भिलाई. असल बात news. स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय के सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग द्वारा, श्री शंकराचार्य इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिक...
भिलाई.
असल बात news.
स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय के सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग द्वारा, श्री शंकराचार्य इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सहयोग से दस दिवसीय इंटर्नशिप प्रशिक्षण का आयोजन कर रहा है, जिसका शीर्षक है: "लैब और क्लिनिक को जोड़ना: डायग्नोस्टिक माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी में इंटर्नशिप प्रशिक्षण"
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी की बुनियादी एवं उन्नत प्रयोगशाला तकनीकों से परिचित कराना है। विद्यार्थियों को नैदानिक नमूनों के सुरक्षित संकलन, प्रसंस्करण और विश्लेषण की विधियों का अनुभव प्राप्त होगा। साथ ही, उन्हें माइक्रोफ्लोरा की पहचान, आईएमवीसी टेस्ट, टीएसआईए माध्यम पर एंटेरिक पैथोजेन्स की पहचान, फंगल और पैरासाइटिक परीक्षण तथा रोग निदान से संबंधित केस स्टडीज़ पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. शमा अफ़रोज़ बैग ने बताया कि इस प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को प्रयोगशाला सुरक्षा एवं जैव-अपशिष्ट प्रबंधन की समझ विकसित होगी। उन्हें रक्त, मूत्र, मल, थूक आदि नैदानिक नमूनों की जाँच विधियों का अनुभव मिलेगा। विद्यार्थी बैक्टीरिया, फफूँद, वायरस और परजीवियों की पहचान की तकनीकों से परिचित होंगे तथा नैदानिक रोगों के निदान एवं उपचार में प्रयोगशाला की भूमिका को समझ सकेंगे। साथ ही, आधुनिक तकनीकों ऑटोमेटेड डायग्नॉस्टिक सिस्टम से अवगत होने और केस स्टडी एवं प्रस्तुतिकरण के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने का अवसर प्राप्त होगा।
“श्री शंकराचार्य एजुकेशनल कैंपस, हुडको के निदेशक. डॉ. दीपक शर्मा एवं डॉ. मोनिषा शर्मा ने इस शैक्षणिक गतिविधि को प्रोत्साहित करते हुए विद्यार्थियों के अकादमिक एवं व्यावहारिक ज्ञानवर्धन हेतु इस दस दिवसीय प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है।”
प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि यह प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को पैथोलॉजी एवं मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करेगा, जिससे उनके शैक्षणिक स्तर में वृद्धि होगी और उन्हें भविष्य के अनुसंधान एवं रोजगार के अवसरों में लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम में सुश्री योगिता लोखंडे, एवं सुश्री सुरभि श्रीवास्तव सहायक प्राध्यापक, सूक्ष्मजीवविज्ञान ने विशेष सहयोग प्रदान किया।


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