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दुर्ग जिले के समाचार,चर्म रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति व कैथ लैब के लिए लगाई गुहार, ग्राम गोंडपेंड्री में जल निकासी बाधित, गांव में जलभराव से बीमारियों का खतरा

   जनदर्शन में 105 आवेदन प्राप्त हुए दुर्ग  . असल बात news.   04 अगस्त 2025. जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्दे...

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 जनदर्शन में 105 आवेदन प्राप्त हुए

दुर्ग  .

असल बात news.  

04 अगस्त 2025.

जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार डिप्टी कलेक्टर श्री उत्तम ध्रुव ने जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचेे जनसामान्य लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने जनदर्शन में पहुंचे सभी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समुचित समाधान एवं निराकरण करने संबंधित विभागों को शीघ्र कार्यवाही कर आवश्यक पहल करने को कहा। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन कराने, आर्थिक सहायता राशि दिलाने सहित विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आज 105 आवेदन प्राप्त हुए। 

जनदर्शन कार्यक्रम में ग्राम सभा नंदकठी एवं ग्रामवासियों ने बताया कि गांव की शासकीय चारागाह भूमि पर कुछ किसानों द्वारा धान और सब्जी की फसल बोई जा रही है, जिससे मवेशियों के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। चरवाहों ने पशुओं को चराने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते मवेशी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्राम सभा में इस संबंध में बात रखी गई, जिसके उपरांत कुछ किसानों ने कब्जा हटाया, लेकिन अभी भी कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण जारी है। ग्रामवासियों ने अतिक्रमण हटाकर चारागाह भूमि को मुक्त कराने की मांग की है। इस पर डिप्टी कलेक्टर ने तहसीलदार दुर्ग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

दुर्ग निवासी ने जिला चिकित्सालय में चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति करने व कैथ लैब की व्यवस्था के लिए आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय में चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति नही होने से एवं कैथ लैब के अभाव में मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। त्वचा संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों को निजी क्लीनिकों में जाना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। इस पर डिप्टी कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। 

इसी तरह ग्राम गोंडपेंड्री के किसानों एवं ग्रामवासियों ने जल निकासी रास्ता बंद किए जाने की शिकायत की। ग्राम गोंडपेंड्री (तहसील पाटन) के किसानों ने बताया कि खदान मालिक द्वारा जल निकासी का रास्ता बंद कर दिए जाने के कारण लगभग 70 एकड़ कृषि भूमि पर फसले बर्बाद होने की स्थिति में हैं। जल निकासी रास्ता बंद करने से गांव की बस्ती में पानी भरने से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। इस संबंध में डिप्टी कलेक्टर ने एसडीएम और तहसील पाटन को निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। इस दौरान नगर निगम दुर्ग, रिसाली, भिलाई, खाद्य विभाग, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे।

*पीएमश्री विद्यालयों में अंशकालिक कोच के लिए आवेदन 12 अगस्त तक आमंत्रित

समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत पीएमश्री योजना के तहत दुर्ग जिले के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में अंशकालिक योग एवं खेल शिक्षक/कोच की सेवाएं ली जाएंगी। इसके लिए योग्य प्रशिक्षकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। 

जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह नियुक्ति 11 विद्यालयों शासकीय पीएमश्री प्राथमिक शाला जरवाय, रुआबांधा, पथरिया, बानबरद, गभरा, तथा स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल जामुल, कुम्हारी, अहिवारा, बोरी, नगपुरा और बालाजी नगर खुर्सीपार में की जाएगी। योग्य प्रशिक्षकों को 10 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय प्रदाय किया जाएगा। इच्छुक आवेदक को स्नातक शारीरिक शिक्षा डिग्री एवं योग शिक्षा संबंधित क्षेत्र में स्नातक की डिग्री एवं संबधित क्षेत्र में कार्य का अनुभव होना चाहिए। इच्छुक उम्मीदवार 12 अगस्त 2025 तक अपना आवेदन जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा, दुर्ग में स्वयं या पंजीकृत डाक से कार्यालयीन समय में जमा कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जिला परियोजना कार्यालय के सूचना पटल पर कार्यालयीन समय में संपर्क किया जा सकता है।

