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Breaking,आदिवासी भूमि के विक्रय के संबंध में छत्तीसगढ़ में बड़ा निर्णय, संभाग अपीलीय न्यायालय का महत्वपूर्ण आदेश, आदिवासी जमीन पर स्वत्व के बिना, किसी दूसरे के द्वारा किया गया विक्रय विधि सम्मत नहीं,अनुविभागीय अधिकारी का आदेश निरस्त

 *आदिवासी भूमि स्वामी को 18 साल बाद भूमि नामांतरण प्रकरण में अपील स्वीकार, अनुविभागीय अधिकारी का आदेश निरस्त, संभागायुक्त श्री महादेव कावरे ...

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 *आदिवासी भूमि स्वामी को 18 साल बाद भूमि नामांतरण प्रकरण में अपील स्वीकार, अनुविभागीय अधिकारी का आदेश निरस्त, संभागायुक्त श्री महादेव कावरे का निर्णय

*धारा ४९ के तहत प्रत्यावर्तन निरस्त

रायपुर   .

असल बात news. 

02 जनवरी 2026। 

आदिवासी भूमि के विक्रय के संबंध में छत्तीसगढ़ में एक बड़ा निर्णय आया है.यह संभाग अपीलीय न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय है. इसमें निर्णय सुनाया गया है कि आदिवासी जमीन पर स्वत्व के बिना,किसी दूसरे के द्वारा किया गया विक्रय विधि सम्मत नहीं है.संभागायुक्त श्री महादेव कावरे के न्यायालय के द्वारा एक अपीलीय प्रकरण में यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। प्रकरण में अनुविभागीय अधिकारी का आदेश निरस्त किया गया है तथा न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि स्वत्व के बिना किया गया विक्रय विधि सम्मत नहीं है और ऐसे विक्रय से क्रेता को कोई वैधानिक लाभ नहीं मिल सकता। 

अनुविभागीय अधिकारी का आदेश निरस्त

संभागायुक्त श्री महादेव कावरे ने खमतराई, तहसील एवं जिला रायपुर स्थित भूमि के नामांतरण से जुड़े एक प्रकरण में अपीलीय न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 44(2) के अंतर्गत प्रस्तुत अपील को स्वीकार करते हुए अनुविभागीय अधिकारी (रा.) रायपुर द्वारा दिनांक 31 जुलाई 2017 को पारित आदेश को विधिसम्मत नहीं मानते हुए निरस्त कर दिया गया है।

प्रकरण में अपीलार्थी श्यामसुंदर सिंह (पिता स्व. रामनारायण सिंह) एवं शारदा सिंह (पिता रामनारायण सिंह), निवासी मद्रास रोड लाइन्स के पास, भनपुरी, रायपुर द्वारा उत्तरवादी प्रवीण कुमार अग्रवाल, निवासी शैलेन्द्र नगर, रायपुर के विरुद्ध अपील प्रस्तुत की गई थी। अपील अनुविभागीय अधिकारी रायपुर के प्रकरण क्रमांक 33/31-6/2013-14 के आदेश से व्यथित होकर दायर की गई थी।

प्रकरण का संक्षिप्त विवरण यह है कि ग्राम खमतराई स्थित खसरा नंबर 125/2 एवं 125/9 कुल रकबा 0.405 हेक्टेयर भूमि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। अपीलार्थियों का तर्क था कि उक्त भूमि का पूर्व में विधिवत विक्रय आदिवासी गोंड जाति के व्यक्ति के पक्ष में हो चुका था, ऐसे में बिना स्वत्व के,बाद में की गई बिक्री से उत्तरवादी को कोई अधिकार प्राप्त नहीं हो सकता।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि स्वत्व के बिना किया गया विक्रय विधि सम्मत नहीं है और ऐसे विक्रय से क्रेता को कोई वैधानिक लाभ नहीं मिल सकता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अनुविभागीय अधिकारी द्वारा तहसीलदार को प्रकरण प्रत्यावर्तित करना छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 49(3) के प्रावधानों के विपरीत है, जिसमें प्रत्यावर्तन वर्जित है।

न्यायालय ने सभी दस्तावेजों एवं तर्कों का सूक्ष्म अध्ययन करने के पश्चात् यह निष्कर्ष निकाला कि अनुविभागीय अधिकारी रायपुर का आदेश विधिसम्मत नहीं है। फलस्वरूप, दिनांक 29 दिसंबर 2025 को खुले न्यायालय में अपील स्वीकार करते हुए उक्त आदेश को निरस्त कर दिया गया।