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तुलसी पूजन दिवस” — पर्यावरण और संस्कृति का संगमस्वा,मी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, भिलाई का आयोजन

  भिलाई  . असल बात news.   स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, भिलाई के कला विभाग द्वारा तुलसी पूजन दिवस के अवसर पर रंगोली कार्यक्रम...

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 भिलाई  .

असल बात news.  

स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, भिलाई के कला विभाग द्वारा तुलसी पूजन दिवस के अवसर पर रंगोली कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का संयोजन कला विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री गोल्डी सिंह राजपूत एवं श्रीमती ज्योति मिश्रा द्वारा, हिंदी विभाग की डॉ. सुनीता वर्मा के निर्देशन में किया गया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना, प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशीलता और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति आदरभाव विकसित करना था। तुलसी के पौधे के माध्यम से छात्रों को न केवल हरियाली और स्वच्छता का संदेश दिया गया, बल्कि इसके औषधीय, सामाजिक और धार्मिक महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई।तुलसी विवाह को एकादशी पर्व से भी जोड़ा गया है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आरोग्य, आत्मनियंत्रण और मानसिक-शारीरिक शुद्धता के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

श्री शंकराचार्य शैक्षणिक परिसर हुडको के निर्देशक डॉ. दीपक शर्मा  एवं डॉ. मोनिशा शर्मा ने बताया कि तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट गुणधर्म पाए जाते हैं, जो संक्रामक रोगों से रक्षा करते हैं। यह पौधा विशेष रूप से स्फूर्तिवर्धक है और स्वास्थ्यवर्धन में सहायक है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि एकादशी का पूजन आत्मशुद्धि, धर्मपालन और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत पवित्र साधन है। यह दिवस समाज में सुख, शांति एवं सौहार्द का संदेश देता है, जिससे लोकजीवन मंगलमय होता है।

यूनिवर्सल स्कैनर के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति तुलसी के पौधे की परिक्रमा करता है, तो उसके आभामंडल के प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि होती है। तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में विद्युत शक्ति का संतुलन बना रहता है और व्यक्ति की आयु में वृद्धि होती है।

इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा “तुलसी चौरा सजाओ” विषय पर रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

रंगोली प्रतियोगिता में अपेक्षा राजपूत (बी.ए. प्रथम वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, वहीं “तुलसी चौरा सजाओ” प्रतियोगिता में साम्य (बी.एस.सी. तृतीय वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि तुलसी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसके पूजन से जहां धार्मिक आस्था प्रकट होती है, वहीं यह स्वास्थ्य संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का भी माध्यम है।

महाविद्यालय परिवार ने इस आयोजन के माध्यम से समाज को यह प्रेरणा दी कि तुलसी केवल आँगन की शोभा नहीं, बल्कि जीवन की आरोग्यता और पवित्रता का प्रतीक है।