*पीलिया से नहीं हुई मृत्यु

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग के निर्देशानुसार डॉ. सी.बी.एस. बंजारे, जिला सर्वेलेंस अधिकारी, आई.डी.एस.पी. तथा श्रीमती रितीका सोनवानी, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट दुर्ग द्वारा शांतिपारा, बैकुण्ठधाम का निरीक्षण किया गया। 03 अगस्त 2025 को ए.एन.एम. एवं मितानिन को पीलिया से मृत्यु की जानकारी प्राप्त होने पर आज 04 अगस्त 2025 को ए.एन.एम, मितानिन एवं पर्यवेक्षक के द्वारा सर्वे का कार्य किया गया।

 सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी से मिली जानकारी अनुसार सर्वे के दौरान मृतक के परिजनों के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 23 जुलाई 2025 को मरीज को पेट में दर्द होने पर शारदापारा में स्थानीय चिकित्सक से ईलाज करवाया गया। डॉक्टर के द्वारा पेट दर्द एवं गैस की दवाई दी गयी। मरीज को पुनः पेट दर्द होने पर पीलिया की जाँच हेतु पैथालौजी लेब भेजा गया। मरीज शराब के सेवन का आदी था। मरीज का पेट फुलने पर 29 जुलाई 2025 को सीएम मेडिकल कॉलेज कचांदूर जांच हेतु ले जाया गया। जहां से मरीज को मेकाहारा अस्पताल रायपुर रिफर किया गया। 29 जुलाई 2025 को शाम 8 बजे मेकाहारा अस्पताल से मरीज के घरवालों के द्वारा बालाजी हॉस्पिटल रायपुर मोवा ले जाया गया। लीवर में सुजन होना एवं शरीर के अन्दरूनी अंगों में सुजन होना बताया गया। चिकित्सक के द्वारा जानकारी दी गई कि मरीज के पेट का तत्काल ऑपरेशन करना पड़ेगा। 03 अगस्त 2025 को चिकित्सक के द्वारा मरीज को वेन्टीलेटर में रखने की जानकारी परिवारवालों को दी गई। प्रातः 9 बजे मरीज की मृत्यु श्री बालाजी हॉस्पिटल रायपुर में हुई। अस्पताल के डेथ रिपोर्ट अनुसार मरीज के मृत्यु का कारण "Sepsis with septic Shock with Chronic liver disease with gall bladder perforation" दिया गया। अतएव उक्त मृतक का पीलिया से मृत्यु नहीं हुआ है। 

*सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह, राज्य स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन

 छत्तीसगढ़ शासन, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के अंतर्गत संचालक, रोजगार एवं प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार ’’राज्य स्तरीय रोजगार मेला’’ का आयोजन माह सितम्बर 2025 के प्रथम सप्ताह में रायपुर में होना प्रस्तावित है, जिसके लिए निजी क्षेत्र के तकनीकी एवं गैर तकनीकी क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न सेक्टर जैसे आईटी, कम्प्यूटर, हॉस्पिटल, हॉस्पिटालिटि, फार्मेसी, सेल्स एवं मार्केटिंग, बैंकिंग, फाईनेंस एवं एकाउन्टिंग, इंश्योरेंस, सर्विस सेक्टर आदि के लगभग 10000 रिक्त पदों की अधिसूचना प्राप्त हुई है, जिन पर इस रोजगार मेला में भर्ती की कार्यवाही की जाएगी। इस मेले में लगभग सभी प्रकार के शैक्षणिक योग्यताधारी आवेदक जैसे- 8वीं, 10वीं, 12वीं, स्नातक, स्नातकोत्तर, आईटीआई, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग के लिए अच्छे वेतनमान पर रिक्त पद हैं जिनके लिए ये आवेदक सम्मिलित हो सकते है। 

जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र दुर्ग उप संचालक से मिली जानकारी अनुसार इस रोजगार मेले में नियोजक एवं आवेदक हेतु आवेदन की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाईन ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से की जानी है, जिसके लिए नियोजक/आवेदक से अपील की जाती है कि वे छत्तीसगढ़ रोजगार विभाग की वेबसाईट www.erojgar.cg.gov.in पर जाकर मेले से पूर्व रोजगार मेला हेतु अपना पंजीयन अनिवार्य रूप से कर लेंवे। मेला स्थल पर केवल और केवल पंजीकृत आवेदकों को ही रोजगार के अवसर प्रदान किये जाएंगे। पोर्टल में पंजीयन संबंधी विस्तृत जानकारी के लिए जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र दुर्ग से संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकतें है।



