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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के एक गांव में बारूद फैक्ट्री में विस्फोट की घटना दिल दहला देने वाली विस्फोट

  रायपुर  असलबात न्यूज़.    छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के एक गांव में बारूद फैक्ट्री में विस्फोट की घटना दिल दहला देने वाली वि...

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रायपुर 

असलबात न्यूज़.   

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के एक गांव में बारूद फैक्ट्री में विस्फोट की घटना दिल दहला देने वाली विस्फोट अब तो नहीं हो रही है, लेकिन आसपास के गांव के लोगों को अभी भी ऐसा लगता है कि विस्फोट की गूंज सुनाई दे रही है। है। बारूद फैक्ट्री में इस भयानक विस्फोट ने पल भर में 10 से अधिक लोगों को राख में बदल दिया। 10 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कुछ घायलों का रायपुर अस्पताल में अभी भी इलाज चल रहा है। यह बारूद फैक्ट्री जिलेटिन में बनाई गई थी और इसकी शासकीय कम्पनियों को खनन क्षेत्र में स्थापित किया गया था। घटना के समय वहां भारी मात्रा में बारूद का जखीरा भंडारित था।

एक और गंभीर जानकारी सामने आई है कि, जिस समय यह घटना हुई उसके 10 मिनट बाद भी ऐसी विस्फोट की घटना हुई तो उसमें सैकड़ो लोगों की जान जा सकती थी। उस समय सुबह 8:00 बजे से फैक्ट्री में जनरल शिफ्ट के मजदूरों की एंट्री शुरू हो गई थी, यह मजदूर फैक्ट्री के गेट पर पहुंच गए थे।  उनकी एंट्री शुरू हुई थी लेकिन धमाका हुआ तो भगदड़ मच गई और जनरल शिफ्ट में काम पर जाने के लिए तैयार हो रहे सभी मजदूर भाग गए। इनमें मजदूरों की संख्या भी काफी अधिक थी। बताया जाता है कि अनेक सैकड़ो की संख्या में मजदूर काम करते थे। 
बारूद फैक्ट्री में विस्फोट की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और जिसने भी इस विस्फोट की आवाज सुनी, वह बारूद फैक्ट्री में कोई बड़ी घटना हो गई। यहां के लोग बता रहे हैं कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा मुकदमे के लिए पहले भी विस्फोट किया गया था, लेकिन उसकी आवाज धीमी थी। गांव के लोगों द्वारा इस पर कई बार आपत्तियां दी गई थीं, इसलिए कंपनी प्रबंधन द्वारा कहा गया था कि शासकीय निगमों में जीवित रहने के पहले परीक्षण जरूरी होता है, इसलिए विस्फोट का परीक्षण करना पड़ता है। विस्फोट से आसपास के गांव में कई घरों में विस्फोट हो गया, कई घरों में समान गिर गया, कुछ घरों में टेलीविजन बंद हो गया। 
हमारे आस-पास के लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी मिली है कि, उसके अनुसार जिस यूनिट में विस्फोट हुआ है, वह तीन ताल की सबसे मोटी ताल लगभग 30 फीट की गहराई पर है। यह फैक्ट्री का एक बड़ा हिस्सा है। खतरा यह है कि विस्फोट की शुरुआत हुई इस बायल के ऊपर तल पर पूरा कंप्यूटर सिस्टम संचालित है, जहां से बारूद बनाने के पूरे काम को नियंत्रित किया जाता था। इसके ऊपर की तलहटी पर सल्फर, यूरिया, चीनी मिश्रित करने के लिए बनाया गया था। यही मिक्सिंग के काम में सबसे अधिक मजदूर कार्य करते थे। अभी जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार घटना के समय रात में पाली के मजदूर काम कर रहे थे।  जिसके कारण मज़दूरों की संख्या में उनका समय कम था। जनरल शिफ्ट के मजदूरों की एंट्री सुबह 8:00 बजे से शुरू होने वाली थी, उसके लिए मजदूर फैक्ट्री के गेट तक पहुंच गए थे, लेकिन विस्फोट हो गया तो भगदड़ मच गई और सभी मजदूरों के काम पर जाने के बजाय वापस लौट आए। यह मजदूर भी वहां तक ​​पहुंच जाता, जिसमें महिला मजदूरों की संख्या काफी अधिक होती तो इस अंदाज में पेश किया जा सकता था कि घटना का क्या रूप हो सकता था। 20 मिनट बाद बंग होने से मजदूरों की जान जा सकती थी। यही दूसरी मंजिल पर मसाला बना रहे कुछ व्यापारी ने विस्फोट होने पर वहां से कूद कर अपनी जान बचाई। जो तस्वीर आप देख रहे हैं, उसमें एक फीचर कैमरे में रिकॉर्ड किया गया है, आप उसमें देख सकते हैं कि धमाका कितना मजबूत था। 

जो जानकारी मिली है उसके अनुसार इस बारूद फैक्ट्री की स्थापना वर्ष 1990-91 के दौरान हुई थी। तब से इस फैक्ट्री में सैकड़ो मजदूर काम कर रहे हैं और विस्फोट कि घटना में आसपास के गांव के ही 109 मजदूर मारे गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि मंडला से आकर भी सैकड़ो मजदूर काम करते थे, उनमें से भी कई लापता हैं, फिर भी यहां के गांव के लोगों द्वारा इस फैक्ट्री पर भी सवाल उठाया जा रहा है, यह तो जांच का विषय है, की फैक्ट्री का नाम वैध नहीं था और इस बार आगे की बातें यदि संभव हो तो किसी बाहरी व्यक्ति के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बताया जा रहा है कि बुरे मृत शरीरों को खोजने का काम चल रहा है। किसी कि मौत की खबर नहीं मिली है। विस्फोट इतना भयानक था कि कई मीटर दूर तक उछलते हुए मानव अंगों द्वारा स्थान-स्थान पर शरीर के टुकड़े देखकर हर किसी की रूह का अनुमान लगाया जा सकता है।