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रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ी गई निरीक्षक महिला थाना प्रभारी, ऐसे प्रकरण, बार-बार खड़े कर देते हैं कई सवाल

 रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ी गई निरीक्षक महिला थाना प्रभारी, ऐसे प्रकरण, बार-बार खड़े कर देते हैं कई सवाल  छत्तीसगढ़. असल बात न्यूज़.      ...

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 रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ी गई निरीक्षक महिला थाना प्रभारी, ऐसे प्रकरण, बार-बार खड़े कर देते हैं कई सवाल 


छत्तीसगढ़.

असल बात न्यूज़.    

    00  विशेष संवाददाता    

रायपुर महिला की थाना प्रभारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद निलंबित कर दिया गया है, लेकिन रिश्वत मांगने और रिश्वत देने की मांग पूरी नहीं करतें तक प्रताड़ित करने की इस घटना के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में पुलिस की कार्य प्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है.उच्च स्तर पर,पुलिस प्रशासन के द्वारा आम जनता का विश्वास जीतने की बार-बार रणनीति बनाई जाती है लेकिन ऐसे प्रकरण सामने आते हैं तो सारी रणनीति फिर से फेल हो जाती है.अभी भी सामान्य धारणा है कि आम नागरिक, पुलिस से हर हालत में दूर रहना चाहता है.पुलिस प्रशासन से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता है. पीड़ित लोग,अपनी पीड़ा सह लेते हैं,लेकिन पुलिस में शिकायत करने नहीं जाना चाहते. यह भी धारणा बनी हुई है कि पुलिस विभाग के द्वारा उन्ही अपराधियों के खिलाफ ही कार्रवाई भी की जाती है, जो कि उनके संरक्षण में काम नहीं कर रहे हो होते हैं. पुलिस विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी आते हैं और परिस्थितियों में बदलाव लाने की कोशिश करते हैं. इसके लिए बार-बार तमाम तरह के प्रयास किए गए हैं.'पुलिस-आम जनता की मित्र", "पुलिस मित्र" जैसे तरह-तरह के अभियान चलाए गए है. ज्यादातर नए पुलिस कप्तान जिले में आते हैं तो ऐसे अभियानों को तेजी से बढ़ावा लिया जाता है. लेकिन जो हालात सामने आते हैं,लगता है कि कुछ दिन ही ऐसे अभियानों की धमक रहती है लेकिन उसके बाद सारी व्यवस्थाएं अपने ढर्रे पर चलने लगती हैं. आजकल गृह क्लेश के प्रकरण बढते जा रहे हैं. महिला थानों में गुहार लगाने पहुंचने वाले पीड़ितों की हर दिन भारी भीड़ दिखाई देती है.इसमें पीड़ित महिलाओं की संख्या भी बहुत अधिक होती है, जो कि अपने पति अथवा ससुराल पक्ष के सदस्यों के द्वारा परेशान करने की शिकायत लेकर पहुंचती हैं. महिला थाना में पहुंचने वाली पीड़ित महिलाओं को उम्मीद रहती है कि यहां शिकायत करने पर उनकी समस्याओ का बहुत हद तक निराकरण हो सकेगा. इन्हीं महिला थानाओ में अपना दुखडा लेकर पहुंचने वाली पीड़ित स्त्रियों से रिश्वत मांगे जाने की शिकायत आ रही हैं. जब पीड़ित महिलाओं से ही रिश्वत मांगी जा रही है तो इस केस में जो आरोपी फंसे होते हैं,उनसे किस तरह का "ट्रीट" किया जा सकता होगा,यह आसानी से समझा जा सकता है. जिस प्रकरण में आरोपी महिला थाना प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की गई है उसमें भी शिकायत करने वाली पीड़ित महिला पक्ष के लोग अपने ससुराल पक्ष के द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत लेकर पहुंचे थे. इस मामले में कार्रवाई करने के नाम पर ही रिश्वत की मांग कर दी गई. वह भी कोई छोटी-मोटी राशि नहीं, बताया जाता है कि ₹50 हजार रु तक की मांग कर दी गई. सामान्य वर्ग के परिवार के लोगों के द्वारा इतनी बड़ी राशि तो दे पाना असंभव जैसा है. ऐसे में सवाल यह खड़ा हो जाता है कि पीड़ित पक्ष के लोग भी "पैसे" नहीं दे पाएंगे, तो क्या उन्हें "न्याय" कभी नहीं मिलेगा.

