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कड़ाके की ठंड में रातें,... खुले आसमान के नीचे.... मजबूरी या कुछ और

भिलाई,दुर्ग  . असल बात news.   आप ये जो चित्र देख रहे हैं,यह  महाराणा प्रताप चौक भिलाई की है. यह क्षेत्र कई दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है.यह...

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भिलाई,दुर्ग  .

असल बात news.  

आप ये जो चित्र देख रहे हैं,यह  महाराणा प्रताप चौक भिलाई की है. यह क्षेत्र कई दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है.यही समीप ही बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स का महत्वपूर्ण ऑफिस है.चित्र में आपको कंबल वगैरह दिख रहे हैं.यहीं बगल में एक व्यक्ति खड़ा दिख रहा है.वह व्यक्ति कई वर्षों से दिन-रात,यही रह रहा है.खुले आसमान के नीचे कई वर्षों से दिन-रात एक व्यक्ति के पड़े रहने से कई सवाल पैदा होते हैं. मानवता और सामाजिकता की दृष्टि से देखे,तो यह सवाल पैदा होता है कि शासन के पास क्या अब ऐसी कोई सुविधा और योजना नहीं रह गई है कि जो आवासहीन हैं,निराश्रित है जिनके पास रहने का ठिकाना नहीं है,उसके लिए कोई रहने की व्यवस्था कर सके...?? दूसरी बात जनसुरक्षा की दृष्टि से देखें तो यह भी सवाल पैदा होता है कि, किसी व्यक्ति के ऐसे व्यस्ततम मार्ग पर पड़े रहने से,क्या यहां कोई आपराधिक गतिविधि नहीं हो सकती...?? क्या अपराधिक तत्वों के द्वारा इसका कोई दुरुपयोग नहीं किया सकता है... अभी प्रमुख शहरों में..अपराधिक तत्वों के द्वारा परिवहन के लिए... दिव्यांगजनों वाली साइकिल के प्रयोग का ट्रेंड शुरू हुआ है... तो शासन-प्रशासन को कई दृष्टि से, निश्चित रूप से,यहां भी सतर्कता बरतने की जरूरत है.

इस व्यक्ति को वृद्ध तो कतई नहीं कहा जा सकता.यह बहुत अधिक असहाय भी नहीं लगता है.आखिर इतने कड़ाके की ठंड में भी इसे,ओपन आसमान के नीचे रहने की क्या जरूरत पड़ गई है, उसकी क्या मजबूरियां हैं... उसके खाने पीने की कैसे व्यवस्था होती है.. उसके परिवार में और कौन-कौन है तथा वह यहां कहां से आया है.. इस सब के बारे में हमें भी जानने की उत्सुकता हुई तो हमने उससे इस सब के बारे में पूछा..

पहले तो उसने बताया कि वह राजधानी रायपुर से बहुत दूर से यहां आया है.. फिर और पूछने पर उसने बताया कि वह रायपुर के माना से बहुत दूर से आया है. उसने यह बताया कि पहले वह भिलाई नगर रेलवे स्टेशन में रहने का प्रयास करता था लेकिन उसे यहां से भगा दिया गया,तब से वह यहां आकर खुले आसमान के नीचे सोता है.. और दिन रात यहीं रहता है.. उसके खाने पीने की व्यवस्था कैसी होती है यह पूछने पर उसने बताया कि लोग मांगने पर दे देते हैं उसी से खा-पीकर वह गुजारा कर लेता है.उसने यह भी बताया कि दानदाताओं ने उसे कंबल भी दे दिया है.. बगल में मंदिर है वहां आने वाले श्रद्धालु भी उसे दान दे देते रहते हैं.

लेकिन फिलहाल तो उसे कडाके की ठंड में...खुले आसमान के नीचे सोना पड़ रहा है... लेकिन उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखती.. जो मिल जाता है उसी को खा -पी कर वह गुजारा कर ले रहा है..