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बसों की छत पर लदा ‘मौत का सामान’! ओवरलोड लगेज से यात्रियों की जान खतरे में, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

  सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में जनहित से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आ रहा है, जहां यात्री बसों में क्षमता से अधिक लगेज भरकर खुलेआम परिवहन किया ...

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 सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में जनहित से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आ रहा है, जहां यात्री बसों में क्षमता से अधिक लगेज भरकर खुलेआम परिवहन किया जा रहा है. हालत यह है कि बसों की छत तक भारी सामान लाद दिया जाता है, जिससे न केवल वाहन का संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी सीधे तौर पर प्रभावित होती है.


देखने में आ रहा है कि कई बसें दिनदहाड़े और रात्रि के समय भारी मात्रा में लगेज लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं. विशेष रूप से रात्रिकालीन बसों में नियमों की सबसे अधिक अनदेखी की जा रही है, जहां यात्रियों के साथ-साथ बसों की छत पर बड़े-बड़े पार्सल, बोरियां और भारी सामान भर दिया जाता है. इससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है.


वरिष्ठ अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता अनुरोध पटेल का कहना है कि ये बसें थाने के सामने से भी नियमित रूप से गुजरती हैं, इसके बावजूद ओवरलोड लगेज पर प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती. सवाल यह उठता है कि जब सब कुछ खुली नजर में हो रहा है तो जिम्मेदार विभागों द्वारा सख्ती क्यों नहीं की जा रही. परिवहन नियमों के अनुसार बसों में निर्धारित सीमा से अधिक सामान ले जाना सुरक्षा मानकों का उल्लंघन माना जाता है, फिर भी नियमों की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं.



वाहन मालिक व सीनियर वाहन चालक राजा खान के अनुसार छत पर अत्यधिक भार होने से बस का ब्रेकिंग सिस्टम, संतुलन और मोड़ पर नियंत्रण प्रभावित होता है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. वहीं अचानक ब्रेक या तेज रफ्तार में सामान गिरने की स्थिति में पीछे चल रहे वाहनों और राहगीरों के लिए भी खतरा उत्पन्न हो जाता है.

जनहित में नागरिकों ने शासन-प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि बसों में हो रही लगेज ओवरलोडिंग पर सख्त जांच अभियान चलाया जाए, दोषी बस संचालकों पर नियमानुसार कार्रवाई हो तथा यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए. यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसकी जवाबदेही सीधे तौर पर संबंधित विभागों पर ही आएगी.।