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स्वरूपानंद महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस

  भिलाई. असल बात न्यूज़.    हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग एवं स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय के अनुसंधान विकास प्रकोष्ठ एवं आईक...

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भिलाई.
असल बात न्यूज़.   

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग एवं स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय के अनुसंधान विकास प्रकोष्ठ एवं आईक्यूएसी सेल के संयुक्त तत्वाधान में “वाणिज्य नवाचारों द्वारा भूमि का संरक्षण और पर्यावरण में संतुलन और स्थिरता स्थापित करना” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का समापन डॉ. भूपेन्द्र कुलदीप कुलसचिव, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव डीएसडब्लू हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग डॉ. के. के. कृष्णानी संयुक्त निर्देशक आईसीएआर-आईआईएबी, रांची झारखंड उपस्थित हुए।

डॉ. शमा ए. बेग ने कॉन्फ्रेंस में उभरे बिंदुओं को प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुत किया व बताया देश भर से प्राध्यापकों व शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र पढ़े, उन्होंने कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु पर प्रकाश डालते हुए बताया हमें व्यक्तिशः प्रयास करना होगा हम पौधा नहीं पेड़ लगायें जिससे छाया व हवा मिले, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ का उपयोग न करें नहीं प्लास्टिक में रखी गई खाद्य व पेय पदार्थ लें अगर हम प्लास्टिक नहीं खरीदेगें तो कोई उसे नहीं बनाएगा।

प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा पर्यावरण के यज्ञ में एक आहुति स्वरूपानंद महाविद्यालय का भी होगा इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भूमिक्षरण व पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में थोड़ी भी सहायता मिलेगी तो यह कार्यक्रम सफल माना जायेगा यह अंत नहीं अपितु शुरूवात हैं हम अपने दैनिक जीवन जीवन में एक कार्य ऐसा जरूर करें जो पर्यावरण संरक्षण में सहायक हो। 

अपने आतिथ्य उद्बोधन में कुलसचिव हेमचंद यादव विश्वविद्यालय डॉ. भूपेन्द्र कुलदीप ने महाविद्यालय की सराहना करते हुये कहा ज्वलंत मुद्दे पर अपने विचार धारा को लोगों तक पहुँचाने की कोशिश की यह अनुकरणीय है हमें इस संदेश को समाज तक पहुँचाना होगा। हमें शिक्षा के माध्यम से ऐसा जैविक पर्यावरणीय मूल्य विकसित करें जिससे युवा पर्यावरण के प्रति जागरूक हो, प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को एक-एक वृक्ष दें व अंतिम वर्ष तक उसे संरक्षित रखने के लिये प्रेरित करें। उन्होंने कहा हमें खेती को बचाने के लिए और विकल्प देना चाहिए जैसे मछली पालन, पशु, मुर्गी पालन आदि। अगर इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कोई बदलाव आया तो हमारा प्रयास जरूर सफल होगा।

महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा व श्री शंकराचार्य नर्सिंग महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मोनिषा शर्मा ने समसामयिक व आज की ज्वलंत समस्या पर कॉन्फ्रेंस आयोजन के लिए महाविद्यालय को बधाई दी व कहा सेमीनार से निकले पर्यावरण संरक्षण के उपाय निश्चित ही भविष्य के लिए उपयोगी साबित होगें। 

सत्र वक्ता डॉ. युगल किशोर मोहंतो स.प्रा. यूनिवर्सिटी साईंस एंड टेक्नालॉजी, मेघालय ने “पुनःस्थापना व पर्यावरणीय स्थिरता पर टेक्नॉलाजी का प्रभाव” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा जंगल को उजाड़ कर हम स्मार्ट सिटी व बड़े-बड़े बिल्डिंग का निर्माण कर रहे है। मेघालय 70 प्रतिशत वनाच्छादित है परन्तु अब स्थिति बिगड़ती जा रही है, भूमाफियाओं का जमीन पर कब्जा होते जा रहा है। हमें पर्यावरण संरक्षण हेतु पर्यावरण के लिए समर्पित इको उद्यमिता की जरूरत है।

डॉ. राजेन्द्र मिश्रा छ.ग. वन्यजीव बोर्ड के सदस्य ने वन्यजीव संरक्षण एवं प्रबंधन वर्तमान परिदृश्य में एक चुनौती विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा हम अपने घर में एसी चालू कर दूसरे घर गर्म हवा भेजते है। पहले जब हम जमीन की  खुदाई करते थे तो सोने के घड़े मिलते थे। अब 30 से 40 वर्ष बाद जब हम खुदाई करते थे पॉलीथिन ही मिलेगा उन्होंने पर्यावरण सुधार के लिये पौधे नहीं अपितु पेड़ लगाने की बात कही।

द्वितीय दिवस पर्यावरण संरक्षण में नवाचार विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुये डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव डीएसडब्लू हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग ने कहा हमारे पूर्वज प्रकृति पूजक थे उन्होंने आंवला नवमी, वट सावित्री पूजा पद्धति के माध्यम से पेड़ों को सरंक्षण प्रदान किया, विविध प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों द्वारा भूमि की पूजा की। जिसकी हम पूजा करते है उसको नुकसान पहुँचाने की कल्पना नहीं कर सकते उन्होंने कहा अगर हम बहते पानी को बंद करते है, वृक्ष लगाते व उनका संरक्षण करते है तो वह भी देश सेवा है। श्रीवास्तव ने वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण के लिए जो नई प्रौद्योगिकी उपयोग लाई जा रही है उस पर प्रकाश डाला। हाईड्रोलिक कार, सोलर पेनल, सोलर स्टिक, होटलों में वेस्ट मैनेजमेंट, प्लास्टिक की जगह लकड़ी के चम्मच का प्रयोग, प्लास्टिक का प्रयोग थ्रीडी प्रिंटर के लिए आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