रिश्वत लेते पकड़े जाने पर विभाग के द्वारा निलंबन की कार्रवाई की गई है. लेकिन,ऐसी कार्रवाई कोई बहुत अधिक खुशी देने वाली खबर नहीं है. क्योंकि, ऐसे मामलों से पता चलता है कि कई विभागों में लोग,कैसे दीमक की तरह घुस गए हैं, और जिन जिम्मेदारियां पर उन्हें काम करना है उसे करने, लोगों को न्याय दिलाने के बजाय, सारी व्यवस्थाओं को धता बताते हुए सिर्फ अपना जेब भरने के काम में जुट गए हैं. एक मामला उजागर हो गया. रंगे हाथों पकड़ लिया गया. लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता कि सिर्फ इस कार्रवाई के बाद पूरी व्यवस्था में कोई बहुत बड़ा सुधार हो जाने वाला है. और पुलिस विभाग तो वैसे ही वर्षों से भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझता रहा है. तो ऐसे में इस तरह के मामले सामने आते रहेंगे, तो जनता का विश्वास जीतने का उद्देश्य  कब और कैसे पूरा हो सकेगा.?

 छत्तीसगढ़ राज्य में नई सरकार बनी है. आप मतदाताओं ने पिछली सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ मतदान कर नई सरकार  बनाई है. ऐसे में इस सरकार के ऊपर, आम जनता की उम्मीद पर खरा उतने के लिए बड़ी चुनौतियां हैं. राज्य में युवा गृह मंत्री हैं. उन्होंने पुलिस प्रशासन को सजाकर सतर्क बनाने के लिए नई मूहिम शुरू की है. एक बड़े वर्ग के द्वारा इसे पसंद भी किया जा रहा है. यह कहा जा सकता है कि जब विभाग में रिश्वत मांगने की रंगे हाथों घटनाएं पकड़ी जाने लगे तो विभाग पर तो सवाल उठने ही लगेगा और यह सवाल दूर तक जाएगा.

 जिस मामले में महिला खान की पुलिस निरीक्षक को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया है उसमें राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो के समक्ष शिकायत की गई थी. एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने सतर्कता और तत्परता से करवाई करते हुए उस पुलिस अधिकारी को रिश्वत लेते रंग हाथ पकड़ने में सफलता प्राप्त कर ली. यह समाज कितनी सारी व्यथाओं से जूझ रहा है इसे समझ पाना आसान नहीं है. जो लोग पहले से ही परेशान है, प्रताड़ित है, उनसे ही कार्रवाई करने के नाम पर रिश्वत की मांग की जाए तो यह कितना पीड़ादायक होता होगा, इसे समझा जा सकता है.आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के नाम पर भी रिश्वत की मांग. महिला अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया है. अब इसमें कितनी सच्चाई है, इसका फैसला न्यायालय के समक्ष हो सकेगा. अभी समझ में जो परिस्थितियों बन गई हैं उसके चलते गृह क्लेश ऐसा बढ़ गया है कि आप किसी भी महिला थाने में चले जाएंगे तो वहां पीड़ित और आरोपी पक्षकारों की भीड़ देखकर दंग रह जाएंगे. लोगों में हम बढ़ गया है और एक समय ऐसा आता है कि लोग दूसरे को नीचा दिखाना चाहते हैं और खुद जीत जाना चाहते हैं. तब परिवार, समाज, रिश्तेदारी की भावना टूट जाती है. सिर्फ या भावना काम करने लगती है कि मुझे हारना नहीं है, हर हालत में जीतना ला है.कानून में जो अधिकार दिए गए हैं उसे पर भी बार-बार सवाल उठाते रहे हैं तथा उसमें संशोधन की मांग की जाती रही है. बीच-बीच में करिपय संशोधन हुए भी हैं. महिलाओं की शिकायतों के मामलों  में ज्यादातर यह भी देखा गया है कि कुछ वर्षों के लड़ाई झगड़ा झगड़ा झंझट के बाद जब दुनियादारी की वास्तविकता समझ में आती है, इस दरवाजे उसे दरवाजे दौड़ते दौड़ते थकवाड़ा से होने लगती है तब आपसी वैमनस्य्ता खत्म हो जाती है. और ऐसे ज्यादातर मामलों में पारिवारिक सुलह हो जाता रहा है और भारतीय संस्कृति को मानने वाले लोगों के परिवार टूट जाने, बिखर जाने  से बचते रहे हैं.पुलिस विभाग के द्वारा भी ऐसे मामलों में इसीलिए,जल्दबाजी में कार्रवाई करने से बचने की कोशिश की जाती है.

 महिला थाना प्रभारी का रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ा जाना बड़ी घटना है. इस तरह से पीड़ित पक्ष  से ही इतनी बड़ी राशि की रिश्वत मांगे जाने की जितनी निंदा की जाए कम है. ऐसी घटनाएं सामने आते रहेंगे तो शायद ही  पुलिस प्रशासन,कभी भी आम जनता का विश्वास जीत पाए. पुलिस मित्र के अभियान शुरू होंगे,कुछ दिन चलेंगे, और स्यमं खत्म हो जाएंगे. तब कोई भी सरकार बन जाए, उसके लिए व्यवस्थाओ को सुधार पाना आसान नहीं होगा.