*छत्तीसगढ़ की पुनरीक्षित हॉफ बिजली बिल योजना से 31 लाख सामान्य और कमजोर वर्ग के उपभोक्ताओं को मिलेगा पूर्ववत लाभ

*15 लाख बीपीएल परिवारों को मिलती रहेगी मुफ्त बिजली की सुविधा, सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम

छत्तीसगढ़ सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने वाली हॉफ बिजली बिल योजना के अंतर्गत दी जाने वाली 400 यूनिट की मासिक छूट की सीमा में युक्तियुक्त संशोधन करते हुए अब 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर 50 प्रतिशत की रियायत देने का निर्णय लिया है।

वर्तमान में राज्य में लगभग 45 लाख घरेलू उपभोक्ता परिवार हैं, जिनमें से 31 लाख परिवारों की मासिक खपत 100 यूनिट से कम है। यह लगभग 70 प्रतिशत उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करता है। अतः इस संशोधन के बावजूद, इन 31 लाख जरूरतमंद सामान्य एवं कमजोर वर्ग के उपभोक्ताओं को योजना का लाभ पूर्ववत मिलता रहेगा। इन 31 लाख परिवारों में 15 लाख बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें पूर्ववत 30 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलती रहेगी। इसके साथ ही वे हॉफ बिजली बिल योजना के तहत अन्य सभी लाभों से भी यथावत लाभान्वित रहेंगे। 

राज्य सरकार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को भी तेज़ी से लागू कर रही है, जिसके अंतर्गत उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने पर केंद्र और राज्य सरकारों से अधिकतम  ₹1,08,000/- तक की सब्सिडी दी जा रही है।इस योजना के तहत 1 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट से प्रतिमाह औसतन 120 यूनिट बिजली उत्पादन होता है, जिस पर ₹30,000 केंद्र से व ₹15,000 राज्य से, कुल ₹45,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। उपभोक्ता को लगभग ₹15,000 स्वयं वहन करना होता हैं।

इसी प्रकार 2 किलोवॉट प्लांट के लिए प्रतिमाह औसतन 240 यूनिट उत्पादन संभव है, जिस पर ₹90,000 तक कुल सब्सिडी (₹60,000 केंद्र + ₹30,000 राज्य) मिलती है। उपभोक्ता को केवल ₹30,000 खर्च करना होता है।

3 किलोवॉट क्षमता के प्लांट से प्रतिमाह औसतन 360 यूनिट उत्पादन संभव है, और इसमें ₹78,000 केंद्र + ₹30,000 राज्य यानी कुल ₹1,08,000 की सहायता मिलती है। उपभोक्ता को ₹72,000 वहन करना पड़ता है, जो ऋण पर भी उपलब्ध है।

उल्लेखनीय है कि 2 किलोवॉट या अधिक क्षमता वाले प्लांट लगाने वाले उपभोक्ता प्रतिमाह 200 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन 25 साल तक कर सकते हैं, जो हॉफ बिजली योजना से मिलने वाली अधिकतम छूट (400 यूनिट पर 200 यूनिट रियायत) से भी ज्यादा है। ऐसे उपभोक्ता अपने घर में सौर ऊर्जा से उत्पन्न विद्युत का उपयोग कर न सिर्फ बिजली खर्च से मुक्ति पा सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर आय भी अर्जित कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली, स्थायी बचत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करेगी। साथ ही, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित होगा। इससे छत्तीसगढ़ के उपभोक्ता हॉफ बिजली बिल से मुफ्त बिजली बिल योजना की ओर स्वाभाविक रूप से अग्रसर होंगे। उपभोक्ता किसी भी योजना पर निर्भर न रहते हुए स्वयं अपनी छत पर ऊर्जा उत्पादन कर “उर्जादाता” बनेंगे। यह रणनीतिक पहल राज्य को स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक बचत और ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ाएगी।