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नशीले पदार्थों के साथ दो आरोपी पकड़े गए… जंगल में नवजात शिशु बरामद… युवक से 7 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी… टैंकरों के सहारे हो रही जल आपूर्ति…

  बस्तर . बस्तर पुलिस की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब सड़क नहीं, सप्लाई चेन पर लड़ी जा रही है. एक स्थानीय विक्रेता तक...

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 बस्तर. बस्तर पुलिस की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब सड़क नहीं, सप्लाई चेन पर लड़ी जा रही है. एक स्थानीय विक्रेता तक सीमित दिखने वाला मामला अंतरराज्यीय नेटवर्क तक जा पहुंचा. मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने गंगामुंडा चौपाटी के पास दबिश देकर युवक को पकड़ा. तलाशी में बड़ी संख्या में प्रतिबंधित कैप्सूल बरामद हुए. पूछताछ में खुलासा हुआ कि दवाएं बाहर से लाई जा रही थीं. इसके बाद पुलिस की टीम सीधे सप्लायर तक पहुंची. उड़ीसा में मेडिकल स्टोर के पीछे छिपा अवैध स्टॉक उजागर हुआ. दो अलग-अलग जगहों से हजारों कैप्सूल जब्त किए गए. कुल जब्ती की कीमत लाखों में आंकी गई है. कार्रवाई से साफ है कि युवा वर्ग को निशाना बनाने वाले नेटवर्क सक्रिय थे. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस का कहना है कि आगे भी ऐसे नेटवर्क पर नजर रहेगी.


सुकमा – जंगल में तड़पता नवजात, इंसानियत बनी ढाल


सुकमा के एक गांव में आधी रात इंसानियत की परीक्षा हुई. जंगल से आती रोने की आवाज ने ग्रामीणों को चौंका दिया. अंधेरे और सूनसान इलाके में नवजात लावारिस पड़ा मिला. बिना देर किए गांव की महिलाएं और युवक मौके पर पहुंचे. बच्चे को सुरक्षित गांव लाया गया. सूचना मिलते ही जनप्रतिनिधि भी सक्रिय हुए. रात में ही एम्बुलेंस की व्यवस्था कराई गई. स्वास्थ्य अमले को तत्काल अलर्ट किया गया. खुले में पड़े रहने से शिशु को कीड़े-मकोड़ों ने काटा था. समय पर मदद न मिलती तो जान का खतरा था. जिला अस्पताल में इलाज शुरू किया गया. डॉक्टरों के मुताबिक हालत स्थिर है. ग्रामीणों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.


घर बैठे कमाई का सपना युवक को भारी पड़ गया. व्हाट्सऐप ग्रुप से शुरू हुआ संपर्क भरोसे में बदल गया. छोटे टास्क देकर पहले विश्वास जीता गया. फिर बड़े मुनाफे का लालच दिया गया. डिजिटल मार्केटिंग और निवेश का झांसा दिया गया. अलग-अलग किस्तों में पैसे डलवाए गए. जब रकम बढ़ी तो परेशानी शुरू हुई. पैसे निकालने पर नए चार्ज बताए गए. टैक्स और फीस के नाम पर और मांग हुई. धीरे-धीरे संपर्क टूट गया. कुल सात लाख से ज्यादा की ऑनलाइन ठगी हुई. पीड़ित ने थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.


बकावंड – आस्था से एकजुट गांव, श्रम से बना शिवधाम

एक छोटे से गांव में सामूहिक श्रम की मिसाल दिखी. ग्रामीणों ने मिलकर शिवालय को आकार दिया. कई दिनों की तैयारी के बाद प्राण प्रतिष्ठा हुई. वैदिक मंत्रों से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठा. महिलाओं ने भजन-कीर्तन से माहौल सजाया. युवाओं ने व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली. पूजा विधि-विधान से संपन्न कराई गई. ग्रामीणों ने सुख-समृद्धि की कामना की. मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया. आगामी महाशिवरात्रि की भी तैयारी शुरू हो गई है. रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण का संकल्प लिया गया. गांव ने परंपरा निभाने का भरोसा जताया. पूरे आयोजन में एकता साफ नजर आई.


जगदलपुर – गांजा तस्करी पर त्वरित कार्रवाई

नशे के खिलाफ अभियान में पुलिस को फिर सफलता मिली. शहर के एक इलाके में अवैध सौदे की सूचना मिली. घेराबंदी कर दो युवकों को पकड़ा गया. तलाशी में गांजा बरामद हुआ. अनुमानित कीमत हजारों में बताई गई. दोनों आरोपी अलग-अलग इलाकों के निवासी हैं. पूछताछ में बिक्री की तैयारी की बात सामने आई. पुलिस ने तत्काल जब्ती की कार्रवाई की. मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई. कार्रवाई से नशा कारोबारियों में हड़कंप है. पुलिस का कहना है अभियान जारी रहेगा. शहर में निगरानी और बढ़ाई जा रही है. युवाओं को नशे से दूर रखने की अपील भी की गई.



बस्तर – वजन त्योहार: आंकड़ों से हकीकत की तलाश

कुपोषण की सच्चाई जानने के लिए विशेष अभियान शुरू हुआ. आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का वजन और ऊंचाई नापी जा रही है. 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग पर खास फोकस है. हजारों बच्चों को अभियान में शामिल किया गया. अब तक कई बच्चे कुपोषित पाए गए हैं. अभिभावकों की भागीदारी भी बढ़ी है. सेल्फी जोन और गतिविधियों से रुचि जगाई जा रही है. अलग-अलग परियोजनाओं में लक्ष्य तय किए गए हैं. स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति दर्ज की जा रही है. अभियान कई दिनों तक चलेगा. उद्देश्य केवल आंकड़े नहीं, जागरूकता भी है. सुपोषण को लेकर संदेश दिया जा रहा है. आगे सुधार की रणनीति बनाई जाएगी.


जगदलपुर – टैंकरों के भरोसे जल आपूर्ति 

गर्मी आते ही शहर के कई वार्ड ड्राई जोन बन जाते हैं. भूमिगत जल स्तर गिरने से बोर जवाब दे रहे हैं. पानी की आपूर्ति टैंकरों पर टिकी है. लेकिन कई टैंकर खराब हालत में खड़े हैं. मेंटेनेंस की कमी साफ नजर आती है. वाहनों की संख्या जरूरत से कम है. कई वार्डों में समय पर पानी नहीं पहुंच पा रहा. कर्मचारी जुगाड़ से व्यवस्था चला रहे हैं. नए टैंकरों से थोड़ी राहत जरूर मिली है. लेकिन स्थायी समाधान अभी दूर है. लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. निगम प्रबंधन को जानकारी दी गई है. दावा है कि जल्द सुधार किया जाएगा.