अतिथि वक्ता डॉ. के. के. कृष्णानी संयुक्त निदेशक आई.सी.ए.आर. आईआईएबी रांची झारंखंड ने “जलवायु अुनुकूल कृषि व पर्यावरणीय स्थिरता में बायोप्रोस्पेस्टिंग का प्रयोग” विषय पर अपना व्याख्यान दिया। डॉ. कृष्णानी  ने कृषि को परिभाषित करते हुए कहा कृषि का संबंध फसलों से नहीं है अपितु मछलीपालन, कुक्कुट पालन, भी इसमें समाहित है। वर्तमान में माइक्रोप्लास्टिक तत्व हमारे शरीर में घुल रहा है जिसके कारण मनुष्य कैंसर एंव विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो रहे है। 2050 तक हमारी जनसंख्या इतनी अधिक बढ़ जाएगी कि खाद्य संकट उत्पन्न हो जाएगा। इस समस्या से निपटने हेतु समग्र कृषि की अवधारणा को मूर्त रूप देना होगा युवा पीढ़ी को कृषि से जोड़ना आवश्यक है क्योंकि वे वैज्ञानिक तकनीक से कृषि करने में समर्थ है। श्रेष्ठ शोध प्रत्र व पोस्टर प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया जिनके नाम इस प्रकार है-

इनोवेटिव रिसर्च अवार्ड में प्रथम – स्येदा तमन्ना यास्मिन, रिसर्च स्कॉलर, डॉन बोस्को यूनिवर्सिटी, असम। द्वितीय - काजोरी बारीक, सिस्टर निविदिता यूनिवर्सिटी। तृतीय - समीक्षा मिश्रा। सांत्वना - श्रीमान हेमंत कुमार।

ग्रीन इन्वायरमेंटल अवार्ड में प्रथम - डॉ. भावना पांडे विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोटेक्नोलॉजी भिलाई महिला महाविद्यालय। द्वितीय – स्येदा तमन्ना यास्मिन, रिसर्च स्कॉलर डॉन बोस्को यूनिवर्सिटी, असम। तृतीय - समीक्षा मिश्रा।

सस्टनेबल लाईफस्टाइल अवार्ड में प्रथम - संदीप आर, निविदिता वी, पैरी सुंदरम डी, चेन्नई। द्वितीय - हिमांशु पांडे, एआईएमएसआर, इंदौर(मध्यप्रदेश)। तृतीय - योगिता लोखंडे।

पोस्टर कॉम्पीटिशन में प्रथम - स्येदा तमन्ना यास्मिन, रिसर्च स्कॉलर डॉन बोस्को यूनिवर्सिटी, असम।  द्वितीय – पुकेश कुमार नाग रिसर्च स्कॉलर, शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नात्कोत्तर महाविद्यालय दुर्ग। तृतीय - मनीषा साहू और अंजली चौहान ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी।

बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन में प्रथम -डॉ. किरण पल्लिवाल स.प्रा. एक्रोपोलिस इंस्टिट्यूट इंदौर।  द्वितीय – हेमपुष्पा उर्वषा। तृतीय – डॉ. वृषाली अशोक वाघ स.प्रा. नारण लाल कॉलेज ऑफ़ प्रोफेशनल एंड एप्लाइड साइंस, गुजरात। 

पोस्टर रील, विडियों नवाचार शोध पुरस्कार के निर्णायक डॉ. शिवानी शर्मा विभागाध्यक्ष बायोटेक्नोलॉजी, डॉ. नीना बागची विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान, डॉ. सावित्री शर्मा प्रोफेसर शिक्षा विभाग, डॉ. शैलजा पवार प्रोफेसर शिक्षा विभाग, डॉ. अभिलाषा शर्मा स.प्रा. शिक्षा विभाग,  डॉ. संजू सिन्हा स. प्रा. जन्तुविज्ञान, शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग, डॉ. रीना कुलश्रेष्ठ रुंगटा डेंटल कॉलेज भिलाई, डॉ. भावना पाण्डेय भिलाई महिला महाविद्यालय, थी।

कार्यक्रम में देश भर के प्राध्यापक व शोधार्थियों ने भाग लिया कार्यक्रम में मंच संचालन व धन्यवाद ज्ञापन संयुक्ता पाढ़ी विभागाध्यक्ष अंग्रेजी ने किया। 

कार्यक्रम को सफल बनाने में आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. शिवानी शर्मा विभागध्यक्ष बायोटेक्नालाजी,डॉ. सुनीता वर्मा विभागाध्यक्ष हिंदी, श्रीमती रूपाली खर्चे विभागाध्यक्ष कम्प्यूटर, स.प्रा. जे.पी साहू, स.प्रा. योगिता लोखंडे माइक्रोबायोलॉजी, स.प्रा. समीक्षा मिश्रा माइक्रोबायोलॉजी, स.प्रा. अभिलाषा शर्मा, स.प्रा. एमएम तिवारी, स.प्रा. हितेश सोनवानी, स.प्रा. जया तिवारी ने विशेष योगदान दिया।