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डबरी निर्माण से जल संरक्षण में बढ़ोतरी हुई है, जिससे ग्रामीणों के लिए आय के नए अवसर खुल रहे हैं

  रायपुर. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने का साधन भर नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्राम...

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 रायपुर. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने का साधन भर नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में बेहद प्रभावी माध्यम साबित हो रही है। मनरेगा से निर्मित टिकाऊ परिसंपत्तियाँ न सिर्फ ग्रामीणों के लिए जल संरक्षण को मजबूत कर रही हैं, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर भी प्रदान कर रही हैं। वर्षा आधारित खेती पर निर्भर किसानों के लिए डबरी निर्माण एक नई उम्मीद बनकर उभरा है, जिससे खेती के अलावा अन्य आजीविका के विकल्प भी विकसित हो रहे हैं। डबरी निर्माण के लिए जिला प्रशासन खैरागढ़ द्वारा विकासखंड छुईखदान में निजी भूमियों पर व्यापक रूप से स्वीकृतियाँ प्रदान की गई हैं। उद्देश्य यह कि किसान वर्षा जल संरक्षित कर सकें, सिंचाई क्षमता बढ़े और जल संकट की स्थिति में भी खेती प्रभावित न हो।



बेलगांव के राजकुमार जंघेल की ‘आजीविका डबरी’ बनी परिवर्तन की मिसाल


विकासखंड छुईखदान के ग्राम पंचायत खैरानवापारा के आश्रित ग्राम बेलगांव में किसान राजकुमार जंघेल की निजी भूमि पर मनरेगा निधि से 2.672 लाख रुपये की लागत से डबरी निर्माण कराया गया। इस कार्य से ग्रामीणों को 1359 मानव दिवस का रोजगार प्राप्त हुआ। पूर्व में राजकुमार जंघेल पूरी तरह बारिश आधारित खेती पर निर्भर थे, जिससे उत्पादन कम और आय सीमित रहती थी। डबरी के निर्माण ने परिस्थितियाँ बदल दीं। अब वे बरसाती पानी संरक्षित कर मछली पालन कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष 1.5 से 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। डबरी की मेड़ पर अरहर जैसी फसलें लगाकर वे घर के उपयोग हेतु आवश्यक अनाज भी प्राप्त कर लेते हैं। राजकुमार जंघेल ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा— “डबरी ने न सिर्फ पानी बचाया, बल्कि हमारी आमदनी भी बढ़ाई। यह हमारे लिए सचमुच आजीविका डबरी साबित हुई है।”


प्रशासनिक प्रयास दे रहे परिणाम

कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में ग्रामीणों की आजीविका सुधार हेतु निरंतर पहल की जा रही है। मनरेगा के माध्यम से पात्र परिवारों को डबरी, पशु शेड, बकरी शेड, मुर्गी शेड एवं कुआँ जैसे हितग्राही मूलक कार्यों की स्वीकृति प्रदान की जा रही है, जिससे खेती के साथ विविध व्यवसायों का विस्तार हो रहा है और ग्रामीण आय में वृद्धि सुनिश्चित हो रही है।