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छत्तीसगढ़ी हाना : लोकज्ञान, भाषा और चित्रकला का सशक्त संगम,इंटैक दुर्ग–भिलाई अध्याय एवं स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय के हिंदी विभाग का संयुक्त आयोजन

  भिलाई . असल बात news.   छत्तीसगढ़ी हाना का हिंदी भावार्थ एवं संबंधित चित्र/तस्वीर निर्माण पर आधारित अंतर-महाविद्यालयीन प्रतियोगिता का आयोज...

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 भिलाई .

असल बात news.  

छत्तीसगढ़ी हाना का हिंदी भावार्थ एवं संबंधित चित्र/तस्वीर निर्माण पर आधारित अंतर-महाविद्यालयीन प्रतियोगिता का आयोजन स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर, हुडको, भिलाई में “इंटैक”दुर्ग–भिलाई अध्याय एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

इंटैक दुर्ग भिलाई अध्याय की संयोजिका डॉ हंसा शुक्ला ने अपने उद्बोधन में प्रतियोगिता उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा हाना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर एवं भाषा के समृद्धि का प्रतीक है विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ी भाषा की समृद्ध लोकपरंपरा, लोकज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना तथा उन्हें अपनी मातृभाषा के प्रति संवेदनशील बनाना था। “प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को हाना का हिंदी भावार्थ प्रस्तुत करने के साथ-साथ उससे संबंधित चित्र या दृश्यात्मक अभिव्यक्ति करने का अवसर प्रदान किया गया, जिससे भाषा के साथ-साथ उनकी सृजनात्मक एवं कलात्मक प्रतिभा भी विकसित हो सके। 

डॉ सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिंदी  कार्यक्रम प्रभारी ने बताया यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रमुख प्रावधान (धारा 4.11) से भी जुड़ा है, जिसमें शिक्षा का माध्यम मातृभाषा अथवा स्थानीय भाषा में रखने पर विशेष बल दिया गया है। मातृभाषा के माध्यम से शिक्षण–अधिगम अधिक सहज, प्रभावी और संस्कारपूर्ण बनता है। छत्तीसगढ़ी हाना जैसी लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ अत्यंत आवश्यक हैं, क्योंकि इनके माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है और सांस्कृतिक आत्मबोध विकसित होता है।


शंकराचार्य शैक्षणिक परिषद के निर्देशक डॉ. दीपक शर्मा एवं डॉ. मोनीषा शर्मा ने अपने संयुक्त उद्बोधन में कहा कि लोकभाषा और लोकसाहित्य किसी भी समाज की आत्मा होते हैं। हाना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सामाजिक चेतना, जीवन-दर्शन और सामूहिक अनुभव झलकते हैं। इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों में शोधपरक दृष्टि, भाषायी संवेदनशीलता और सांस्कृतिक गर्व का भाव उत्पन्न होता है।

प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार शर्मा सरला शर्मा पद्मनाकपुर एवं स.प्रा, शिक्षा विभाग श्रीमती उषा साहू उपस्थित रहीं। दोनों निर्णायकों ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता, भावार्थ की स्पष्टता, भाषा–सौंदर्य एवं चित्रात्मक प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी हाना को अत्यंत प्रभावी ढंग से हिंदी में प्रस्तुत किया है, जो उनकी भाषायी समझ और सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है।

विजयी प्रतिभागियों “इंटैक”दुर्ग–भिलाई अध्याय के सौजन्य से पुरस्कृत किया गया

प्रथम पुरस्कार –अदिति पांडे, एम.एस.सी. प्रथम सेमेस्टर माइक्रोबायोलॉजी, स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर, हुडको, भिलाई – ₹500।

द्वितीय पुरस्कार –एकता दीवान, एम.एससी — सप्तम  सेमेस्टर इंटीग्रेटेड, मूल विज्ञान केंद्र, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर – ₹400।

तृतीय पुरस्कार –नंदिनी कर, बी.कॉम —तृतीय वर्ष, स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर, हुडको, भिलाई – ₹150।

रिया बोरकर, बी.कॉम — प्रथम सेमेस्टर, स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर, हुडको, भिलाई – ₹150।

सांत्वना पुरस्कार –रेणुका साहू, डी.फार्मा —प्रथम सेमेस्टर, संदीपनी इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मेसी – ₹100 |

कार्यक्रम का समापन हिंदी विभागाध्यक्ष एवं प्रतियोगिता प्रभारी डॉ. सुनीता वर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने “इंटैक”दुर्ग–भिलाई अध्याय, अतिथियों, निर्णायकों, प्रतिभागियों तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छत्तीसगढ़ी भाषा, लोकसंस्कृति और साहित्य के संरक्षण की दिशा में एक सशक्त कदम हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में स.प्रा.गणित कामिनी वर्मा स.प्रा.कला.संकाय ज्योति मिश्रा , गोल्डी  राजपूत ,राधा रानी मिश्रा ने विशेष योगदान दिया कार्यक्रम में मंच संचालन संयुक्ता पाढ़ी विभागाध्यक्ष अंग्रेजी ने किया।