें आगे बढ़ने की नई ऊर्जा देंगे। तब तक, आप अपना और अपने परिवार का ध्यान रखें - स्वस्थ रहें, खुश रहें।